जहां कमल पर प्रकट हुईं राधा रानी… ब्रज का यह स्थान क्यों माना जाता है खास?
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राधा रानी को बरसाने वाली के नाम से जाना जाता है, लेकिन उनके जन्म स्थान को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं. मथुरा के कमल कुंड से जुड़ी एक प्रमुख मान्यता के अनुसार, यहीं राधा रानी का प्राकट्य हुआ था. पंडित गौरांग शर्मा ने ब्रह्मवैवर्त पुराण और प्रचलित लोककथाओं के आधार पर इस कथा से जुड़ी जानकारी साझा की.
मथुरा: राधा रानी का नाम आते ही बरसाने का स्मरण हो जाता है. उन्हें बरसाने वाली के नाम से जाना जाता है, लेकिन उनके जन्म स्थान को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं.
ब्रज में राधा और कृष्ण का नाम हमेशा एक साथ लिया जाता है और दोनों की लीलाओं से जुड़ी कई धार्मिक कथाएं सुनने को मिलती हैं.
राधा रानी के जन्म से जुड़ी एक प्रमुख मान्यता उस स्थान से जुड़ी है, जहां आज भी कमल कुंड मौजूद है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, इसी कुंड से राधा रानी का प्राकट्य हुआ था. यही वजह है कि यहां हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
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स्थानीय लोगों के अनुसार, इस कमल कुंड का जीर्णोद्धार कर इसे श्रद्धालुओं के लिए खोला गया है, ताकि लोग यहां आकर राधा रानी के प्राकट्य से जुड़ी मान्यताओं को जान सकें. कुंड में आज भी कमल के फूल दिखाई देते हैं और यहां आने वाले श्रद्धालु इसे द्वापर युग की स्मृतियों से जोड़कर देखते हैं.
लोकल 18 से बातचीत में पंडित गौरांग शर्मा ने बताया कि ब्रह्मवैवर्त पुराण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में वर्णित मान्यता के अनुसार, माता कीर्तिदा ने अपने गर्भ में केवल वायु को धारण किया था. योगमाया की प्रेरणा से वायु के प्रगटीकरण के समय श्री राधा रानी कन्या रूप में प्रकट हुईं.
उन्होंने एक अन्य प्रचलित लोककथा का भी उल्लेख किया. इसके अनुसार, जब राजा वृषभानु एक सरोवर के पास से गुजर रहे थे, तब उन्हें पानी में हजार पंखुड़ियों वाले दिव्य कमल पर तैरती हुई एक सुंदर बालिका मिली. राजा वृषभानु ने उस बालिका को अपनी पुत्री के रूप में अपना लिया.