18 साल की उम्र में जब लड़कियां अपने करियर और फ्यूचर को लेकर बड़े-बड़े सपने देखती हैं, तब एक लड़की ने अपनी ही सहेली की इतनी बेरहमी से हत्या कर दी कि सुनने वालों की रूह कांप गई. जलन, नफरत और शैतानी सनक के चक्कर में किए गए इस खौफनाक कत्ल ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था. आज 30 साल बाद, 50 साल की हो चुकी इस महिला को आखिरकार मौत की सजा सुनाई गई. उसे लीथल इंजेक्शन यानी जानलेवा इंजेक्शन देकर मौत दी जाएगी. अगर ये सजा पूरी होती है, तो पिछले 200 सालों के इतिहास में ये ऐसी पहली घटना होगी.
1995 का वो खौफनाक कांड: प्यार, जलन और शैतानी प्रतीक
ये मामला अमेरिका के टेनेसी राज्य से सामने आया है, जहां 50 साल की क्रिस्टा पाइक को लीथल इंजेक्शन देने की तारीख बेहद करीब आ चुकी है. टेनेसी के इतिहास में साल 1820 के बाद यानी पिछले 200 से भी ज्यादा सालों में ये पहला मौका है जब किसी महिला को मौत की सजा दी जा रही है. क्रिस्टा पाइक ने साल 1995 में, जब वो केवल 18 साल की थी, अपनी क्लासमेट कॉलीन स्लेमर की बड़ी ही बेरहमी से हत्या कर दी थी. इस कत्ल के पीछे कोई बहुत बड़ी दुश्मनी नहीं, बल्कि सिर्फ जलन, शक और प्यार में अंधी सनक थी.
ये पूरी कहानी 22 जनवरी 1995 की है. 18 साल की क्रिस्टा पाइक नॉक्सविले जॉब कॉर्प्स में पढ़ाई कर रही थी, जहां उसकी मुलाकात 19 साल की कॉलीन स्लेमर से हुई. पुलिस जांच और अदालती दस्तावेजों से पता चलता है कि क्रिस्टा के मन में ये वहम बैठ गया था कि कॉलीन उसके और उसके बॉयफ्रेंड टेडारिल शिप के बीच आ रही है. जलन और नफरत में अंधी होकर क्रिस्टा ने कॉलीन को हमेशा-हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का एक बेहद खौफनाक प्लान बनाया.
- क्रिस्टा और उसका बॉयफ्रेंड टेडारिल, कॉलीन को बहला-फुसलाकर एक सूनसान इलाके में ले गए. वहां पहुंचते ही दोनों ने कॉलीन पर हमला बोल दिया.
- बॉक्स कटर और पत्थरों से हमला: क्रिस्टा और उसके साथी ने कॉलीन पर धारदार बॉक्स कटर से कई वार किए और भारी पत्थरों से पीट-पीटकर उसकी जान ले ली.
- शरीर पर उकेरा शैतानी निशान: हत्या के दौरान कॉलीन के शरीर पर स्टार जैसा एक निशान उकेरा गया. उस दौर में अमेरिका में ‘शैतानी पूजा’ को लेकर भारी खौफ फैला हुआ था, जिसकी वजह से इस घटना ने पूरे देश को सन्न कर दिया था.
वारदात को अंजाम देने के बाद क्रिस्टा ने कभी भी अपना जुर्म छुपाने की कोशिश नहीं की और पुलिस के सामने सब कुछ सच-सच कबूल कर लिया था.
‘मैं एक दिमागी रूप से बीमार 18 साल की बच्ची थी’, बचाव दी ये दलील
क्रिस्टा पाइक को इस जघन्य कत्ल के लिए अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन पिछले तीन दशकों से उसके वकील और समर्थक इस सजा का कड़ा विरोध कर रहे हैं. वकीलों का कहना है कि 18 साल की उम्र में किए गए किसी अपराध के लिए मौत की सजा देना सही नहीं है, खासकर तब जब आरोपी का अपना बचपन भयानक जुल्मों और प्रताड़ना के बीच बीता हो.
क्रिस्टा के वकील स्टीफन फेरेल ने कोर्ट में उसके बचपन की दर्दनाक कहानी बताई, क्रिस्टा जब चलना सीख रही थी, तभी से उसका गंभीर यौन शोषण शुरू हो गया था. महज 11 साल और फिर 17 साल की उम्र में उसके साथ दरिंदगी और रेप हुआ. बाद में डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि क्रिस्टा बाइपोलर डिसऑर्डर और PTSD जैसी खतरनाक दिमागी बीमारियों से पीड़ित थी.
अपनी रहम याचिका में क्रिस्टा ने खुद लिखा, ‘मैं एक दिमागी रूप से बीमार 18 साल की बच्ची थी. मुझे ये समझने में कई साल लग गए कि मैंने कितना बड़ा पाप किया है. मैंने किसी के बच्चे, किसी की बहन और दोस्त की जान ली. आज जब मैं सोचती हूं कि मेरे अंदर इतना खौफनाक अपराध करने की क्षमता थी, तो मुझे खुद से घिन आती है’.
वकीलों का ये भी कहना है कि आज का विज्ञान ये साबित कर चुका है कि 18 साल की उम्र तक इंसानी दिमाग पूरी तरह विकसित नहीं होता. इसके अलावा, इस केस में शामिल क्रिस्टा के 17 साल के बॉयफ्रेंड को उम्र कम होने की वजह से उम्रकैद मिली, जबकि तीसरे साथी को सिर्फ प्रोबेशन पर छोड़ दिया गया था.
‘मेरी बेटी दर्द में भागने की कोशिश कर रही होगी’, मां का 30 साल पुराना दर्द
एक तरफ जहां क्रिस्टा के वकील उसकी खराब मानसिक हालत की दुहाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मारी गई कॉलीन स्लेमर की मां मे मार्टिनेज आज 30 सालों तक इंसाफ के लिए लड़ाई लड़ी. फ्लोरिडा में रह रही मे मार्टिनेज चाहती हैं कि क्रिस्टा पाइक को हर हाल में लीथल इंजेक्शन देकर सजा दी जाए.
फोन पर बात करते हुए मे मार्टिनेज का गला भर आया. उन्होंने कहा, ‘जब भी मैं उस भयावह रात के बारे में सोचती हूं, मेरी रूह कांप जाती है. मुझे लगता है कि मेरी बेटी कॉलीन कितना दर्द झेल रही होगी और उस अंधेरे में अपनी जान बचाने के लिए भागने की कोशिश कर रही होगी’.
अपनी मासूम बेटी को याद करते हुए मां ने बताया ‘कॉलीन बेहद शांत, हंसमुख और मिलनसार स्वभाव की लड़की थी. उसे कंप्यूटर से बहुत लगाव था और वो स्पेशल ओलंपिक्स में वॉलंटियर के तौर पर काम करती थी. कत्ल वाली रात कॉलीन ने अपनी मां को फोन किया था, लेकिन खराब नेटवर्क की वजह से बात कट गई. जब तक मां ने दोबारा फोन मिलाया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. मे मार्टिनेज कहती हैं कि ऐसा एक भी दिन या पल नहीं बीतता जब वो अपनी कॉलीन को याद न करती हों. अगर कॉलीन आज जिंदा होती, तो वो 51 साल की हो चुकी होती.
अमेरिका में महिलाओं की फांसी कितनी दुर्लभ है?
डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में महिलाओं को मौत की सजा दिया जाना बेहद दुर्लभ माना जाता है.
- 200 साल पुराना रिकॉर्ड: अगर टेनेसी में क्रिस्टा पाइक को लीथल इंजेक्शन दिया जाता है, तो साल 1820 के बाद यानी 200 से भी ज्यादा सालों में ये टेनेसी राज्य की पहली महिला फांसी होगी.
- पूरे अमेरिका की स्थिति: अगर पूरे देश का रिकॉर्ड देखें तो 1976 के बाद से अब तक केवल 18 महिलाओं को ही मौत की सजा दी गई है, जो कुल सजाओं का महज 1 प्रतिशत है.
- हाल के मामले: साल 2021 में अमेरिकी संघीय सरकार ने लिसा मोंटगोमरी को फांसी दी थी, जो करीब 70 सालों में पहली संघीय महिला फांसी थी. इसके बाद 2023 में मिसौरी में एम्बर मैकलॉघलिन को फांसी दी गई थी.
क्या सुप्रीम कोर्ट से मिलेगी राहत या क्रिस्टा को मिलेगी मौत?
अब ये कानूनी लड़ाई अपने सबसे अंतिम मोड़ पर पहुंच चुकी है. टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने क्रिस्टा पाइक की दया याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है और साफ कर दिया है कि राज्य सरकार सजा में कोई नरमी नहीं बरतेगी.
गवर्नर से झटका मिलने के बाद अब क्रिस्टा के वकीलों ने सीधे अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और लीथल इंजेक्शन के इस फैसले पर फौरन रोक लगाने की मांग की है. कानूनी जानकारों का मानना है कि अगर ये मुकदमा आज के दौर में लड़ा जाता तो कोई भी जूरी क्रिस्टा के बचपन में हुए अत्याचारों और दिमागी बीमारी को देखकर उसे मौत की सजा नहीं देती.
फिलहाल, पूरी दुनिया की निगाहें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं. अब देखना ये होगा कि क्या देश की सबसे बड़ी अदालत 30 साल पुराने इस खौफनाक हत्याकांड में 50 साल की क्रिस्टा पाइक को कोई राहत देती है या फिर टेनेसी के 200 साल पुराने इतिहास में मौत की सजा का एक नया पन्ना दर्ज हो जाएगा.