ड्रैगन ने किया ‘समुद्र मंथन’, पाताल से ढूंढ निकाला बेशकीमती खजाना
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China Deep Sea Drilling Discovery: चीन एशिया का वो देश है, जो रणनीतिक मामलों के साथ-साथ वैज्ञानिक और आर्थिक मोर्चे पर भी नए-नए काम करता रहता है. इस बार उसने धरती या आसमान नहीं बल्कि पाताल से खजाना खोद निकाला है. इससे समुद्र से जुड़े कई रहस्य सामने आ सकते हैं.
चीन ने समुद्र मंथन से ढूंढ निकाला खजाना. (सांकेतिक तस्वीर/ रॉयटर्स)
China Deep Sea Drilling Discovery: समुद्र की सतह के नीचे क्या छिपा है? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए चीन ने समुद्र की गहराइयों में एक बड़ी वैज्ञानिक छलांग लगाई है. चीन के समुद्री ड्रिलिंग जहाज ‘मेंगशियांग’ ने दक्षिण चीन सागर की गहराई में करीब 5 किलोमीटर नीचे तक ड्रिलिंग की. चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के मुताबिक इस जहाज ने दक्षिण चीन सागर में 30 दिनों का वैज्ञानिक परीक्षण अभियान पूरा किया. इस दौरान जहाज ने समुद्र के नीचे करीब 5000 मीटर की गहराई तक ड्रिलिंग की और करीब 865 मीटर तक धरती की परत में प्रवेश किया.
सवाल ये है कि चीन के इस समुद्र मंथन से उसे हासिल क्या हुआ. ड्रिलिंग के बाद चीन ने समुद्र की गहराइयों से बेसाल्ट चट्टान का नमूना निकाला है. ये कोई ऐसी-वैसी उपलब्धि नहीं है, अब तक गहरे समुद्री बेसिन से कठोर चट्टान का नमूना निकालने वाले दो ही देश थे – जापान, अमेरिका. अब इसमें चीन का भी नाम जुड़ गया है. सबसे खास बात यह रही कि वैज्ञानिकों ने करीब 4.27 मीटर लंबा बेसाल्ट का नमूना बाहर निकाला. बेसाल्ट समुद्र की तलहटी में मिलने वाली बेहद कठोर चट्टान है. इतनी गहराई में इसे काटकर सुरक्षित लेकर आना आसान काम नहीं माना जाता.
358 घंटे और समुद्र की अंधेरी दुनिया
इस अभियान में वैज्ञानिकों ने समुद्र की करीब 4,000 मीटर गहराई पर रिमोट से संचालित दो खास रोबोटों का इस्तेमाल किया. इन रोबोटों ने कुल मिलाकर 358 घंटे से ज्यादा काम किया. एक बार तो लगातार 103 घंटे तक ऑपरेशन चलाया गया. वैज्ञानिकों ने नमूनों को जहाज पर ही काटने, स्कैन करने, जांचने और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया भी पूरी की. इससे चीन को गहरे समुद्र में वैज्ञानिक ड्रिलिंग के पूरे सिस्टम को विकसित करने में मदद मिली है.
इस चट्टान में ऐसा क्या खास है?
वैज्ञानिकों के लिए यह बेसाल्ट महज एक पत्थर नहीं है. इसके जरिये दक्षिण चीन सागर के निर्माण और विस्तार की प्रक्रिया को समझने में मदद मिल सकती है. साथ ही लाखों-करोड़ों साल पहले इस क्षेत्र का समुद्री पर्यावरण कैसा रहा होगा, इसकी जानकारी भी मिल सकती है. भविष्य में ऐसी खोजें समुद्र की अत्यधिक गहराई में मौजूद ऊर्जा संसाधनों की संभावनाओं को समझने में भी उपयोगी हो सकती हैं.
शिप नहीं साइंटिफिक लैब है मेंगशियांग
- चीन ने मेंगशियांग को 2024 में आधिकारिक रूप से सेवा में शामिल किया था. यह चीन का पहला घरेलू स्तर पर निर्मित समुद्री ड्रिलिंग जहाज है. इसकी डिजाइन क्षमता 11 किलोमीटर तक ड्रिलिंग करने की है.
- जहाज में चार तरह के ड्रिलिंग सिस्टम, तीन तरह की कोर सैंपलिंग तकनीक और एक बड़ा अत्याधुनिक प्रयोगशाला मौजूद है. चीन अब इस जहाज को सिर्फ समुद्री शोध तक सीमित नहीं रखना चाहता.
- गहरे समुद्र में इस्तेमाल होने वाली ड्रिल, विशेष स्टील, सटीक उपकरण और भारी मशीनरी जैसे क्षेत्रों में इससे नई औद्योगिक क्षमताएं विकसित हो रही हैं.
समंदर से भी पैसे कमा रहा चीन
समुद्र की गहराई में यह सफलता चीन की व्यापक समुद्री रणनीति का हिस्सा है. चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के अनुसार, 2025 में देश की समुद्री अर्थव्यवस्था 11.02 ट्रिलियन युआन तक पहुंच गई थी और सालाना आधार पर इसमें 5.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई. चीन का यह सागर मंथन सिर्फ चट्टान निकालने तक सीमित नहीं है. इसके पीछे समुद्र के रहस्यों को समझने, नई तकनीक विकसित करने, ऊर्जा संसाधनों की तलाश करने और समुद्री उद्योग को मजबूत बनाने की लंबी योजना दिखाई देती है.