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Britain RAF Fairford Controversy: ब्रिटेन के RAF फेयरफोर्ड एयर बेस पर जो कुछ हुआ, वो अमेरिका का बड़ा नुकसान करने की साजिश थी. सोचिए इतनी बड़ी बात होने के बाद भी अगर आरोपियों को जल्दी छोड़ दिया जाए, तो सवाल उठना लाजमी है. आखिर किससे डरकर ब्रिटेन ने ऐसा किया है?
आएएफ फेयरफोर्ड के आरोपियों को छोड़ने में जल्दबाजी क्यों? (रॉयटर्स)
Britain RAF Fairford Controversy: ब्रिटेन में इतनी बड़ी घटना हुई और उसने सिक्योरिटी ब्रीच के मसले को इतना हल्के में लिया है कि चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है. इस बड़ी चूक के आरोपियों को ब्रिटेन की सरकार ने जिस तेजी से रिहा किया है वो तमाम सवाल खड़े कर रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ब्रिटेन की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि यूके एयरबेस पर संदिग्ध आतंकी हमले के 5 संदिग्धों को सोमवार दोपहर जमानत पर छोड़ दिया गया, इससे वे हैरान हैं.
ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे इन संदिग्धों को नहीं छोड़ते. उन्होंने संकेत दिया कि इनकी कार्रवाई ईरान से जुड़ी हो सकती है, लेकिन विस्तार से कुछ नहीं बताया. ट्रंप ने सिर्फ इतना कहा- ‘मुझे जवाब पता है. मैं बहुत साफ-साफ बता सकता हूं, लेकिन बेहतर है कि न कहूं.’ इसके बदले में ब्रिटिश आतंकवाद निरोधी पुलिस ने साफ किया कि संदिग्धों को छोड़ने का मतलब जांच खत्म होना नहीं है. पांचों पर सख्त शर्तें लगाई गई हैं और उनकी आवाजाही पर नजर रखी जा रही है.
ब्रिटिश पीएम ने नहीं दिया जवाब
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से ट्रंप की टिप्पणी पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया और पुलिस के पुराने बयानों की ओर इशारा किया. ईरान ने इस घटना में किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया है. ये पांचों आरोपी रविवार सुबह पश्चिमी इंग्लैंड के फेयरफोर्ड बेस के पास गिरफ्तार किए गए थे. इसी बेस से अमेरिकी B-1 बमवर्षक विमान ईरान के खिलाफ मिशन उड़ा चुके हैं. पुलिस के मुताबिक सभी 5 ब्रिटिश नागरिक हैं, लंदन क्षेत्र के रहने वाले और उनकी उम्र 23 से 25 साल के बीच है. वरिष्ठ अधिकारी लॉरेंस टेलर ने कहा कि पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है.
क्यों मच रहा है बवाल?
दरअसल इस घटना को लेकर कहा जा रहा था कि इसमें कहीं न कहीं ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का हाथ है. हालांकि अभी इसका कोई सबूत सामने नहीं आया है लेकिन इस घटना को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है. ऐसे में जब संदिग्धों को ब्रिटेन ने झट से रिहा कर दिया, तो सवाल ये उठने लगे कि क्या वाकई वो ईरान से डरा हुआ है और कोई किसी विवाद में पड़ना नहीं चाहता. कभी ईरान के लंदन स्थित दूतावास ने बयान जारी कर कुछ ब्रिटिश लोगों और मीडिया की ओर से ईरान को जोड़ने की कोशिशों की निंदा की.
आनन-फानन में रिहा हुए आरोपी
रक्षा सचिव वेस स्ट्रीटिंग ने कहा कि जांच जारी है और पांचों संदिग्ध सख्त जमानत शर्तों पर हैं. जुलाई में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने फेयरफोर्ड बेस के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए ब्रिटेन को चेतावनी दी थी कि ईरानी क्षेत्र पर हमले के लिए इस्तेमाल होने वाला कोई भी बेस उनके लिए वैध निशाना है. ट्रंप ने रविवार को इन गिरफ्तारियों को शानदार बताया था. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन लंबे समय से इन पर नजर रखे हुए थे. स्थानीय महिला ने शनिवार रात 3 सफेद वैन को बेस के पास खड़ा देखकर पुलिस को सूचित किया था.