5000 मीटर से ‘खजाना’ ले आया चीन, समंदर की गहराई से निकालेगा तेल?
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China News Hindi: चीन के समुद्री ड्रिलिंग जहाज ‘मेंगशियांग’ ने दक्षिण चीन सागर में करीब 5,000 मीटर गहराई तक ड्रिलिंग की क्षमता साबित की है. जहाज ने समुद्री तल से 4.27 मीटर लंबा बेसाल्ट नमूना निकाला. इस उपलब्धि के साथ चीन अमेरिका और जापान के बाद गहरे समुद्री बेसिन से कठोर चट्टान निकालने वाला तीसरा देश बन गया.
चीन ने 5000 मीटर की गहराई में ड्रिलिंग की क्षमता हासिल की.
China Deep Sea Drilling: चीन ने समुद्री दुनिया में बड़ी कामयाबी हासिल की है. जो रिकॉर्ड अभी तक सिर्फ चीन और जापान के नाम था, उसमें वह कामयाब हो गया है. उसके समुद्री ड्रिलिंग जहाज ‘मेंगशियांग’ ने दक्षिण चीन सागर की समुद्री तलहटी से करीब 4.27 मीटर लंबा बेसाल्ट चट्टान का नमूना निकाला. ये नमूना 5,000 मीटर गहराई से निकाला गया है, जिसके जरिए उसने अपनी ड्रिलिंग की क्षमता साबित की है. इस उपलब्धि के साथ चीन उन चुनिंदा देशों की कतार में पहुंच गया है, जो इतने गहरे समुद्री बेसिन से कठोर चट्टान निकालने में सक्षम रहे हैं. ऐसा करने वाला वह तीसरा देश बन गया है.
5,000 मीटर नीचे आखिर मिला क्या?
कल्पना कीजिए, आपके ऊपर करीब 5 किलोमीटर गहरा समुद्र है और उसके नीचे समुद्र की कठोर तलहटी. इसी अंधेरे और बेहद दबाव वाले इलाके में चीन ने ड्रिलिंग अभियान चलाया. चीन के प्राकृतिक संसाधन मंत्रालय के मुताबिक, ‘मेंगशियांग’ ने अपने विकसित किए गए ड्रिल के जरिए 4.27 मीटर लंबा बेसाल्ट नमूना निकाला. यह सिर्फ एक चट्टान का टुकड़ा नहीं है. वैज्ञानिकों के लिए इसमें दक्षिण चीन सागर के बनने, फैलने और करोड़ों वर्षों में उसके समुद्री पर्यावरण में हुए बदलावों के सुराग छिपे हैं. यही वजह है कि चीन इसे अपनी गहरे समुद्र में ड्रिलिंग क्षमता के लिए बड़ी उपलब्धि बता रहा है.
अमेरिका-जापान के क्लब में चीन की एंट्री
इस कामयाबी का सबसे बड़ा मतलब तकनीकी है. समुद्र की तलहटी से नरम मिट्टी या तलछट निकालना एक बात है, लेकिन हजारों मीटर पानी के नीचे जाकर कठोर बेसाल्ट चट्टान में ड्रिलिंग करना कहीं ज्यादा मुश्किल काम है. चीन के मुताबिक अमेरिका और जापान पहले ऐसे देश हैं जिन्होंने समुद्री ड्रिलिंग जहाजों की मदद से गहरे समुद्री बेसिन से कठोर चट्टान के नमूने निकाले हैं. अब चीन भी इस लिस्ट में शामिल हो गया है. यानी चीन ने सिर्फ एक नया रिकॉर्ड नहीं बनाया, बल्कि ऐसी तकनीकी क्षमता हासिल करने का दावा किया है जिसके लिए अब तक बहुत कम देश सक्षम रहे हैं.
चीन ने कैसे कामयाबी हासिल की?
इस अभियान की मुश्किल का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि चीन की टीम ने समुद्र की करीब 4,000 मीटर गहराई में दो ड्रोन का इस्तेमाल किया. जिसे दूर से कंट्रोल किया जा रहा था. इन दोनों ROV ने मिलकर 358 घंटे से ज्यादा काम किया. एक बार तो लगातार 103 घंटे तक ऑपरेशन चलाया गया. यहां सिर्फ ड्रिलिंग ही नहीं हुई. निकाले गए नमूनों की मौके पर ही पहचान, कटिंग, स्कैनिंग, जांच और सुरक्षित रखने की प्रक्रिया भी पूरी की गई. चीन का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया को अंतरराष्ट्रीय समुद्री वैज्ञानिक कार्यक्रमों के मानकों के मुताबिक अंजाम दिया गया.
चीन को इससे क्या फायदा होगा?
सबसे पहला फायदा विज्ञान को होगा. दक्षिण चीन सागर कैसे बना और उसकी समुद्री तलहटी समय के साथ कैसे बदली, इसे समझने में इन चट्टानों से महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है. वैज्ञानिकों को प्राचीन समुद्री पर्यावरण के बारे में भी नए सुराग मिल सकते हैं. समुद्र की गहराई में मौजूद चट्टानें उस दौर का रिकॉर्ड अपने अंदर रखती हैं, जब आज का समुद्री भूगोल मौजूद नहीं था.
दूसरा बड़ा फायदा ऊर्जा और समुद्री संसाधनों की खोज में हो सकता है. चीन खुद कह रहा है कि इस अभियान से बेहद गहरे समुद्र में ऊर्जा संसाधनों की खोज और विकास से जुड़े शोध को मदद मिलेगी. यानी आज जिस तकनीक का इस्तेमाल वैज्ञानिक चट्टान निकालने में कर रहे हैं, भविष्य में वही क्षमता समुद्र की बेहद गहराई में मौजूद संसाधनों की खोज और अध्ययन में काम आ सकती है.