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Business Ideas: कोडरमा के डिज्नीलैंड मेला में विकास कुमार ने हेल्पर से राजस्थानी अचार स्टॉल के मालिक बनने तक का सफर तय किया. वे 28 प्रकार के अचार बेचते हैं, जिनमें बांस करेला और लहसुन अचार झारखंड में लोकप्रिय हैं. आइये जानते हैं विकास की सफलता के बारे में.
कोडरमा: झुमरी तिलैया के पूर्णिमा टॉकीज केंपस डिज्नीलैंड मेला में राजस्थानी अचार स्टॉल के संचालक विकास कुमार की कहानी मेहनत और सीख से अपना कारोबार खड़ा करने की मिसाल है. विकास ने बताया कि करीब 5 साल पहले तक वह दूसरे लोगों के अचार के स्टॉल पर हेल्पर के रूप में काम करते थे. इस कमाई से वह अपने परिवार का पालन-पोषण करते थे.
इसी दौरान उन्होंने अचार के कारोबार को करीब से समझा और खुद का व्यवसाय शुरू करने का विचार आया. अनुभव और मेहनत के दम पर आज वह खुद के स्टॉल के मालिक हैं. विकास ने बताया कि अब वह अलग-अलग शहरों में लगने वाले डिज्नीलैंड मेलों में घूम-घूमकर अपना स्टॉल लगाते हैं. जहां भी डिज्नीलैंड मेला आयोजित होता है. वह वहां पहुंचकर ग्राहकों को अलग-अलग स्वाद का राजस्थानी अचार उपलब्ध कराते हैं.
28 वैरायटी का है अचार, कीमत लगभग एक समान
उन्होंने बताया कि उनके स्टॉल पर करीब 28 प्रकार के अचार उपलब्ध हैं. इनमें खट्टे, मीठे और तीखे स्वाद वाली कई वैरायटी शामिल हैं. ग्राहकों के लिए इसकी कीमत भी काफी सामान्य रखी गई है. उन्होंने बताया कि 80 रुपये में 250 ग्राम अचार उपलब्ध कराया जाता है. उनके स्टॉल पर अदरक, करेला, आंवला, लाल मिर्च समेत कई तरह के अचार मिलते हैं. इसके अलावा अलग-अलग मौसम में तैयार होने वाले सीजनल अचार भी यहां उपलब्ध हैं.
बांस करेला और लहसुन अचार की है ज्यादा मांग
विकास ने बताया कि झारखंड में बांस करेला और लहसुन के अचार को लोग काफी पसंद करते हैं. वहीं, मीठे स्वाद वाले अचार में आम और इमली की मांग अधिक रहती है. अलग-अलग स्वाद पसंद करने वाले ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार अचार खरीदते हैं. उन्होंने बताया कि उनके स्टॉल से सभी वैरायटी मिलाकर प्रतिदिन 15 किलो से अधिक अचार की बिक्री हो जाती है. इससे रोजाना करीब 4 से 5 हजार रुपये का कारोबार होता है. मेले में एक महीने तक स्टॉल रहने पर उनका कारोबार करीब डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है.
राजस्थानी मसालों से होता है तैयार
उन्होंने बताया कि अचार तैयार करने में बेहतर गुणवत्ता वाले तेल और खास राजस्थानी स्टाइल के मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. अचार राजस्थान से बनकर आते हैं. सही तरीके से तैयार और संरक्षित किए जाने पर ये अचार करीब 2 साल तक खराब हुए बिना रखे जा सकते हैं.