लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं उसके साथ ही नेताओं के बयान में अलग-अलग रंग दिख रहे हैं. बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती लगातार समाजवादी पार्टी (सपा) और उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव पर लगातार हमलावर रही हैं, लेकिन अब एक मुद्दे पर दोनों सुर से सुर मिलाते हुए दिख रहे हैं. गौर करने वाली बात यह है कि सोमवार को ही मायावती और अखिलेश यादव ने चुनाव प्रोसेस पर एक जैसा बयान दिया.
किस मुद्दे पर एक साथ दिख रहे अखिलेश यादव और मायावती?
अंग्रेजी अखबार में जब से चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू (बाएं) और विवेक जोशी के हवाले से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से फैसले लेने में मनमानी करने की खबरें मीडिया में आई हैं तब से तमाम विपक्षी दल देश में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं. समाजवादी पार्टी और उसके अध्यक्ष इसपर तो लगातार मुखर हैं. पार्टी पूरे राज्य में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लगातार धरना प्रदर्शन कर रही है, लेकिन अब तक चुप रहीं मायावती भी इसपर सोमवार को पहली बार मुखर हुईं.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नगीना लोकसभा सीट पर आजाद समाज पार्टी कांशीराम के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद के हिसाब से तनिक भी समीकरण नहीं है. इसके बावजूद वह वहां से 2024 के लोकसभा चुनाव में जीते. मायावती ने आरोप लगाया कि ईवीएम में गड़बड़ी करके बीजेपी वालों ने चंद्रशेखर आजाद को सांसद बनाया है.
बीएसपी सुप्रीमो ने कहा कि ईवीएम पर भरोसा बढ़ाने के लिए वीवीपैट का कॉन्सेप्ट लाया गया, जो पूरी तरह फेल है, क्योंकि सभी वीवीपैट पर्ची की गिनती नहीं होती है. उन्होंने कहा कि दुनिया के ज्यादातर देशों में बैलेट पेपर से चुनाव होते हैं, इसलिए बीएसपी भी भारत में पुरानी पद्धति बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग करती है.
ईवीएम पर फिर बोले अखिलेश यादव: दूसरी तरफ मायावती का ईवीएम के खिलाफ में बयान आने के कुछ देर बाद ही समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी करीब-करीब वही बातें दोहराई. अखिलेश यादव ने कहा कि आज आप (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) कहते हैं कि अमेरिका के साथ आपके काफी अच्छे रिश्ते हैं, तो क्या अमेरिका में बैलेट पेपर से वोटिंग नहीं होती है.
टेक्नोलाजी और रिसर्च के मामले में जर्मनी दुनिया के अव्वल देशों में है, लेकिन फिर भी वहां बैलेट पेपर से वोटिंग होती है. सपा अध्यक्ष ने कहा कि अगर 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में सभी 403 सीटों पर सपा के उम्मीदवार जीत जाएंगे तब भी वह ईवीएम का विरोध करते रहेंगे और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी करते रहेंगे. याद करा दें कि सपा अध्यक्ष ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 37 सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भी कुछ इसी तरह का बयान दिया था.
हर मोर्चे पर सपा को लताड़ने वाली मायावती अब क्यों मिला रहीं सुर
ईवीएम के मुद्दे पर यूपी के दो बड़े राजनेताओं के एक जैसे बयान आने के बाद राजनीतिक गलियारों में घुसुर-फुसुर शुरू हो गई है. यही चर्चा हो रही है कि बीएसपी सुप्रीमो हर मुद्दे पर समाजवादी पार्टी पर आक्रामक रहती हैं, लेकिन इस बार एक जैसा बयान क्यों दे रही हैं. यहां तक कि 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों पार्टियां मिलकर लड़ी थीं, लेकिन चुनाव बाद मायावती यह कहकर गठबंधन से अलग हो गई थीं कि सपा का वोट उनके प्रत्याशी को ट्रांसफर नहीं हुआ. जबकि चुनाव में बीएसपी शून्य से उठकर 10 सासंदों वाली पार्टी बन गई थी, वहीं सपा 2014 के बाद 2019 में भी पांच सीटों पर सिमटी रह गई थी. इतना ही नहीं, गठबंधन तोड़ने की घोषणा के दौरान मायावती ने समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव को जमकर सुनाया था.
इसके बाद से मायावती सत्ताधारी बीजेपी पर हमलावर होने के बजाय सपा को ही लताड़ती रही हैं. वो बात ब्राह्मण, मुस्लिम और दलित वोटरों का हो या किसी समसामायिक मुद्दों पर बीजेपी के खिलाफ हमलावर होने का, हर बार मायावती सपा को ही आड़े हाथ लेती हुई दिखती रही हैं.
यहां यह भी याद करा दें कि अखिलेश यादव अक्सर मायावती की सरकार में हुए काम की तारीफ करते देखे गए हैं. उदाहरण के लिए जब भी योगी सरकार में बने एक्सप्रेस वे की बात होती है तो अखिलेश यादव अपनी सरकार में बने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फाइटर प्लेन उतरने का उदाहरण देते हैं. इसके अलावा मायावती के राज में बने यमुना एक्सप्रेसवे की अच्छी क्वालिटी का भी जिक्र करते हैं. वह बताते रहे हैं कि मायावती और उनकी सरकारों में क्वालिटी से कभी भी कंप्रोमाइज नहीं किया गया. जबकि योगी राज में बने एक्सप्रेस-वे बड़े पैमाने पर घपले और घोटाले हुए जिसके चलते वह एक तरफ बन रहे हैं दूसरी तरफ धंस रहे हैं.
2019 के लोकसभा चुनाव में मंचों पर मायावती का खूब सम्मान करते देखे जाते थे अखिलेश यादव.
लंबे समय बाद बीजेपी के खिलाफ बोलीं मायावती
2014 के लोकसभा चुनाव के बाद से मायावती ने बीजेपी के खिलाफ बयानबाजी करना करीब-करीब छोड़ ही चुकी हैं. यही वजह है कि बीजेपी नेताओं और सीएम योगी आदित्यनाथ की एकाध जनसभाओं को छोड़ दें तो वह शायद ही कभी बीएसपी पर सीधे हमले करते हुए दिखे हैं. मायावती का भी बीजेपी के प्रति यही रवैया रहा है.
2024 के लोकसभा चुनाव हो या इसी साल अगस्त का महीना आकाश आनंद ने जैसे ही बीजेपी और सीएम योगी की सरकार के खिलाफ भाषण देना शुरू किया वैसे ही मायावती ने ना केवल उनकी रैलियों पर रोक लगाई बल्कि अब तो उनको पार्टी से भी बाहर कर दिया है. 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती का ईवीएम के मुद्दे पर बीजेपी पर निशाना साधना सबको चौंका रहा है.
लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि अखिलेश यादव राजनीति की जिस पिच पर अब तक अपना दांव पेच चलते रहे हैं, उसी पर अब मायावती क्यों उतर आई हैं. सवाल यह उठने लगे हैं कि बीजेपी और सीएम योगी को अब तक चुनावों में केवल समाजवादी पार्टी के खिलाफ रणनीति बनानी होती थी, लेकिन अब तो मायावती भी उनपर हमलावर है तो देखना दिलचस्प होगा कि टीम योगी डबल अटैक का सामना कैसी करती है.