मर्डर-म‍िस्‍ट्री और मशरूम… क्‍या है डेथ कैप मशरूम? केतन अग्रवाल की मौत से पहले स‍िया ने क्‍यों ढूंढा ये

मर्डर-म‍िस्‍ट्री और मशरूम… क्‍या है डेथ कैप मशरूम? केतन अग्रवाल की मौत से पहले स‍िया ने क्‍यों ढूंढा ये


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स‍िया गोयल और चेतन चौधरी ने म‍िलकर पुणे के केतन अग्रवाल को मौत के घाट उतारा. पुल‍िस अब इस मर्डर म‍िस्‍ट्री की तहकीकात कर 5000 से ज्‍यादा पन्नों की चार्जशीट दाख‍िल कर चुकी है. सिया और चेतन ने केतन के मर्डर से पहले गूगल पर ‘डेथ कैप मशरूम’ के बारे में सर्च क‍िया था. आखिर इस मर्डर म‍िस्‍ट्री से क्‍या है इस मशरूम का कनेक्‍शन.

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क्‍या है डेथ कैप मशरूम? हत्‍या से पहले स‍िया-चेतन ने क‍िया था गूगल सर्च

पुणे के केतन अग्रवाल और स‍िया गोयल की सगाई और उसके बाद हुए हत्‍याकांड ने पूरे देश को सन्न कर द‍िया था. अब इस केस में पुलिस ने 5000 से ज्‍यादा पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. इस चार्जशीट में यूं तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. लेकिन ज‍िक्र आया है ‘डैथ कैप मशरूम’ का भी. पुल‍िस ने चार्जशीट में बताया है कि हत्‍या से पहले स‍िया और उसके साथी चेतन चौधरी ने केतन की हत्‍या के ल‍िए गूगल पर तरीके सर्च क‍िए थे. इसी सर्च में उन्‍होंने ‘डेथ कैप मशरूम’ के बारे में भी जानकारी ली थी. पर क्‍या है ये ‘डेथ कैप मशरूम’ और क्‍यों इसके बारे में मौत या हत्‍या से जोड़कर बात की जाती है.

क्‍या है ‘डेथ कैप मशरूम’
यूं तो मशरूम आममौर पर घरों में खाया जाता है. आमतौर पर बटन, ऑइस्‍टर श‍िटाके या पोर्टोबेलो जैसे मशरूम दुनियाभर में खाए जाते हैं. ये सुरक्षि‍त भी होते हैं. लेकिन ‘डेथ कैप, डेस्‍ट्रॉइंग एंजेल्‍स, फूस वेबकैप, डेडली वेबकैप, ऑटम कलकैप जैसे कुछ ऐसे मशरूम हैं, ज‍िन्‍हें खाने से ल‍िवर या क‍िडनी में परेशानी हो सकती है. स‍िर्फ यही नहीं, इनसे जान भी जा सकती है. इन मशरूमों में एमाटॉक्‍सिन और ओरेलानाइन नाम का जहरीला पदार्थ होता है. दुनियाभर में मशरूम की एलर्जी से होने वाली मौतों के ल‍िए एमाटॉक्‍स‍िन ज‍िम्‍मेदार होता है.

सिया गोयल से पुलिस की पूछताछ जारी है.

डेथ कैप एक अमेनिटा मशरूम है, जो पेड़ों की जड़ों पर उगता है. ये जड़ों के सिरों पर छोटे-छोटे स्लिपर्स की तरह चिपक जाते हैं. ये पेड़ से शर्करा लेते हैं और बदले में जमीन के नीचे से इकट्ठा किए गए पोषक तत्व देते हैं. दिलचस्प बात यह है कि जमीन पर मशरूमों का एक घेरा दिखे तो लगता है, कोई इन्हें सिरेमिक से बनाकर रख गया होगा, क्योंकि ये एक-साथ देखने में बहुत सुंदर लगते हैं. लेकिन थोड़ा पीछे हटकर देखो तो पता चलता है कि ये मशरूम असल में पेड़ की जड़ों से जुड़े हुए हैं. डेथ कैप जैसे जड़ों से जुड़े मशरूमों के बीजाणु जल्दी खराब हो जाते हैं, इसलिए ये बहुत दूर तक नहीं फैल पाते. डेथ कैप मशरूम यूं तो स‍िर्फ यूरोप के पेड़ों की जड़ों के पास ही रहते थे. लेकिन इंसानों ने सजावटी मकसद से पेड़ों को इधर-उधर ले जाना शुरू कर दिया. नतीजा यह हुआ कि जो मशरूम सिर्फ यूरोप में रहते, वे इन पेड़ों की जड़ों के साथ सफर करके पैसिफिक नॉर्थवेस्ट में पहुँच गए हैं.

सबसे खतरनाक बात ये है कि ये द‍िखने में ब‍िलकुल आम मशरूम की तरह ही होते हैं. यानी आप खाते वक्‍त इसका अंदाजा नहीं लगा सकते कि गलत मशरूम खाया जा रहा है. ये मशरूम क‍िसी जहर की तरह काम नहीं करते और इन्‍हें खाने से तुरंत मौत नहीं होती. लेकिन इन्‍हें खाने के 20 म‍िनट से लेकर 24 घंटे के भीतर पेट दर्द, डायर‍िया, बेचैनी, उल्टी जैसी परेशानी होने लगती है. महज 1 से 6 दिनों में क‍िडनी और ल‍िवर पर असर द‍िखने लगता है. कई मामलों में 1 हफ्ते में मरीज की मौत हो जाती है या मरीज का ल‍िवर पूरी तरह काम करना बंद कर देता है.

ऑस्ट्रेलिया की विक्टोरिया सुप्रीम कोर्ट ने मशहूर मशरूम मर्डर केस में साल 2025 में एरिन पैटरसन को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. एरिन को 3 लोगों की हत्‍या और 1 शख्‍स की हत्‍या की कोशिश के आरोप में ये सजा सुनाई गई थी. एरिन ने भी अपने एक्‍स हस्‍बैंड के र‍िश्‍तेदारों को घर प बुलाकर ‘डेथ कैप मशरूम’ से बनी ड‍िश ख‍िलाई थी.



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