बहराइच: पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने वाले किसान आज खेती-किसानी से बंपर मुनाफा कमा रहे हैं. बहराइच जिले के सोहरवा गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान राहुल कुमार गुप्ता और लालता प्रसाद गुप्ता ने करेले की खेती से सफलता की एक नई मिसाल कायम की है. मचान विधि और उन्नत किस्म के बीजों का इस्तेमाल करके वे न केवल बेहतर गुणवत्ता की उपज ले रहे हैं, बल्कि बाजार में भी उनके करेले की भारी मांग है.
लॉकडाउन से शुरू हुआ सफर, अब बना कमाई का जरिया
किसान राहुल कुमार गुप्ता ने बताया कि वे पिछले 5 से 7 सालों से करेले की खेती कर रहे हैं. लॉकडाउन के दौरान जब उन्होंने इस खेती को अपनाया, तो उन्हें बहुत अच्छी आमदनी हुई. इसके बाद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मचान विधि से खेती करते आ रहे हैं. राहुल खुद एक प्रगतिशील किसान होने के साथ-साथ एक एफपीओ से भी जुड़े हुए हैं. 1 एकड़ में 35-40 हजार की लागत और 1.40 लाख तक की बचत खेती के गणित को समझाते हुए उन्होंने बताया कि 1 एकड़ खेत में मचान विधि से खेती करने पर लगभग 35,000 से 40,000 रुपये की लागत आती है.
मचान के ऊपरी हिस्से पर वे करेला और लौकी जैसी बेल वाली फसलें उगाते हैं, जबकि नीचे की ज़मीन पर शिमला मिर्च और अन्य फसलें लगाते हैं. इस प्रकार 1 एकड़ में सभी फसलों को मिलाकर 1 साल में लगभग 1,30,000 से 1,40,000 रुपये की शुद्ध बचत हो जाती है. इसमें से सिर्फ करेले की फसल से ही लगभग 40,000 रुपये की शुद्ध आमदनी प्राप्त होती है.
NHBI-3044 किस्म और मचान विधि का कमाल
बाजार में मिलने वाले सामान्य टेढ़े-मेढ़े या छोटे करेलों की तुलना में उनके करेले काफी लंबे, स्वस्थ और आकार में बड़े होते हैं लगभग एक बित्ते या उससे भी बड़े, राहुल जी हाइब्रिड किस्म NHBI-3044 का इस्तेमाल करते हैं. उद्यान विभाग से मिलने वाले गुणवत्तापूर्ण बीज और उद्यान विभाग की मचान योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी का उन्होंने लाभ उठाया. मचान विधि से करेले की लंबाई लगभग दोगुनी हो जाती है.
ऑर्गेनिक खेती से स्वाद में बेहतर, मंडी में एक्स्ट्रा रेट
इनके द्वारा उगाया गया करेला पूरी तरह से ऑर्गेनिक विधि का है और इस पर किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया जाता. स्वाद में शुद्ध और गुणवत्ता में बेहतर होने के कारण मंडी में व्यापारियों के बीच इस करेले की जबरदस्त मांग रहती है. राहुल जी को मंडी में आम करेलों की तुलना में हमेशा 2 रुपये प्रति किलो का अतिरिक्त भाव मिलता है.
किसानों के लिए संदेश
यदि अन्य किसान भाई भी करेले की खेती में नुकसान या कम उत्पादन की समस्या से जूझ रहे हैं, तो वे उद्यान विभाग के सहयोग से NHBI-3044 हाइब्रिड किस्म और मचान विधि अपनाकर अपनी पैदावार और मुनाफा दोनों बढ़ा सकते हैं.