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5 Hindi Superhit Songs: ऋषिकेश मुखर्जी अपनी फिल्मों में गाने सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं डालते थे, उनका कहानी, दर्शन और संवेदनाओं से गहरा नाता होता था. इसलिए, वे सालों बाद भी एहसास बनकर दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं. महान निर्देशक के उन चुनिंदा और सदाबहार गानों के बारे में जानते हैं, जिसने हर एक पीढ़ी के दिलो-दिमाग पर असर डाला. इन गानों के बनने की कहानी भी बड़ी अनूठी थी. ‘अभिमान’ के पॉपुलर गाने ‘तेरी बिंदिया रे’ को किशोर कुमार ने गाने से मना कर दिया था.
ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों के गाने एहसास होते हैं. (फोटो साभार: IANS/YouTube@Videograb)
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा में कुछ निर्देशक ऐसे हुए हैं, जिन्होंने सिर्फ कहानियां नहीं बल्कि, एहसास पर्दे पर उतारा है. उनमें से एक हैं ऋषिकेश मुखर्जी. उनकी फिल्मों की खास बात यह थी कि उनमें संगीत सिर्फ मनोरंजन का साधन बनकर नहीं आता था, बल्कि वह कहानी के भावों को गहराई से व्यक्त करने का एक जरिया हुआ करता था. ‘गोलमाल’, ‘आनंद’, ‘चुपके चुपके’, ‘अभिमान’ और ‘नमक हराम’ जैसी फिल्मों के गीतों ने न सिर्फ उस दौर को म्यूजिकल बनाया, बल्कि आज भी हर पीढ़ी की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं.
जीना इसी का नाम है : यह हिंदी सिनेमा की 1959 की मशहूर फिल्म ‘अनाड़ी’ का एक लोकप्रिय और प्रेरणादायक गाना है. गाने को गायक मुकेश अपनी शानदार आवाज में गाया है, जबकि शैलेंद्र ने इसके बोल लिखे हैं और शंकर-जयकिशन ने इसका संगीत बनाया था. यह गाना सिखाता है कि असली जिंदगी वही है, जो दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाए और दूसरों के दुख को बांटे.
कहीं दूर जब दिन ढल जाए: 1971 की मशहूर हिंदी फिल्म ‘आनंद’ का एक बेहद लोकप्रिय गीत है. मुकेश की दर्द भरी आवाज ने इस गीत को अमर बना दिया है. यह गाना आज भी उदासी और सुकून के पलों में लोगों को बहुत याद आता है. योगेश द्वारा लिखे गए बोल दिल को छू लेने वाले हैं, जो जीवन की तन्हाई और पुरानी यादों को बयां करते हैं.
आने वाला पल जाने वाला है: यह हिंदी सिनेमा का एक बेहद पॉपुलर और सदाबहार गीत है, जो जीवन के वर्तमान में जीने का संदेश देता है. गुलजार साहब के लिखे शब्द और किशोर कुमार की जादुई आवाज ने इस दार्शनिक गीत को अमर बना दिया है.
तेरी बिंदिया रे: साल 1973 की बॉलीवुड फिल्म ‘अभिमान’ का एक सदाबहार और बेहद लोकप्रिय रोमांटिक गाना है. गाना रिकॉर्ड होने के पीछे भी एक कहानी है, जिसके अनुसार यह गाना शुरुआत में किशोर कुमार को गाना था, लेकिन फिल्म की कहानी उनकी अपनी निजी जिंदगी से कुछ मिलती-जुलती लगी, जिससे वे भावनात्मक रूप से असहज हो गए और उन्होंने लता मंगेशकर के साथ इस गाने को गाने से इनकार कर दिया. किशोर कुमार के इनकार के बाद संगीतकार एसडी बर्मन ने यह गाना महान गायक मोहम्मद रफी साहब को दिया, जो बाद में इतिहास का एक बहुत बड़ा सुपरहिट गाना साबित हुआ.
अब के सावन में: किशोर कुमार और लता मंगेशकर के द्वारा गाए इस गीत को किशोर कुमार और लता मंगेशकर ने मिलकर गाया है. यह एक सदाबहार युगल गीत है जो सावन के मौसम और रोमांस के अहसास को खूबसूरती से बयान करता है.