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Jalor Drinking Water Crisis Protest: जालोर के ओटवाला गांव में करीब 15 दिन से पेयजल सप्लाई नहीं होने से परेशान ग्रामीणों और महिलाओं ने जालोर-सायला हाईवे जाम कर दिया. महिलाएं खाली बर्तन लेकर सड़क पर बैठ गईं और पानी की नियमित सप्लाई शुरू कराने की मांग की. ग्रामीणों ने बताया कि घरों में पानी नहीं आने के कारण उन्हें निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. एक टैंकर के लिए 600 से 700 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं और कई परिवार हर छह-सात दिन में टैंकर मंगवा रहे हैं. प्रदर्शन की सूचना पर जलदाय विभाग और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे. करीब दो घंटे तक चली समझाइश के बाद अधिकारियों ने खरल स्थित ट्यूबवेल से वैकल्पिक जलापूर्ति शुरू कराने का आश्वासन दिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने हाईवे खोल दिया. विभाग के अनुसार गुजरात से नर्मदा नहर का पानी करीब 10 दिन से बंद है.
जालोर के ओटवाला गांव में करीब 15 दिन से पेयजल सप्लाई नहीं होने से परेशान ग्रामीणों और महिलाओं ने जालोर-सायला हाईवे जाम कर दिया
जालोर. राजस्थान के जालोर जिला अंतर्गत ओटवाला गांव में पेयजल संकट से परेशान ग्रामीणों का गुस्सा सड़क पर फूट पड़ा. करीब 15 दिन से घरों में नियमित पानी की सप्लाई नहीं होने से परेशान महिलाएं खाली बर्तन लेकर जालोर-सायला हाईवे पर बैठ गईं. ग्रामीणों और महिलाओं ने हाईवे जाम कर पेयजल आपूर्ति बहाल करने की मांग की. प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने कहा कि घर में पानी नहीं आने के कारण उन्हें निजी टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. एक टैंकर के लिए 600 से 700 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं. कई परिवारों को हर छह-सात दिन में टैंकर मंगवाना पड़ रहा है. इससे पहले से ही घरेलू खर्चों से जूझ रहे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है.
ग्रामीणों का कहना है कि पेयजल की समस्या क्षेत्र के लिए नई नहीं है. पिछले चार-पांच वर्षों से गर्मी के मौसम में नियमित जलापूर्ति को लेकर परेशानी बनी हुई है. इस बार करीब 15 दिन से सप्लाई बंद होने के कारण स्थिति और गंभीर हो गई. महिलाओं ने बताया कि पानी की व्यवस्था करने के लिए उन्हें रोजमर्रा के काम छोड़कर टैंकर की तलाश करनी पड़ती है. टैंकर आने के बाद भी पानी सीमित मात्रा में मिलता है, जिससे पीने के अलावा घरेलू जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है.
कृषि बेरों तक पानी पहुंचने का लगाया आरोप
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने जलापूर्ति व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठाए. उनका आरोप है कि सायला के ग्रामीण इलाकों में कुछ कृषि बेरों तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंच रहा है और उसका इस्तेमाल खेती के लिए किया जा रहा है, जबकि गांव के घरों में पेयजल उपलब्ध नहीं है. ग्रामीणों ने ऐसे मामलों की जांच कराने और यदि अनियमितता सामने आए तो कार्रवाई करने की मांग की. ग्रामीणों के मुताबिक, पानी की समस्या को लेकर पहले भी शिकायतें की जा चुकी हैं. उन्होंने 181 हेल्पलाइन और मुख्यमंत्री कार्यालय तक शिकायत पहुंचाने की बात कही. इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बनी हुई थी. इसी के चलते सोमवार सुबह महिलाओं और ग्रामीणों ने हाईवे पर पहुंचकर प्रदर्शन शुरू कर दिया.
करीब दो घंटे हाईवे पर रहा जाम
हाईवे जाम होने की सूचना मिलते ही जलदाय विभाग और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे. जलदाय विभाग के कनिष्ठ अभियंता रामगोपाल मीणा, सायला तहसीलदार और सायला थाने का पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंचा. अधिकारियों ने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी समस्या सुनी. करीब दो घंटे तक समझाइश और बातचीत का दौर चला. अधिकारियों ने ग्रामीणों को खरल स्थित ट्यूबवेल से वैकल्पिक जलापूर्ति शुरू कराने का आश्वासन दिया. इसके बाद ग्रामीणों ने प्रदर्शन समाप्त कर हाईवे खोल दिया. प्रदर्शन सुबह करीब 9 बजे शुरू हुआ था और करीब 11 बजे के बाद रास्ता खोल दिया गया. हाईवे जाम रहने के दौरान सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित रही.
नर्मदा नहर का पानी बंद होने से गहराया संकट
जलदाय विभाग के जेईएन रामगोपाल मीणा ने बताया कि गुजरात से नर्मदा नहर के जरिए आने वाला पानी करीब 10 दिन से बंद है. इसके चलते तैतरोल से होने वाली जलापूर्ति प्रभावित हुई. विभाग के पास उपलब्ध पानी भी खत्म हो गया, जिससे ओटवाला सहित आसपास के क्षेत्र में पेयजल संकट गहरा गया. उन्होंने बताया कि फिलहाल खरल स्थित ट्यूबवेल से क्षेत्र में वैकल्पिक जलापूर्ति शुरू कराई गई है. अधिकारियों के अनुसार नर्मदा से पानी की आपूर्ति दोबारा बहाल होने में करीब 10 दिन और लग सकते हैं. ऐसे में ग्रामीणों ने मांग की है कि जब तक मुख्य जलापूर्ति बहाल नहीं होती, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के जरिए नियमित और पर्याप्त पानी उपलब्ध कराया जाए. ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें लंबे समय तक टैंकरों पर निर्भर रहने की स्थिति में आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा. इसलिए नर्मदा नहर की आपूर्ति बहाल होने तक प्रशासन गांव में पर्याप्त वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करे.