फैक्ट्रियों ने अगस्त में रफ्तार पकड़ ली है. औद्योगिक उत्पादन यानी IIP में 8 फीसदी की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जुलाई में IIP ग्रोथ 6.7 फीसदी थी. यानी एक महीने में औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार और बढ़ी है. सबसे बड़ी बात यह है कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार तीसरे महीने 8 फीसदी या उससे ज्यादा की दर से बढ़ा है. बाजार के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि फैक्ट्रियों की बढ़ती रफ्तार से निवेश, रोजगार, माल ढुलाई और कंपनियों की बिक्री को सहारा मिलने की उम्मीद बनती है.
सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्शन 9 फीसदी बढ़ा. IIP में मैन्युफैक्चरिंग का सबसे बड़ा हिस्सा होता है, इसलिए इसकी तेज ग्रोथ ने पूरे औद्योगिक उत्पादन को ऊपर खींचा. अगस्त में 23 मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री ग्रुप में से 18 में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई. यानी तेजी सिर्फ एक-दो सेक्टर तक सीमित नहीं रही. कई अलग-अलग उद्योगों में उत्पादन बढ़ा है.
ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स ने लगाई तेज रफ्तार
सबसे ज्यादा तेजी इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट के उत्पादन में रही, जो 30.9 फीसदी बढ़ा. इसके बाद दूसरे ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट में 25.3 फीसदी और मोटर व्हीकल, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर में 25.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.
ऑटो सेक्टर में ऑटो पार्ट्स, पैसेंजर कार और कमर्शियल व्हीकल का उत्पादन बढ़ने से ग्रोथ को सहारा मिला. वहीं कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऑप्टिकल प्रोडक्ट्स का उत्पादन 19.3 फीसदी बढ़ा. रबर और प्लास्टिक प्रोडक्ट्स में 21.4 फीसदी, फैब्रिकेटेड मेटल प्रोडक्ट्स में 16.9 फीसदी और मशीनरी एवं इक्विपमेंट में 10.3 फीसदी की वृद्धि हुई.
बिजली की मांग भी बढ़ी
इंडस्ट्री की बढ़ती गतिविधि का असर बिजली उत्पादन में भी दिखाई दिया. अगस्त में बिजली और गैस सप्लाई सेक्टर 12.3 फीसदी बढ़ा. इसमें बिजली उत्पादन 13.3 फीसदी बढ़ा. रिन्यूवल एनर्जी में 15.4 फीसदी और नॉन रिन्यूवल एनर्जी जेनरेशन में 12.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. हालांकि गैस सप्लाई 2.4 फीसदी घट गई.
निवेश के लिए भी बड़ा संकेत
IIP में सिर्फ रोजमर्रा का सामान नहीं बनता. अगस्त में कैपिटल गुड्स का उत्पादन 16.9 फीसदी बढ़ा. कैपिटल गुड्स का मतलब ऐसी मशीनें और उपकरण हैं, जिनका इस्तेमाल आगे उत्पादन करने के लिए होता है.
यानी कंपनियां अगर मशीनरी और उत्पादन से जुड़े उपकरण ज्यादा खरीदती और इस्तेमाल करती हैं, तो यह भविष्य के निवेश की गतिविधि का संकेत दे सकता है. इसी तरह इंटरमीडिएट गुड्स का उत्पादन 13.7 फीसदी बढ़ा. कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी 11.1 फीसदी और इंफ्रास्ट्रक्चर एवं कंस्ट्रक्शन गुड्स में 6.4 फीसदी की वृद्धि हुई.