अमेरिका की मल्टीनेशनल एरोस्पेस कंपनी बोइंग ने अपने 737 मैक्स विमानों में एक सॉफ्टवेयर से जुड़ी एक समस्या का पता लगाया. यह समस्या कुछ खास परिस्थितियों में लैंडिंग के दौरान गो-अराउंड यानी लैंडिंग कैंसिल कर दोबारा उड़ान भरने के प्रोसेस के समय ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस सिस्टम को प्रभावित कर सकती है. कंपनी के मुताबिक, यह समस्या फ्लाइट मैनेजमेंट कंप्यूटर (FMC) के कुछ सॉफ्टवेयर वर्जन में सामने आई है. भारत में इसका असर एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर के बेड़े पर पड़ सकता है. दोनों एयरलाइनों के पास मिलाकर करीब 96 से 100 बोइंग 737 मैक्स विमान हैं. हालांकि, बोइंग का कहना है कि यह खामी फिलहाल सुरक्षा के लिए बड़ा रिस्क नहीं है.
कंपनी ने अगस्त के अंत में दुनिया भर के 737 ऑपरेटर्स को इस समस्या के बारे में जानकारी दे दी थी और पायलटों को मौजूदा प्रक्रियाओं को दोहराने की सलाह दी थी. वहीं, अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) इस मामले की जांच कर रहा है. बोइंग का कहना है कि इंजीनियर स्थायी सॉफ्टवेयर अपडेट तैयार करने पर काम कर रहे हैं. इस बीच, एयरलाइनों और पायलटों को उन परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं के बारे में बताया गया है, जिनमें यह समस्या सामने आ सकती है.
क्या है 737 मैक्स में मिली सॉफ्टवेयर समस्या?
यह खामी फ्लाइट मैनेजमेंट कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर वर्जन 14 और 14.1 से जुड़ी बताई गई है. समस्या उस स्थिति में सामने आ सकती है जब पायलट किसी प्रिसिजन अप्रोच के दौरान ऑटोपायलट का इस्तेमाल कर रहे हों और लैंडिंग से पहले गो-अराउंड करना पड़े. अगर गो-अराउंड के बाद पायलट पहले से प्रोग्राम किए गए एल्टीट्यूड या फ्लाइट पाथ में बदलाव करते हैं, तो वर्टिकल नेविगेशन यानी VNAV सिस्टम डिसएंगेज हो सकता है.
VNAV विमान को तय किए गए वर्टिकल फ्लाइट पाथ और ऊंचाई के हिसाब से उड़ान भरने में मदद करता है. इसके डिसएंगेज होने की स्थिति में विमान लो क्वालिटी पिच कंट्रोल मोड पर जा सकता है. इसका मतलब यह है कि विमान का ऑटोमेटेड फ्लाइट गाइडेंस सिस्टम पहले की तरह VNAV का इस्तेमाल नहीं करेगा और पायलट को निर्धारित प्रोसेस के मुताबिक विमान को नियंत्रित करना होगा.
बोइंग ने इस समस्या को तत्काल सुरक्षा खतरा नहीं बताया है. कंपनी ने ऑपरेटर्स को स्थिति के बारे में पहले ही सूचित कर दिया था, ताकि पायलट संभावित स्थिति से परिचित रहें और जरूरत पड़ने पर तय प्रोसेस का पालन कर सकें. इससे भारत पर क्या असर होगा, ये जानना बहुत जरूरी है.
भारत में एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा के विमान पर असर
भारत में इस सॉफ्टवेयर समस्या का असर मुख्य रूप से एयर इंडिया एक्सप्रेस और अकासा एयर के बोइंग 737 मैक्स विमानों पर पड़ सकता है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया एक्सप्रेस के बेड़े में करीब 53 बोइंग 737 मैक्स विमान हैं, जबकि अकासा एयर के पास करीब 43 ऐसे विमान हैं. इस तरह दोनों एयरलाइनों के पास मिलाकर लगभग 96 विमान हैं, हालांकि अलग-अलग समय पर बेड़े की संख्या में बदलाव हो सकता है.
इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में मौजूद सभी विमानों में कोई परिचालन समस्या सामने आई है. सॉफ्टवेयर खामी कुछ विशेष परिस्थितियों और खास प्रोसेस के दौरान सामने आने की संभावना से जुड़ी है. एयरलाइनों के पायलटों को ऐसी स्थिति में अपनाई जाने वाली मौजूदा प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी दी गई है.
एविएशन विशेषज्ञों के मुताबिक, इस मामले को फिलहाल बड़ी सुरक्षा चिंता के तौर पर नहीं देखा जा रहा है. हालांकि, विमान के फ्लाइट कंट्रोल और नेविगेशन से जुड़े किसी भी सॉफ्टवेयर मुद्दे की निगरानी अहम होती है. इसलिए एयरलाइंस और नियामक इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं.
FAA कर रहा जांच
अमेरिका का फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन भी बोइंग के साथ मिलकर इस सॉफ्टवेयर समस्या की समीक्षा कर रहा है. FAA ने कहा है कि वह बोइंग और एयरलाइनों के साथ मिलकर स्थिति पर काम कर रहा है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करेगा. नियामक की भूमिका यह सुनिश्चित करना है कि समस्या का एनालिसिस किया जाए और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े किसी भी जोखिम को समय रहते संबोधित किया जा सके.
बोइंग ने कहा है कि उसके इंजीनियर स्थायी सॉफ्टवेयर अपडेट तैयार कर रहे हैं और इसे जल्द से जल्द लागू करने की कोशिश की जा रही है. तब तक ऑपरेटर्स को मौजूदा प्रोसेस का पालन करने और पायलटों को इस स्थिति के बारे में जागरूक रखने को कहा गया है.
इस सॉफ्टवेयर समस्या का असर बोइंग के नए 737 मैक्स 7 और 737 मैक्स 10 विमानों की सर्टिफिकेशन प्रक्रिया पर भी पड़ सकता है. इन दोनों वेरिएंट के सर्टिफिकेशन से जुड़े काम पहले से ही नियामकीय प्रोसेस के तहत हैं. ऐसे में सॉफ्टवेयर से जुड़ी इस खामी का समाधान और उसका नियामकीय आकलन आगे की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकता है. फिलहाल बोइंग और FAA की जांच तथा कंपनी की ओर से तैयार किए जा रहे सॉफ्टवेयर अपडेट पर नजर रहेगी.