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बॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे एक ऐसी दुनिया भी है, जिस पर अक्सर फिल्मों में ज्यादा बात नहीं होती. निर्देशक मधुर भंडारकर ने अपने सिनेमा के जरिए इसी अनदेखे पहलू को पर्दे पर उतारने की कोशिश की. उन्होंने अपनी फिल्मों के जरिए समाज की सच्चाई को पर्दे पर उतारने की कोशिश की. आज मधुर भंडारकर की फिल्म ‘चांदनी बार’ को 25 साल पूरे हो चुके हैं.
नई दिल्ली. मधुर भंडारकर ने अपनी फिल्मों के जरिए समाज को आईना दिखाया है. उन्होंने कभी मुंबई के डांस बार, तो कभी फिल्मी पार्टी और कभी फैशन की चकाचौंध भरी दुनिया के पीछे के अंधकार को उजागर किया था. मधुर की फिल्मों ने अलग-अलग तबकों और वहां मौजूद लोगों की जिंदगी को करीब से दिखाया.
मधुर भंडारकर की पॉपुलर फिल्म ‘चांदनी बार’ को रिलीज हुए आज 25 साल पूरे हो गए हैं. साल 2001 में आई इस फिल्म ने न सिर्फ मधुर के करियर को नई दिशा दी, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर उनकी खास फिल्ममेकिंग की पहचान भी मजबूत की. इस फिल्म ने नेशनल अवॉर्ड्स भी जीते थे.
डायरेक्टर मधुर भंडारकर की क्रिटिक्स द्वारा सराही गई फिल्म ‘चांदनी बार’ ने कई नेशनल अवॉर्ड्स जीते थे. फिल्म को कुल 4 अवॉर्ड्स मिले थे. तब्बू को फिल्म में शानदार अवॉर्ड के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला था.
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इसके बाद मधुर भंडारकर ने साल 2005 में फिल्म ‘पेज 3’ के जरिए मुंबई की हाई-प्रोफाइल पार्टियों और सेलिब्रिटी सर्कल की दुनिया दिखाई. कोंकणा सेन शर्मा ने पत्रकार माधवी शर्मा का किरदार निभाया था, जो ग्लैमर की दुनिया के बीच काम करते हुए उसके दूसरे पहलुओं से रूबरू होती है.
अपनी फिल्म ‘पेज 3’ में मधुर भंडारकर ने दिखाया कि अखबारों के पन्नों पर नजर आने वाली चकाचौंध के पीछे रिश्तों, समझौतों और कई तरह की परेशानियों की अपनी एक अलग कहानी होती है. फिल्म के लिए मधुर ने पेज 3 पार्टियों में जाकर इस दुनिया को करीब से समझने की कोशिश की थी. फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था.
कॉरपोरेट- साल 2006 में मधुर ने अपना कैमरा ग्लैमर पार्टियों से हटाकर कॉरपोरेट जगत की तरफ किया. ‘कॉरपोरेट’ में बिपाशा बसु ने निशिगंधा दासगुप्ता का किरदार निभाया. कहानी बिजनेस की दुनिया में काम करने वाली एक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जो बड़ी कंपनियों, ताकतवर लोगों और कारोबारी हितों के बीच फंस जाती है.
ट्रैफिक सिग्नल- 2007 की ‘ट्रैफिक सिग्नल’ में मधुर ने ऐसी जगह को कहानी का केंद्र बनाया, जिसे मुंबई में रहने वाला लगभग हर शख्स रोज देखता है, लेकिन उसके आसपास की जिंदगी पर शायद ही ध्यान देता है. फिल्म में ट्रैफिक सिग्नल के आसपास रोजी-रोटी कमाने वाले वेंडर्स, भिखारियों और दूसरे छोटे कामगारों की जिंदगी दिखाई गई. कुणाल खेमू ने ऐसे युवक की भूमिका निभाई, जो सिग्नल के आसपास चलने वाली इस पूरी व्यवस्था को संभालता है.
फैशन- साल 2008 में मधुर भंडारकर ने ‘फैशन’ के जरिए मॉडलिंग और फैशन इंडस्ट्री की चमकदार दुनिया को पर्दे पर उतारा. प्रियंका चोपड़ा ने छोटे शहर से आई महत्वाकांक्षी मॉडल मेघना माथुर का किरदार निभाया. बड़े सपने लेकर फैशन की दुनिया में कदम रखने वाली मेघना को सफलता तो मिलती है, लेकिन इसके साथ उसे इस इंडस्ट्री के दबाव, कॉम्पिटीशन और मुश्किलों का भी सामना करना पड़ता है.