जापान में अमेरिका ने उतारी वो मिसाइल जिस पर थी पाबंदी, रूस भड़का, दी सीधी धमकी
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US-Japan News: जापान-अमेरिका के सैन्य अभ्यास में टाइफोन मिसाइल सिस्टम की तैनाती से रूस की चिंता बढ़ गई है. रूस को डर है कि अभ्यास के बाद भी अमेरिकी लॉन्चर जापान में रह सकते हैं. Typhon जमीन से टॉमहॉक जैसी लंबी दूरी की मिसाइल दाग सकता है. इसकी जड़ 1987 की INF ट्रीटी से जुड़ी है, आइए समझें कि असल खेल क्या है.
अमेरिका का टाइफोन मिसाइल सिस्टम. (सांकेतिक फोटो/Reuters)
Russia US Typhon Missile: जापान और अमेरिका के सैन्य अभ्यास ने रूस की सिरदर्दी बढ़ा दी है. क्यूशू में अमेरिकी टाइफोन (Typhon) मिसाइल सिस्टम की तैनाती ने रूस नाराज है. इसके बाद रूस ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर अभ्यास खत्म होने के बाद भी ये मिसाइल सिस्टम जापान में रहे, तो रूस इसका जवाब देगा. रूस के उप विदेश मंत्री आंद्रे रुडेंको ने कहा है कि जापान ने सिस्टम हटाने का भरोसा दिया है, लेकिन मौजूदा जापानी सरकार पर मॉस्को को बहुत कम भरोसा है.
जापान-अमेरिका के युद्धाभ्यास से रूस क्यों हिला?
असल वजह सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं, बल्कि Typhon की क्षमता और उसकी लोकेशन है. सितंबर में हुए ओरिएंट शील्ड अभ्यास में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की सेनाएं शामिल थीं. इस दौरान अमेरिकी Typhon सिस्टम जापान के क्यूशू में तैनात किया गया. रूस पहले ही इस तैनाती पर आपत्ति जता चुका था और 3 सितंबर को जापान को औपचारिक विरोध-पत्र भी भेजा था.
Typhon कोई सामान्य रॉकेट लॉन्चर नहीं है. यह अमेरिकी सेना का जमीन से मिसाइल दागने वाला मोबाइल सिस्टम है. इससे टॉमहॉक (Tomahawk) क्रूज मिसाइल दागी जा सकती है, जिसकी बताई गई मारक क्षमता करीब 1,600 किलोमीटर तक है. क्यूशू से ऐसी मिसाइलों की पहुंच रूस के सुदूर पूर्व और चीन के कुछ हिस्सों तक बन सकती है. यही वजह है कि मॉस्को इसे अपने सुरक्षा हितों के लिए खतरा मान रहा है.