चीन ने कर दिखाया वो कमाल अमेरिका से निकल गया कोसों आगे सुपरपावर ने सोचा तक नहीं होगा

चीन ने कर दिखाया वो कमाल अमेरिका से निकल गया कोसों आगे सुपरपावर ने सोचा तक नहीं होगा


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China Super Microscope: चीन वो देश है, जो साइंस के मामले में कहीं आगे है. कई बार वो लोगों को सरप्राइज कर देता है और एक बार फिर से उसने दुनिया को चौंकाते हुए एक ऐसी इलेक्ट्रॉनिक बीम तैयार कर ली है, जो किसी और के पास नहीं है.

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चीन ने बना लिया सुपरमाइक्रोस्कोप. (सांकेतिक तस्वीर/कैनवा)

China Super Microscope: चीन ने विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में एक अहम उपलब्धि हासिल की है. चीनी वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉन गन की मदद से पहली बार इलेक्ट्रॉन बीम तैयार कर ली है, जो पहले कोई भी देश नहीं कर पाया. इसे भविष्य में बनने वाले बेहद शक्तिशाली ‘सुपर माइक्रोस्कोप’ की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है. इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिक परमाणु स्तर पर पदार्थों की संरचना को और अधिक बारीकी से समझ सकेंगे. यह उपलब्धि चीन के अनहुई प्रांत में तैयार की जा रही हेफेई एडवांस्ड लाइट फैसिलिटी (HALF) में हासिल हुई.

HALF ने 20 सितंबर को पहली इलेक्ट्रॉन बीम सफलतापूर्वक तैयार की. इसके बाद इस परियोजना को वैज्ञानिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है. इस इलेक्ट्रॉन बीम को 192 मीटर लंबे लीनियर एक्सेलेरेटर से गुजारा गया. इस प्रक्रिया के बाद इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा बढ़कर 2.2 अरब इलेक्ट्रॉन वोल्ट तक पहुंच गई. परियोजना से जुड़े वैज्ञानिक हे झिगांग ने बताया कि इलेक्ट्रॉन बीम का सफल उत्पादन अंतिम लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. उनके मुताबिक बीम की गुणवत्ता, स्थिरता और विश्वसनीयता आगे होने वाले वैज्ञानिक प्रयोगों के लिए बेहद जरूरी होगी.

क्या है HALF और क्यों है खास?

HALF चौथी पीढ़ी का एक अत्याधुनिक लाइट सोर्स प्रोजेक्ट है. इसमें बेहद तेज गति से चलने वाले इलेक्ट्रॉनों को चुंबकीय क्षेत्र से गुजारा जाएगा. इस दौरान शक्तिशाली एक्स-रे पैदा होंगी. इन एक्स-रे की मदद से वैज्ञानिक पदार्थों को परमाणु स्तर पर देख और उनका अध्ययन कर सकेंगे. HALF से पैदा होने वाली एक्स-रे तीसरी पीढ़ी के लाइट सोर्स की तुलना में 100 गुना से अधिक चमकदार और ज्यादा सुसंगत होने की उम्मीद है. इसका मतलब है कि वैज्ञानिक पहले की तुलना में ज्यादा सटीक और जटिल प्रयोग कर पाएंगे.

किन क्षेत्रों में होगा इससे फायदा?

  1. इस तकनीक का इस्तेमाल कई वैज्ञानिक क्षेत्रों में किया जा सकता है. नई पीढ़ी की बैटरियों, उन्नत सामग्रियों, हाई-टेम्परेचर सुपरकंडक्टिविटी और जीवन विज्ञान पर शोध में इससे मदद मिलने की उम्मीद है. अल्जाइमर जैसी बीमारियों के अध्ययन में भी यह तकनीक उपयोगी हो सकती है.
  2. HALF में कुल 35 तक प्रयोगात्मक स्टेशन बनाने की योजना है. शुरुआती 10 स्टेशनों में एक्सट्रीम अल्ट्रावायलेट लिथोग्राफी यानी EUV से जुड़ा प्लेटफॉर्म भी शामिल होगा. EUV आधुनिक और उन्नत सेमीकंडक्टर चिप बनाने की महत्वपूर्ण तकनीक है.
  3. HALF का निर्माण 2023 में शुरू हुआ था और परियोजना के 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है. इसे बीजिंग और शंघाई की अन्य बड़ी वैज्ञानिक सुविधाओं के साथ जोड़कर चीन की उन्नत लाइट सोर्स प्रणाली का हिस्सा बनाया जाएगा. चीन में इस क्षेत्र का विकास कई दशकों से हो रहा है.
  4. 1989 में देश ने अपना पहला समर्पित हेफेई लाइट सोर्स तैयार किया था. बाद की पीढ़ियों की सुविधाओं से वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज, SARS वायरस की संरचना और एम्बर में संरक्षित प्राचीन जीवाश्मों जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण शोध किया.



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