54 रन और 19 नवंबर की रात…आज भी सो नहीं पाते विराट, सताती है WC 2023 की याद
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Virat Kohli: विराट कोहली ने क्रिकेट वर्ल्ड कप में अधूरे काम के बारे में बात की. इंडियन सुपरस्टार की माने तो उन्हें रह-रहकर वर्ल्ड कप 2023 की यादें सतातीं थीं. उनके दिमाग में यही चलते रहता था कि अगर वह 140-150 रन बना लेते तो भारत फाइनल जीत सकता था. ऑस्ट्रेलिया को हराकर 12 साल बाद वर्ल्ड चैंपियन बन सकता था.
विराट को आज भी सताती है वनडे वर्ल्ड कप 2023 की कसक
विराट को आज भी सताती है 19 नवंबर की यादें
विराट कोहली ने हॉटस्टार से बात करते हुए बताया, ‘हां, थोड़ी-बहुत कसक तो है ही. IPL 2025 जीतने से पहले मुझे 2016 के फाइनल की यादें आती रहती थीं. वर्ल्ड कप 2023 फाइनल के बारे में भी वैसा ही महसूस होता है. मैं 54 रन पर खेल रहा था और एक बड़ी सेंचुरी बना सकता था. लग रहा था कि अगर मैं 140-150 रन बना लेता तो मैच जीत सकते थे, लेकिन जैसे ही मैं आउट हुआ, कई दिनों तक उस बात को स्वीकार करना बहुत मुश्किल था और आप बस उसी के बारे में सोचते रहते हैं. वह पूरा वर्ल्ड कप शानदार था. माहौल जबरदस्त था.
विराट कोहली ने वनडे वर्ल्ड कप 2027 के बारे में क्या कहा?
जब गेम पलटता है तो सदमा लगता है: विराट
विराट कोहली ने आगे कहा कि, ‘टीम के अंदर आपसी तालमेल साफ दिखता था. हर कोई एक-दूसरे के लिए खेलकर खुश था. यहां तक कि हार्दिक जैसे खिलाड़ी के जल्दी बाहर हो जाने के बाद भी हमने कभी इस बारे में बात नहीं की कि आगे क्या होगा. हालांकि टीम में उनके योगदान को देखते हुए यह एक बड़ा नुकसान था, लेकिन शमी आए और आप जानते ही हैं कि वह क्या कर सकते हैं तो, सबको यही लग रहा था कि यह वर्ल्ड कप हमारा ही है. एक अलग ही ऊर्जा थी और जब खेल का पासा ऐसे पलटता है, तो उसे स्वीकार करना बहुत मुश्किल होता है.
मैं खुद को बेहतरीन नहीं मानता: विराट
विराट कोहली को भले ही मॉर्डन वर्ल्ड क्रिकेट का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी माना जाता हो, लेकिन इस दिग्गज बल्लेबाज की खुद को लेकर सोच कुछ जुदा है. बकौल विराट, ‘मैं खुद को अब तक का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी नहीं मानता. खेल के अलग-अलग दौर में अलग-अलग खिलाड़ी हुए हैं और उन्होंने कमाल के काम किए हैं, भले ही उनके आंकड़े उतने प्रभावशाली न हों, या कुछ खिलाड़ियों के आंकड़े मुझसे कहीं बेहतर हों. लेकिन मुझे लगता है कि इन सबके अलावा, आखिर में हर किसी का मकसद यही होता है कि खेल पर अपनी छाप छोड़े. आखिर में मुख्य मकसद हमेशा यही रहा है कि टीम को बेहतर बनाने में योगदान दिया जाए और टीम को मनचाहे नतीजे तक पहुंचाया जाए.