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लखीमपुर खीरी में शारदा नदी का कटान तेज होने से रूरा सुल्तानपुर गांव के ग्रामीण अपने घर खुद तोड़ रहे हैं. 8 पक्के मकान और 4 झोपड़ियां चपेट में आ चुकी हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत है. रामपाल ने बताया कि वह पिछले 23 वर्षों से रूरा सुल्तानपुर गांव में रह रहे हैं. इतने लंबे समय में उन्होंने मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार के लिए आशियाना बनाया था. लेकिन शारदा नदी की कटान ने उनकी वर्षों की मेहनत को खत्म कर दिया रामपाल का कहना है कि मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं
लखीमपुर खीरी: जिले के तराई इलाके में शारदा नदी का कटान एक बार फिर ग्रामीणों के लिए मुसीबत बन गया है. करीब एक सप्ताह तक कटान की रफ्तार धीमी रहने के बाद अब रूरा सुल्तानपुर गांव के समीप शारदा नदी ने दोबारा तेजी पकड़ ली है। नदी की धारा लगातार गांव की ओर बढ़ रही है. हालात यह हैं कि कई मकानों के बेहद शारदा नदी के किनारे पहुंच गए हैं.
अपने आशियाने नष्ट कर रहे ग्रामीण
कटान के खतरे को देखते हुए ग्रामीणों में दहशत का माहौल है. सबसे दर्दनाक तस्वीर रूरा सुल्तानपुर गांव से सामने आ रही है, जहां ग्रामीण अपने हाथों से बनाए आशियानों को खुद ही तोड़ने के लिए मजबूर हैं. जिन हाथों ने वर्षों की मेहनत से ईंट, मिट्टी और पसीने से घर बनाया था, आज उन्हीं हाथों में हथौड़ा है ग्रामीण मकानों की दीवारें तोड़कर ईंटें और जरूरी सामान निकाल रहे हैं, ग्रामीण बताते हैं कि कम से कम कुछ सामान सुरक्षित बचाया जा सके. ग्राउंड जीरो पर पहुंची लोकल18 की की टीम से कटान पीड़ित रामपाल ने बताया कि शारदा नदी का कटान एक बार फिर तेज हो गया है. नदी अब उनके घर के बिल्कुल करीब पहुंच चुकी है. ऐसे में परिवार की सुरक्षा को देखते हुए अपने आशियाने को नष्ट कर रहे हैं.
रामपाल ने बताया कि वह पिछले 23 वर्षों से रूरा सुल्तानपुर गांव में रह रहे हैं. इतने लंबे समय में उन्होंने मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार के लिए आशियाना बनाया था. लेकिन शारदा नदी की कटान ने उनकी वर्षों की मेहनत को खत्म कर दिया रामपाल का कहना है कि मेहनत-मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं. घर ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो परिवार को लेकर कहां जाएंगे, यह सबसे बड़ा सवाल है. नदी की लगातार बढ़ती कटान ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है.
आठ पक्के मकान और चार झोपड़ियां कटान की चपेट में
क्षेत्रीय लेखपाल राजीव वर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक रूरा सुल्तानपुर गांव में शारदा नदी के कटान की वजह से करीब आठ पक्के मकान और चार झोपड़ियां नदी की चपेट में आ चुकी हैं. कई अन्य मकानों पर भी खतरा मंडरा रहा है. ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए लगातार जागरूक किया जा रहा है. ग्रामीणों को डर है कि अगर नदी का कटान इसी रफ्तार से जारी रहा तो आने वाले दिनों में और मकान कटान की जद में आ सकते हैं.
कटान की वजह से ग्रामीणों को अपना घर छोड़ने की चिंता सता रही है. कई परिवार अपने जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हुए हैं. कुछ ग्रामीण मकानों को स्वयं तोड़कर ईंट और अन्य निर्माण सामग्री निकाल रहे हैं, ताकि उन्हें पूरी तरह से नदी में बह जाने से पहले बचाया जा सके.
आंखों के सामने उजड़ रही वर्षों की मेहनत
शारदा नदी का कटान सिर्फ जमीन को नहीं कट रही, बल्कि ग्रामीणों के वर्षों पुराने सपनों को भी अपने साथ बहा रही है. जिन घरों में कभी बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब ग्रामीण हथौड़े से दीवारें तोड़ते नजर आ रहे हैं. ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि मकान नष्ट होने के बाद उनके सामने रहने की जगह का संकट खड़ा हो जाएगा. लगातार बारिश और नदी के बढ़ते कटान ने पहले ही ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा रखी हैं खेती और मजदूरी पर निर्भर परिवारों के लिए घर का उजड़ना बड़ा आर्थिक झटका है.