Bangladesh Hindu Body In Blue Drum : नीले ड्रम में भरी हिंदू की लाश, नाले में फेंक दी, बांग्लादेश में फिर शुरू अल्पसंख्यकों की सीरियल किलिंग

Bangladesh Hindu Body In Blue Drum : नीले ड्रम में भरी हिंदू की लाश, नाले में फेंक दी, बांग्लादेश में फिर शुरू अल्पसंख्यकों की सीरियल किलिंग


ढाका: बांग्लादेश के मयमनसिंह सिंह जिले में हुआ वो कांड याद है, जिसमें दीपू चंद्र दास नाम के एक हिंदू शख्स को लिंच करके मारा गया था. इसके बाद उसकी लाश को चौराहे पर फूंका गया था. उसी मयमनसिंह में एक और हिंदू के साथ दिल दहला देने वाला क्राइम हुआ है. 50 साल के एक हिंदू सर्राफा व्यापारी निरंजन चंद्र सूत्रधार की बेरहमी से हत्या कर दी गई और उनकी लाश को एक नीले प्लास्टिक के ड्रम में बंद करके नाले में फेंक दिया गया. जब पानी में बहते हुए ड्रम पर स्थानीय लोगों की नजर पड़ी तो उसे निकलवाया गया और अंदर का नजारा देखकर लोगों की रूह कांप गई.

बांग्लादेश में कैसे हुई हिंदू सर्राफा व्यापारी की हत्या?

बांग्लादेश में मोहम्मद यूनुस की सरकार के दौरान एक-एक करक कई हिंदुओं की हत्याएं हुई थीं. कट्टरपंथियों के हाथों ये सीरियल किलिंग्स तारिक रहमान के राज में भी बदस्तूर जारी हैं. नई वारदात बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले की है. मृतक की पहचान 50 वर्षीय निरंजन चंद्र सूत्रधार के रूप में हुई है. निरंजन जिले के अठारबारी बिल्डिंग इलाके में पार्टनरशिप में ज्वेलरी की दुकान चलाते थे और अपने सीधे-सादे व्यवहार के लिए जाने जाते थे.

बुधवार के दिन जब मयमनसिंह के बेगुनबरी इलाके में स्थानीय लोगों ने नाले के पानी में एक बड़ा नीला ड्रम तैरता हुआ देखा, तो उन्हें किसी अनहोनी का शक हुआ. ड्रम का आकार और उसकी संदिग्ध हालत देखकर लोगों ने तुरंत स्थानीय पुलिस को इसकी सूचना दी. जब पुलिस मौके पर पहुंची और ड्रम को पानी से बाहर निकालकर खोला, तो उसके अंदर का नज़ारा देखकर वहां मौजूद हर इंसान की रूह कांप गई. ड्रम के भीतर निरंजन चंद्र सूत्रधार का शव ठूंस-ठूंसकर भरा गया था.

कैसे ली गई जान, पुलिस ने क्या बताया?

बांग्लादेशी अखबार ‘दैनिक इत्तेफाक’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस को शुरुआती जांच में ही ये साफ लग रहा है कि निरंजन चंद्र सूत्रधार की हत्या कहीं और की गई थी. हत्यारों ने बेहद शातिराना अंदाज में साजिश रची.

आशंका जताई जा रही है कि पहले उनकी गला घोंटकर या किसी भारी चीज से हमला करके जान ली गई. इसके बाद सबूतों को मिटाने और पहचान छिपाने की नीयत से उनकी बॉडी को नीले प्लास्टिक के ड्रम में बंद कर दिया गया और दूर नाले के पानी में बहा दिया गया ताकि किसी को भनक न लगे.

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है और मामले की तफ्तीश शुरू कर दी है. हालांकि, घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी हत्यारों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है.

मयमनसिंह के व्यापारियों और हिंदुओं में दहशत का माहौल

इस खौफनाक हत्या की खबर जंगल की आग की तरह पूरे मयमनसिंह जिले और आसपास के इलाकों में फैल गई. अठारबारी बिल्डिंग इलाके के सर्राफा बाजार में शोक और गुस्से की लहर दौड़ गई है. स्थानीय हिंदू व्यापारियों ने सुरक्षा को लेकर अपनी गंभीर चिंता जताई है.

व्यापारियों का कहना है कि निरंजन की किसी से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी. वो सालों से शांती से अपना कारोबार कर रहे थे. ऐसे में अचानक उनका अपहरण करके इस तरह दर्दनाक तरीके से मार डालना ये दिखाता है कि अपराधी बेखौफ घूम रहे हैं. कई दुकानदारों ने डर के मारे अपनी दुकानें बंद कर ली हैं और पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है.

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को चुन-चुनकर क्यों बनाया जा रहा निशाना?

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों, विशेषकर व्यापारियों, शिक्षकों और प्रतिष्ठित नागरिकों पर हमले की ये कोई पहली घटना नहीं है. पिछले कुछ समय में वहां लगातार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं जहां हिंदू समुदाय के लोगों को निशाना बनाया गया है.

  • कारोबारियों से रंगदारी और कब्जा: बांग्लादेश के कई जिलों में हिंदू कारोबारियों से जबरन रंगदारी मांगने और उनकी संपत्तियों पर कब्जे की कोशिशों के मामले बढ़ रहे हैं. विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जाती हैं.
  • धार्मिक पहचान के आधार पर हिंसा: कट्टरपंथी तत्व अक्सर अफवाहें फैलाकर या फिर सुनियोजित तरीके से हिंदू परिवारों और उनकी दुकानों को निशाना बनाते हैं.
  • अपराधियों में सजा का खौफ नहीं: लगातार होती हत्याओं के बावजूद अपराधियों की तुरंत गिरफ्तारी न होना या उन्हें सख्त सजा न मिलना, ऐसे उपद्रवियों के हौसले और बुलंद कर रहा है.

सीरियल किलिंग का नया डर और पुलिस का लचर रवैया

निरंजन चंद्र सूत्रधार की हत्या ने एक बार फिर बांग्लादेशी पुलिस और वहां के कानून-व्यवस्था तंत्र की पोल खोलकर रख दी है. स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और हिंदू संगठनों का कहना है कि जब-जब किसी हिंदू नागरिक की हत्या होती है, पुलिस सिर्फ जांच का आश्वासन देकर मामला टाल देती है.

समय पर कार्रवाई न होने के कारण अपराधियों का मनोबल बढ़ता जाता है और वो एक के बाद एक ऐसी वारदातों को अंजाम देते हैं. इसे ही ‘सीरियल किलिंग’ का नाम दिया जा रहा है, जहाँ बिना किसी खौफ के एक खास समुदाय के लोगों को निशाना बनाकर मारा जा रहा है और उनकी लाशों को लावारिस हालत में फेंक दिया जाता है.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तारिक रहमान की सरकार पर उठ रहे सवाल

बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार चिंता जताई जाती रही है. भारत समेत दुनिया भर के मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग करते आए हैं.

मंदिरों में तोड़फोड़, हिंदू बस्तियों में आगजनी और अब सर्राफा व्यापारी को ड्रम में बंद करके नाले में फेंकने जैसी खौफनाक घटनाएं ये साबित करती हैं कि वहां जमीनी स्तर पर हालात बेहद चिंताजनक हैं.

बांग्लादेश में लगातार बिगड़ते हालात वहां के अल्पसंख्यक समुदाय के वजूद पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं. अगर वहां का प्रशासन अब भी नहीं जागा और कट्टरपंथियों व अपराधियों पर कड़ा शिकंजा नहीं कसा, तो आने वाले दिनों में ये खूनी खेल और भी भयंकर रूप ले सकता है.



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