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बिहार के जहानाबाद जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल के पास एक दरगाह परिसर में मौजूद बेर का पेड़ लोगों की अनोखी आस्था का केंद्र बना हुआ है. मान्यता है कि अगर परिवार का कोई सदस्य घर से बिछड़ जाए या लंबे समय से वापस न आए, तो परिजन उसके पहने हुए कपड़े इस पेड़ पर फेंकते हैं. लोगों की मान्यता के अनुसार, अगर कपड़ा पेड़ की शाखाओं में अटक जाता है तो बिछड़ा व्यक्ति घर लौट आता है, जबकि कपड़ा नीचे गिरने को उम्मीद टूटने से जोड़कर देखा जाता है. इसी आस्था के चलते पेड़ पर आज भी कई कपड़े लटके नजर आते हैं. दरगाह के गद्दीनशीन मो. इकबाल अहमद अयूबी के मुताबिक, यहां किसी एक धर्म के नहीं, बल्कि अलग-अलग समुदायों के लोग अपनी मन्नत लेकर पहुंचते हैं.
बिहार के जहानाबाद जिले में एक ऐसा पेड़ है, जो चमत्कार के लिए जाना जाता है. यह बेर का पेड़ है. यह जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल के सामने मजार के पास है. इसको लेकर ऐसी मान्यता है कि यदि कोई घर परिवार से बिछड़ जाता है या तो वो खो जाता है तो उनके घर में पड़े हुए कपड़ों को बेर के पेड़ लाकर फेंक दिया जाता है. ऐसे में यदि वो कपड़े पेड़ पर अटक गए तो ऐसी मान्यताएं है कि वो घर वापस लौटकर आ ही जाते हैं. वहीं, पेड़ से कपड़े गिरने पर कुछ उम्मीदें टूटती है. आज भी आप यदि इस जगह के पास पहुंचेंगे और बेर के पेड़ को निहारेंगे तो बहुत सारे कपड़े लटके हुए मिल जाएंगे.
इस बेर के पेड़ में लटके इंसान के कपड़े इस बात को प्रमाणित करता है कि इसमें लोगों की आस्था बसती है. यही कारण है कि हर परेशान व्यक्ति यहां पहुंचता है. वो मांगने का काम करता है. बेर का पेड़ मजार के कैंपस में ही है. पेड़ के इतिहास के बारे में सवाल पूछने पर गद्दीनशी ने यह नहीं साफ किया कि यह पेड़ कितना पुराना है. हालांकि इस मजार परिसर में स्थित एक पेड़ का इतिहास 116 साल पुराना बताया जाता है. इस स्थल पर मन्नत को न सिर्फ किसी विशेष समुदाय से लोग पहुंचते हैं, बल्कि हर धर्म के लोगों में ऐसी आस्था है और वह यहां पहुंचते हैं.
यहां के दरगाह हजरत हैदर शाह शैलानी के गद्दीनशीन मो. इकबाल अहमद अयूबी ने लोकल 18 से बताया कि घर से जो कोई बाहर चला जाता है या कहीं खो जाता है या बहुत समय से घर नहीं आ रहा है तो परेशान परिवार वाले उस व्यक्ति का पहना हुआ कपड़ा लाकर बेर के पेड़ पर फेंक देते हैं. अगर पेड़ पर कपड़ा अटक जाता है तो वो व्यक्ति घर लौटकर आ ही जाता है.
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बता दें कि यहां आने के बाद कई लोगों के घर वाले मुलाकात भी किए हैं. इस स्थान पर सभी धर्मों के लोग पहुंचते हैं. यह परंपरा बहुत प्राचीन है. इस बेर के पेड़ के बारे में तो वह नहीं बता सकते हैं कि यह कितना पुराना है, लेकिन इसके कैंपस में मौजूद एक इमली का पेड़ 1916 के सर्वे रिकॉर्ड बुक में दर्ज है.
बता दें कि यह दरगाह जिला मुख्यालय में हॉस्पिटल मोड़ के पास अवस्थित है. इस दरगाह की विशेष मान्यता है. यही कारण है कि यहां कई बड़े शख्शियत आकर यहां चादर चढ़ाता है. हर साल उर्स भी मनाया जाता है और इस वर्ष को लेकर भी विशेष तैयारी है. गद्दीनशी इकबाल अहमद अयूबी ने कहा कि 815 साल पुराना यह दरगाह है और यह मजार हजरत हैदर शाह शैलानी का है. वह श्रीलंका से आए हैं. जिले के इस स्थान पर मजार है. बहुत प्राचीन होने के चलते ही कई नामचीन व्यक्ति इस स्थान तक पहुंचे हैं.