प्रभु जगन्‍नाथ पहनेंगे नया आभूषण, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए भी विशेष गहना – Puri temple to prepare new set of ornaments for Lord Jagannath

प्रभु जगन्‍नाथ पहनेंगे नया आभूषण, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के लिए भी विशेष गहना – Puri temple to prepare new set of ornaments for Lord Jagannath


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प्रभु जगन्‍नाथ पहनेंगे नया आभूषण, भगवान बलभद्र-देवी सुभद्रा के लिए विशेष गहना

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Shree Jagannath Temple: पुरी में विराजमान प्रभु जगन्‍नाथ की विशेष पूजा के लिए विशेष व्‍यवस्‍था की जा रही है. श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति ने नए आभूषण बनाने के प्रस्‍ताव को हरी झंडी दे दी है. विशेष ‘सुना बेशा’ अनुष्‍ठान के लिए नए गहने बनाए जाएंगे.

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प्रभु जगन्‍नाथ के लिए नया गहना बनाने के प्रस्‍ताव को हरी झंडी दे दी गई है. (फोटो: पीटीआई)

Shree Jagannath Temple: श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति (एसजेटीएमसी) ने भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के ‘सुना बेशा’ अनुष्ठान के लिए आभूषणों का नया सेट तैयार करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. 12वीं सदी के इस प्रसिद्ध मंदिर की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था ने गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह फैसला लिया. बैठक के बाद श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने पत्रकारों को बताया कि मंदिर प्रशासन अपने संसाधनों से देवताओं के लिए नए आभूषण तैयार कराएगा. इसके साथ ही इस कार्य के लिए इच्छुक व्यक्तियों और संगठनों से दान लेने की भी योजना है.

पाढ़ी ने कहा कि नए आभूषण तैयार करने में किसी तरह की कठिनाई नहीं होगी, क्योंकि मंदिर प्रशासन के पास मौजूदा आभूषणों के डिजाइन और अन्य जरूरी विवरण उपलब्ध हैं. उन्होंने बताया कि रत्न भंडार की चल रही सूची तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान मंदिर में रखे आभूषणों की वीडियोग्राफी और 3डी मैपिंग भी कराई गई थी. इनमें भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन के ‘सुना बेशा’ में इस्तेमाल होने वाले आभूषण भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इस डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से आभूषणों के डिजाइन, उनके आकार और धार्मिक महत्व को सुरक्षित रखा गया है. मंदिर प्रशासन के पास रत्न भंडार में रखे मौजूदा आभूषणों के वजन और डिजाइन से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी मौजूद है. इससे नए आभूषण तैयार करते समय परंपरागत स्वरूप और धार्मिक मान्यताओं को बनाए रखने में मदद मिलेगी.

मुख्य प्रशासक ने बताया कि नए आभूषण बनाने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक तकनीकी समिति गठित की जाएगी. यह समिति अनुभवी और कुशल स्वर्णकारों का चयन करेगी, जो देवताओं के लिए नए आभूषण तैयार करेंगे. उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी. ‘सुना बेशा’ भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा का विशेष धार्मिक श्रृंगार है. इस दौरान तीनों देवी-देवताओं को स्वर्ण आभूषणों और स्वर्ण अलंकरणों से सजाया जाता है. यह अनुष्ठान साल में पांच अलग-अलग अवसरों पर आयोजित होता है. इनमें चार बार मंदिर के भीतर और एक बार रथों पर यह श्रृंगार किया जाता है.

मंदिर के अनुसार, ‘सुना बेशा’ बहुदा एकादशी, पौष पूर्णिमा, दशहरा, कार्तिक पूर्णिमा और डोला पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित किया जाता है. बहुदा एकादशी का आयोजन आमतौर पर जुलाई में रथों पर होता है, जबकि पौष पूर्णिमा जनवरी, दशहरा अक्टूबर, कार्तिक पूर्णिमा नवंबर और डोला पूर्णिमा मार्च में पड़ती है. मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहन के ‘सुना बेशा’ की परंपरा 1460 में गजपति राजा कपिलेंद्र देव के शासनकाल में शुरू हुई थी. नए आभूषणों के निर्माण का उद्देश्य इस सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा के लिए एक अतिरिक्त सेट तैयार करना है, जबकि मौजूदा आभूषणों का स्वरूप और धार्मिक महत्व यथावत बनाए रखा जाएगा.



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