Last Updated:
एनसीबी, आईटीबीपी, हिमाचल पुलिस और वन विभाग की ज्वाइंट टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कई खेतों में खड़ी भांग की खेती को बर्बाद कर दिया है. यह कार्रवाई हिमाचल प्रदेश के कुल्लू इलाके में की गई है. क्या है पूरा मामला जानने के लिए पढ़ें आगे…
कुल्लू की ऊंची पहाड़ियों में अवैध भांग की खेती को नष्ट करती एनसीबी, आईटीबीपी, हिमाचल पुलिस और वन विभाग की ज्वाइंट टीम.
हिमाचल क्राइम न्यूज. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू की पहाड़ियों में ड्रग्स के कारोबार पर एजेंसियों ने इस बार सीधे उस जगह वार किया है, जहां से पूरा खेल शुरू होता है. दरअसल, कुल्लू के ऊंचाई वाले दुर्गम इलाकों में कंटीले तारों की फेसिंग के पीछे भांग की खेती की जा रही थी. यही भांग आगे चलकर उस चरस के लिए कच्चा माल बनती है, जिसे दुनिया भर में ‘मनाला क्रीम’ के नाम से जाना जाता है.
अचानक इस फसल की भनक सुरक्षा एजेंसियों को लग गई, जिसके बाद की गई कार्रवाई में भांग की इस फसल को पूरी तरह से बर्बाद कर दिया गया है. इस ज्वाइंट ऑपरेशन में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के साथ आईटीबीपी, हिमाचल प्रदेश पुलिस और वन विभाग के अधिकारी शामिल थे. खास बात यह है कि इस तरह के ज्वाइंट ऑपरेशन में पहली बार ITBP को भी शामिल किया गया है.
कंटीले तारों के पीछे हो रही थी भांग की खेती
ज्वाइंट ऑपरेशन से जुड़े सीनियर ऑफिसर के अनुसार, कुल्लू के बेहद ऊंचाई वाले इन इलाकों में किसी का भी पहुंचना आसान नहीं है. जिस जगह पर भांग की खेती की जा रही थी, उसके चारों तरफ ऊंचे पहाड़ हैं. मौके तक पहुंचने के लिए कोई स्थाई रास्ता नहीं है और जगह-जगह पर कटीले तारों की फेंसिंग की गई है. ड्रग्स माफिया ने वह हर इंतजाम कर रहा था, जिससे उनकी यह खेती किसी की भी नजर तक न पहुंच सके.
एजेंसियों के निशाने पर थी मनाला क्रीम का सोर्स
सीनियर ऑफिसर के अनुसार, ड्रग्स के खिलाफ आमतौर पर कार्रवाई तस्करों, सप्लायर या तैयार ड्रग्स तक पहुंचने के बाद होती है. लेकिन कुल्लू में चल रहे इस अभियान का फोकस उससे पहले के चरण पर है. एजेंसियां उस फसल को ही खत्म कर रही हैं, जो आगे चलकर चरस तैयार करने के काम आती है. कुल्लू के सुदूर इलाके में तैयार हो रही भाग से ही चरस तैयार की जाती थी. पूरी दुनिया इस चरस को ‘मनाला क्रीम’ के नाम से जानती है.
पहली बार आईटीबीपी के साथ बड़ा संयुक्त ऑपरेशन
नशे के खिलाफ चल रहे इस ऑपरेशन में एनसीबी के साथ हिमाचल पुलिस और वन विभाग की टीमें पहले से काम कर रही हैं. दुर्गम पहाड़ी इलाकों में कार्रवाई के लिए आईटीबीपी को भी पहली बार इस ऑपरेशन में शामिल किया गया है. संयुक्त टीमें पहले ऐसे इलाकों की पहचान कर रही हैं, जहां अवैध भांग की खेती होने का इंटेल मिलता है. इसके बाद मौके पर पहुंचकर फसल को नष्ट किया जा रहा है.
जियो-टैगिंग से तैयार किया जा रहा है पूरा रिकॉर्ड
उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर भांग की खेती मिल रही है, उस जगह की जियो-टैगिंग की जा रही है. फोटो और वीडियोग्राफी के जरिए भी कार्रवाई को रिकॉर्ड किया जा रहा है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि अभियान के दौरान नष्ट की गई फसल और कार्रवाई वाले स्थान का पूरा रिकॉर्ड मौजूद रहे. कार्रवाई पूरी होने के बाद वन विभाग की तरफ से फसल नष्ट किए जाने का प्रमाण पत्र भी जारी किया जाएगा.