महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में वृद्धाश्रम में रह रहे एक व्यक्ति ने दो लोगों की हत्या कर दी. उसके हमले से घायल 6 लोग अस्पताल में भर्ती हैं. मरने वालों में एक सुरक्षा गार्ड भी शामिल है. चौंकाने वाली बात ये है कि हमला करने वाला आंशिक लकवे से पीड़ित है. पुलिस ने से उसे गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस का दावा है कि आरोपी वृद्धाश्रम में मिल रहे कथित तानों से परेशान था. सवाल ये है कि क्या किसी व्यक्ति को लगातार अपमानित किया जाना या ताने देना उसका व्यवहार इतना बदल सकता है कि वह हत्या बन जाए. PubMed में प्रकाशित एक रिसर्च में इसका जवाब दिया गया है.
रिसर्च के मुताबिक लगातार अपमान की वजह से व्यक्ति खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचा सकता है. मगर सिर्फ ताने इसकी वजह नहीं हैं. मनोविज्ञान में किसी के अपमान को उस अनुभव के तौर पर देखा जाता है, जिसमें व्यक्ति ये मानता है कि उसकी गरिमा को चोट पहुंची है. जब ये क्रम बढ़ जाता है तो किसी भी व्यक्ति में दो भावनाएं तेजी से घर बनाती हैं. इनमें एक होती है गुस्सा और दूसरी शर्म. ऐसे में जरूरी नहीं कि व्यक्ति सिर्फ हिंसा का ही सहारा ले, वह खुद को भी नुकसान पहुंचा सकता है.
अहिल्यानगर वृद्धाश्रम में आखिर क्या हुआ?
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित मातो श्री वृद्धाश्रम में एक व्यक्ति ने शनिवार को चलने का सहारा बनने वाली छड़ी से वारदात को अंजाम दिया. उसने सोते समय एक व्यक्ति के सिर पर छड़ी के नुकीले हिस्से से वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई. वह अन्य लोगों के पास गया और उन पर भी हमला किया. चीख पुकार पर जब गार्ड भागकर आए तो उन्हें भी नहीं छोड़ा. हमले में एक गार्ड समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दूसरे गार्ड समेत 6 लोग घायल हैं.
पुलिस के मुताबिक आरोपी 54 साल का एक व्यक्ति है जो आंशिक रूप से लकवे का शिकार है. इसी वजह से वह छड़ी से चलता है. लकवे का असर उसके चेहरे पर भी है, जिससे उसे बोलने में और खाना खाने में भी परेशानी होती है. आरोप है कि उसके ठीक से न बोल पाने और खाना खाते समय गिराने को लेकर वृद्धाश्रम में रह रहे अन्य लोग उसका मजाक उड़ाते थे, जिस वजह से उसने ये कदम उठाया है. अहिल्यानगर के पुलिस अधीक्षक एम सुदर्शन के मुताबिक आरोपी से पूछताछ की जा रही है.
क्या ताने हत्या बना सकते हैं?
अमेरिकन साइकोलॉजी सोसायटी के एक रिसर्च के मुताबिक किसी भी व्यक्ति की प्रतिक्रिया किसी एक घटना पर निर्भर नहीं करती. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह किसी की कही बात को कैसे अपने ऊपर ले रहा है. उसके पहले के अनुभव क्या रहे हैं और वह इसे कितना गलत मानता है. हाल ही में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक तानों से अपमान, गुस्सा और शर्म तीन तरह के अनुभव होते हैं, ये किसी भी व्यक्ति की मानसिक स्थिति पर निर्भर करता है कि वह उसे कैसे लेता है. इनमें अपमान और गुस्सा हिंसा का कारण बन सकते हैं, जबिक शर्म बचने या दूर हटने से संबंधित होती है.
बार-बार तानों से क्या होता है?
अमेरिकन साइकोलॉजी सोसायटी के मुताबिक बार-बार अपमान होने से किसी भी व्यक्ति में वायलेंस ट्रिगर हो सकता है और ये काफी देर बाद भी हो सकता है. उदाहरण के तौर पर किसी व्यक्ति को सुबह अपमानित किया गया. वह दिनभर उसके बारे में सोच सकता है कि आखिर उससे ये बात क्यों कही गई. वह ये भी सोच सकता है कि उसे इसके जवाब में क्या कहना चाहिए.
अगर ये दूसरी या तीसरी बार या लगातार हो रहा है तो वह इसे जानबूझकर किया गया अपराध मान सकता है और उसे सबक सिखाने के बारे में सोच सकता है. ऐसा करने पर गुस्सा व्यक्ति पर हावी हो जाता है और वह हमला कर सकता है. 2025 की एक मेटा एनालिसिस में 171 रिसर्च शामिल किए गए. इसमें 2.52 लोगों को शामिल किया गया. इसमें देखा गया कि तानों ने कैसे लोगों को चोट पहुंचाई. वह लगातार इसके बारे में सोचते रहे और कुछ ने गुस्से के साथ इसे बाहर निकाला, जबकि कुछ अवसाद में चले गए.
ताने से अवसाद भी होता है
सोसायटी की ही एक अन्य रिसर्च में तकरीबन साढ़े सात हजार लोगों को शामिल किया गया था. इसमें सामने आया कि लगातार अपमान की वजह से लोग अवसाद के शिकार हो गए. शर्म की वजह से इन लोगों ने समाज से दूरी बना ली. PubMed के रिसर्च के मुताबिक दिमाग हर समय हो रहे अपमान को मजाक के तौर पर नहीं लेता. दिमाग ये तय करता है कि किस बात का जवाब देता है और किस बात को छोड़ देना है. खासतौर से किसी वृद्धाश्रम में लंबे समय तक दूसरों पर निर्भर रहने से, बीमारी या दिव्यांग्यता बढ़ने की वजह से लोगों में हिंसा ज्यादा ट्रिगर हो सकती है.