Pitru Paksha 2026 Niyam: पितृ पक्ष का प्रारंभ 27 सितंबर, रविवार से हो रहा है. वहीं कई स्थानों पर 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध है. पितृ पक्ष से जुड़े कुछ नियम हैं, जिनका पालन सभी को करना चाहिए. इससे पितर प्रसन्न होते हैं और आशीर्वाद देते हैं. पितृ पक्ष में आपने देखा होगा कि लोग अपने पितर के श्राद्ध की तिथि पर सिर के बाल का मुंडन करा लेते हैं. वहीं कुछ लोग इस असमंजस में रहते हैं कि इस साल अपने बेटे या बेटी का विवाह किया है तो पितृ पक्ष में पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करें या नहीं? लखनऊ के ज्योतिषाचार्य पं.राकेश पाण्डेय से जानते हैं कि शास्त्रों में इसके बारे में क्या नियम हैं?
पितृ पक्ष में मुंडन कराने का नियम
ज्योतिषाचार्य पाण्डेय के अनुसार, श्राद्ध पक्ष के प्रारंभ होने पर या फिर उसके दौरान यानि प्रतिपदा से लेकर सर्वपितृ अमावस्या के बीच पितरों के लिए अपने सिर का मुंडन नहीं कराना चाहिए. इसके लिए शास्त्र आज्ञा नहीं देते हैं.
धर्मसिंधु में बताया गया है कि पितृ पक्ष में जब आप श्राद्ध की तिथि पर मुंडन कराते हैं तो आपके सिर के बाल पितरों के मुख में जाते है. इससे बचने के लिए आपको पितृ पक्ष के प्रारंभ होने से एक दिन पूर्व या फिर सर्वपितृ अमावस्या को दोपहर के समय में अपना मुंडन कराना चाहिए.
पं.राकेश पाण्डेय, ज्योतिषाचार्य.
अब तक आप श्राद्ध तिथि पर मुंडन कराते रहे हैं तो यह अनिभिज्ञता के कारण था, अब से आप ऐसा न करें.
घर में शादी हुई है तो पितृ पक्ष में श्राद्ध करें या नहीं?
इस बात को लेकर भी लोगों में असमंजस की स्थिति होती है. इस सवाल पर ज्योतिषाचार्य पाण्डेय का कहना है कि अगर आपने इस वर्ष अपने पुत्र या पुत्री का विवाह किया है तो भी पितृ पक्ष में अपने पितरों के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध आदि कर्म जरूर करें.
लोगों में भ्रांति है कि घर में विवाह या कोई मांगलिक कार्य हुआ है तो पितृ पक्ष में पितरों के लिए अन्न, जल, वस्त्र आदि का दान न करें, श्राद्ध कर्म न करें, यह अशुभ होता है. इस वजह से ही निर्णयसिंधुकार के कथनानुसार सभी मांगलिक कार्यों में पितृ कार्य उत्तम और आवश्यक माना गया है.
इस वजह से आप बिना किसी अशुभ बात या संशय को त्याग करके पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध करें.
पितर नहीं करते क्षमा
जब जनेऊ, विवाह आदि जैसे मांगलिक कार्य होते हैं तो उससे पूर्व नांदीमुख श्राद्ध अवश्य करते है. इसका उद्देश्य यह है कि घर पर होने वाले शुभ कार्य में कोई बाधा न आए. पितृ पक्ष साल में एक बार आता है, इसलिए पितरों को तृप्त और संतुष्ट जरूर करना चाहिए.
कहते हैं कि देवी और देवता की पूजा में भूल की क्षमा है, लेकिन पितृ कार्यों में कमी या उनको नजरअंदाज करना पितृ दोष का कारण बनता है, जिसकी वजह से पितर नाराज हो जाते हैं, जिससे परिवार में रोग, शोक, अन्य कष्ट आदि भोगना पड़ता है.
तिथि नहीं पता तो सर्वपितृ अमावस्या पर करें श्राद्ध
जिन लोगों को अपने पितरों के निधन की तिथि नहीं पता है, वे लोग सर्वपितृ अमावस्या पर उनके लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध आदि करें.
खुशीपूर्वक मनाएं पितृ पक्ष
पितृ पक्ष पितरों की पूजा और उनको संतुष्ट करने का उत्सव है. इसमें दुख करने की जरूरत नहीं है. आप खुशीपूर्वक पितृ पक्ष मनाएं. शास्त्रों में कहा गया है कि मातृ देवो भव:, पितृ देवो भव:. माता और पिता के समान कोई देवता नहीं है. उनके आशीर्वाद से हर सुख प्राप्त होता है. पितृ पक्ष में रोज उनके लिए तर्पण करें और तिथि पर पिंडदान करें. अन्न और वस्त्र का दान करें.