MP हाईकोर्ट में 5 साल के बच्चे से पूछा सवाल-किसके साथ रहना है? जवाब दिया-मां के पास; फिर हुआ ये फैसला

MP हाईकोर्ट में 5 साल के बच्चे से पूछा सवाल-किसके साथ रहना है? जवाब दिया-मां के पास; फिर हुआ ये फैसला


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Madhya Pradesh High Court: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक कस्टडी विवाद पर सुनाई के दौरान अलग ही नजारा देखने को मिला, जब कोर्ट ने पांच साल के बच्चे से पूछा कि उसे किसके पास रहना है. तो उसने कहा कि मां उसे प्यार करती है और उसे मां के पास ही रहना है. फिर कोर्ट ने मां को बच्चे की कस्टडी दे दी.

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एमपी हाईकोर्ट में 5 साल के बच्चे ने कहा कि मां के पास रहना है. (AI तस्वीर)

MP High Court: मां और बेटे का रिश्ता दुनिया का सबसे गहरा रिश्ता होता है, जो बिना किसी शर्त के प्रेम पर टिका होता है. एक बेटा सबसे ज्यादा सुरक्षित अपनी मां की गोद में ही करता है. अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में बच्चे की कस्टडी को लेकर एक भावुक नजारा देखने को मिला. जब पांच साल के बच्चे से बेंच ने पूछा कि वह अपने पिता या मां में से किसके पास रहना चाहता है, तो बच्चे ने बताया कि वह अपनी मां के साथ रहना चाहता है. बच्चे की पसंद को देखते हुए ही कोर्ट ने माना कि बच्चा अपनी मां के साथ ज्यादा सुरक्षित रहेगा. इसके बाद मां को स्थाई कस्टडी दे दी. जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और अनुराधा शुक्ला बच्चे की मां द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें मां ने बच्चे की कस्टडी की मांग की थी.

बच्चे के साथ कोर्ट में पेश हुई थी मां
बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट में बच्चे के पिता और दादी भी मौजूद थे, जबकि मां बच्चे के साथ पेश हुई थी. क्योंकि उसके पास पहले से ही बच्चे की अस्थाई कस्टडी थी, जो उसे 21 सितंबर को ही मिली थी. कोर्ट को बच्चे ने बताया कि मां उससे प्यार करती है और वह अपनी मां के साथ रहना चाहता है. कोर्ट ने भी यह माना कि बच्चा अपने पिता के साथ रहने के बजाए अपनी मां के साथ ज्यादा सुरक्षित रहेगा.

पिता हर महीने कमाते हैं 10000 रुपए
बच्चे के पिता ने कोर्ट को बताया है कि वह मजदूरी करते हैं और हर महीने लगभग 10000 रुपए कमाते हैं. उन्होंने बच्चे की मां पर कुछ आरोप लगाए हैं. पिता ने यह भी माना कि वह कभी-कभी शराब पीते हैं. बेंच ने जब बच्चे की दादी से पूछा कि क्या वह पिता की गैर मौजूदगी में अपने पोते की देखभाल करने के लिए तैयार हैं, तो उन्होंने साफ मना कर दिया. उनका कहा था कि यह जिम्मेदारी बच्चे के पिता की है. उनकी नहीं.

मां के पिता ने कहा कि उनकी बेटी को ससुराल लौट जाना चाहिए. उन्हें दूसरे बच्चों की देखभाल भी करनी है. उसके और उसकी ननदों के बीच झगड़ों के बीच झगड़े होते थे. इसी वजह से वह मायके आ गई थी.

बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का किया जिक्र
बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का जिक्र किया जिनमें कहा गया है कि कस्टडी का फैसला सिर्फ माता-पिता या अभिभावक के कानूनी अधिकार को देखकर नहीं किया जा सकता. कोर्ट को बच्चे के आराम, खुशी, सेहत, पढ़ाई-लिखाई, दिमागी विकास और अच्छे माहौल पर भी विचार करना चाहिए. अब कोर्ट के फैसले के बाद बच्चे की कस्टडी मां के पास ही बनी रहेगी.



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