Last Updated:
360-degree VR darshan at Statue of Equality Hyderabad: हैदराबाद के मुचिंतल में स्थित स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी परिसर में श्रद्धालुओं के लिए एआई (AI) और इमर्सिव स्टोरीटेलिंग की नई सुविधा शुरू की गई है. 4 प्वाइंट 2 टेक्नोलॉजीज द्वारा विकसित इस तकनीक के जरिए अब लोग वीआर (VR) हेडसेट की मदद से 360-डिग्री में मंदिर के दैनिक अनुष्ठानों, आरती और अभिषेक के वास्तविक दर्शन कर सकेंगे. संत त्रिदंडी चिन्ना जीयर स्वामीजी की मौजूदगी में शुरू हुई इस पहल का मुख्य उद्देश्य 11वीं सदी के संत रामानुजाचार्य के समानता के संदेश को युवाओं तक पहुंचाना है.
Hyderabad: तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के शमशाबाद स्थित मुचिंतल में स्थापित दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में से एक ‘स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी’ परिसर में श्रद्धालुओं के लिए एक अभूतपूर्व डिजिटल पहल की शुरुआत की गई है. इस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक परिसर में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अब 11वीं सदी के महान समाज सुधारक और दार्शनिक संत रामानुजाचार्य के जीवन और उनके संदेशों को एआई (AI) और इमर्सिव स्टोरीटेलिंग के जरिए समझने का मौका मिलेगा. इस आधुनिक तकनीक के माध्यम से यहां आने वाले लोग केवल इतिहास को सुनेंगे या देखेंगे नहीं, बल्कि उसे 360-डिग्री वर्चुअल रियलिटी (VR) के जरिए सीधे महसूस कर सकेंगे.
इस विशेष परियोजना के तहत श्रद्धालुओं के लिए मंदिर परिसर में होने वाले दैनिक अनुष्ठानों, भव्य अभिषेक और आरती को वीआर तकनीक के माध्यम से रिकॉर्ड किया गया है. सबसे खास बात यह है कि इन दृश्यों को बिना किसी बनावटी बदलाव या वीएफएक्स (VFX) के बिल्कुल वास्तविक रूप में पेश किया गया है. इससे दूर-दराज से आने वाले लोग या वे श्रद्धालु जो किसी वजह से मुख्य पूजा में सीधे शामिल नहीं हो पाते, वे वीआर हेडसेट लगाकर 360-डिग्री एंगल से ऐसा अनुभव कर सकते हैं मानो वे खुद गर्भगृह के सामने उपस्थित हों. यह तकनीक न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करती है बल्कि युवाओं को भी भारतीय संस्कृति के करीब लाती है.
4 प्वाइंट 2 टेक्नोलॉजीज की अत्याधुनिक पहल
इस पूरी व्यवस्था को ‘4 प्वाइंट 2 टेक्नोलॉजीज’ (4 Point 2 Technologies) नाम की एक अग्रणी टेक कंपनी ने तैयार किया है. यह कंपनी ऑगमेंटेड रियलिटी (AR), वर्चुअल रियलिटी (VR), मिक्स्ड रियलिटी (MR) और एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) जैसी अगली पीढ़ी की तकनीकों पर विशेषज्ञता रखती है. कंपनी के संस्थापक और चेयरमैन के. शिव कुमार ने इस अवसर पर कहा कि आज के दौर में पर्यटन का मतलब केवल किसी स्थल पर जाकर तस्वीरें खिंचवाना नहीं रह गया है. आधुनिक पर्यटक और युवा पीढ़ी उस जगह के इतिहास, दर्शन और सांस्कृतिक महत्व को गहराई से समझना चाहती है. एआर और वीआर जैसी डिजिटल तकनीकें पुरानी विरासत और नई पीढ़ी के बीच एक मजबूत पुल का निर्माण करती हैं.
त्रिदंडी चिन्ना जीयर स्वामीजी ने किया शुभारंभ
इस अत्याधुनिक डिजिटल स्टोरीटेलिंग सुविधा का आधिकारिक उद्घाटन पूज्य संत त्रिदंडी चिन्ना जीयर स्वामीजी की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ. उद्घाटन के दौरान स्वामीजी ने कहा कि आधुनिक तकनीकें किसी भी आध्यात्मिक या ऐतिहासिक स्थल को देखने के पारंपरिक दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल सकती हैं. उन्होंने कहा कि संत रामानुजाचार्य ने 11वीं सदी में ही समाज में समानता, सौहार्द और बंधुत्व की नींव रखी थी. आज के इस डिजिटल युग में उनके समानता के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए एआई और वीआर जैसे सशक्त माध्यम बेहद असरदार साबित होंगे. यह तकनीक आने वाले समय में सांस्कृतिक पर्यटन की परिभाषा बदल देगी.
संस्कृति और विरासत को संजोने की नई दिशा
मुचिंतल स्थित स्टैच्यू ऑफ इक्वालिटी परिसर दर्शन, आध्यात्मिकता और सामाजिक समरसता का एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनता जा रहा है. एआई संचालित इमर्सिव स्टोरीटेलिंग के माध्यम से न केवल भारतीय लोककथाओं और समृद्ध संस्कृति को जीवित रखा जा रहा है, बल्कि यह तकनीक आने वाले समय में अन्य ऐतिहासिक स्थलों के लिए भी एक मिसाल पेश करेगी. इस पहल के शुरू होने से अब यहां आने वाले देशी और विदेशी पर्यटक संत रामानुजाचार्य की शिक्षाओं और परिसर की भव्यता को एक नए डिजिटल और संवादात्मक अनुभव के साथ महसूस कर सकेंगे.