South Asia Havy Rain Alert : भारत के पड़ोस में फिर चिंघाड़ भरने लगी ये नदी, तबाही का पहला सिग्नल, 3 हाईवे पर लाल निशान

South Asia Havy Rain Alert : भारत के पड़ोस में फिर चिंघाड़ भरने लगी ये नदी, तबाही का पहला सिग्नल, 3 हाईवे पर लाल निशान


भारत के पड़ोसी देश नेपाल में एक बार फिर तबाही चिंघाड़ रही है. यहां की नदी ने आने वाले खौफनाक हालातों का सिग्नल दे दिया है. सिर्फ यही नहीं 3 हाईवे पर अभी से ही लाल निशान देखने लगे हैं. नेपाल के लोग काफी डरे हुए हैं, क्योंकि अभी कुछ ही दिनों पहले आई भयानक बाढ़ में हजारों लोगों की जान चली गई थी. अब बागमती नदी के उफान को देखकर हर तरफ अनहोनी का डर छाया हुआ है, कहीं जमीन धंस रही है, तो कहीं पानी रौद्र रूप लेता दिखाई दे रहा है.

बागमती नदी का उफान: किनारे बसे इलाकों में फैला पैनिक

नेपाल में जब-जब नदियां उफान पर आती हैं, तब-तब सबसे पहले काठमांडू घाटी पर ही गाज गिरती है. इस बार भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है. लगातार हो रही भारी बारिश के बाद बागमती नदी अपने किनारों को तोड़कर बाहर बहने लगी है. नदी का मटमैला पानी इतनी तेजी से और इतनी ऊंची लहरों के साथ बह रहा है कि मानो वह अपने रास्ते में आने वाली हर चीज को लील जाने पर आमादा हो.

नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन ने नदी के किनारे बसे निचले इलाकों में रहने वाली आबादी के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है. लोगों ने नदी का जलस्तर अचानक बढ़ते देखा, तो पूरे इलाके में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई. पानी दुकानों और घरों के मुहाने तक पहुंच चुका है. लोग अपना कीमती सामान समेटकर सुरक्षित जगहों की तरफ भागने को मजबूर हो गए हैं. जिन लोगों के मकान नदी के बिल्कुल पास हैं, वो डर के साए में जीने को मजबूर हैं और उन्हें इस बात का डर सता रहा है कि कहीं नदी का तेज बहाव उनके आशियाने को बहाकर न ले जाए.

3 मुख्य हाईवे पर लाल निशान: काठमांडू का टूटा संपर्क

इस प्राकृतिक आपदा ने सिर्फ नदी किनारे रहने वालों को ही नहीं, बल्कि नेपाल की पूरी परिवहन व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है. पहाड़ों पर हो रही लगातार बारिश के कारण जगह-जगह बड़े-बड़े भूस्खलन हो रहे हैं, जिन्होंने देश की लाइफलाइन माने जाने वाले तीन सबसे अहम रास्तों को ठप कर दिया है:

  1. पृथ्वी हाईवे: नेपाल की राजधानी काठमांडू को देश के पश्चिमी हिस्सों और पोखरा जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ने वाला ये सबसे व्यस्त हाईवे पूरी तरह से ठप पड़ा है. पहाड़ों से गिरे मलबे और पत्थरों ने रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया है.
  2. बीपी हाईवे : पूर्वी नेपाल और तराई के इलाकों को राजधानी से जोड़ने वाला ये बेहद महत्वपूर्ण हाईवे भी लैंडस्लाइड की चपेट में आ चुका है. जगह-जगह सड़कें धंस गई हैं और यातायात पूरी तरह ठप है.
  3. कांति लोकपथ : काठमांडू को हेटौड़ा और दक्षिणी नेपाल से जोड़ने वाला ये वैकल्पिक रास्ता भी मलबे से ढका हुआ है, जिससे गाड़ियों की आवाजाही नामुमकिन हो गई है. इन तीनों हाईवे के बंद हो जाने की वजह से काठमांडू एक तरह से देश के बाकी हिस्सों से पूरी तरह कट गया है.

सड़कों पर खड़ी गाड़ियों का कब्रिस्तान: हजारों यात्री फंसे

हाईवे बंद होने के बाद सड़कों पर जो नजारा देखने को मिल रहा है, वह बेहद दर्दनाक है. दूर-दराज का सफर तय करने वाली बसें, जरूरी सामान से लदे भारी ट्रक और निजी गाड़ियां हाईवे पर किनारे खड़ी हैं और आगे नहीं बढ़ पा रही हैं.

  • खाने-पीने की किल्लत: हाईवे पर फंसे ड्राइवरों और यात्रियों के पास न तो खाने की सही व्यवस्था है और न ही पीने का साफ पानी. बारिश के बीच सड़कों पर रात बिताने को मजबूर लोग केवल इस इंतजार में हैं कि कब मलबा साफ होगा और रास्ता खुलेगा.
  • सप्लाई चेन पर असर: फल, सब्जियां, दूध और दवाइयों जैसी जरूरी चीजों से भरे सैकड़ों ट्रक रास्तों में रुके हुए हैं. अगर ये हाईवे जल्द नहीं खुले, तो काठमांडू जैसे बड़े शहरों में रोजमर्रा की चीजों की भारी कमी हो सकती है.
  • रेस्क्यू टीम की चुनौतियां: लगातार हो रही बारिश और गिरते पत्थरों के कारण राहत और बचाव कार्य में लगी जेसीबी मशीनों और सुरक्षाकर्मियों को मलबा हटाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.

26 अगस्त को ऐसा क्या हुआ कि पैनिक मोड में आ गए लोग?

26 अगस्त की तारीख नेपाल के लोगों के लिए किसी खौफनाक सपने से कम साबित नहीं हुई. उस दिन तड़के से शुरू हुई मूसलाधार बारिश ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया.

नदियों में पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि चेतावनी जारी करने तक का वक्त नहीं मिला. बागमती नदी के पुलों के ऊपर से पानी बहने लगा और तटीय इलाकों में बने कई छोटे-मोटे ढांचे पानी के तेज बहाव में तिनके की तरह बह गए. लोगों के अंदर पैनिक इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि नेपाल में मानसून के दौरान अक्सर बाढ़ और लैंडस्लाइड से भारी नुकसान होता है. साल-दर-साल होने वाली इस तबाही की यादें 26 अगस्त की इस घटना के बाद लोगों के दिलों में फिर से ताजा हो गई हैं. हर कोई बस यही दुआ कर रहा है कि बारिश थमे और नदियों का गुस्सा शांत हो.

भारत के लिए क्यों है ये तबाही का पहला सिग्नल?

आप सोच रहे होंगे कि नेपाल में आई इस बाढ़ का असर भारत पर क्या पड़ेगा? तो आपको बता दें कि नेपाल के भूगोल और भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों का सीधा संबंध है. नेपाल की पहाड़ियों से निकलने वाली बागमती, कोसी, गंडक और कर्णाली जैसी नदियां आगे चलकर भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में प्रवोश करती हैं.

    • बिहार में बाढ़ का खतरा: नेपाल में जब भी बागमती या कोसी नदी उफान पर आती है, उसका सीधा असर बिहार के मैदानी इलाकों पर पड़ता है. नेपाल की तबाही के बाद बिहार के सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और मधुबनी जैसे जिलों में बाढ़ का खतरा अचानक बढ़ जाता है.
    • जलस्तर में बढ़ोतरी: नेपाल में हो रही इस भारी बारिश का पानी जब भारत की तरफ बहेगा, तो भारत की नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ेगा. इसी वजह से भारतीय सीमावर्ती इलाकों और जल संसाधन विभाग को भी अलर्ट पर रखा गया है.





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