IIT Bombay Story: 28 साल पहले IIT मद्रास में छात्रा बनकर आईं प्रीति, कैसे बनीं पहली महिला आईआईटी लीडर?

IIT Bombay Story: 28 साल पहले IIT मद्रास में छात्रा बनकर आईं प्रीति, कैसे बनीं पहली महिला आईआईटी लीडर?


IIT Bombay Professor Story: सालकुछ सफर ऐसे होते हैं जिनमें मंजिल पर पहुंचने के बाद पीछे मुड़कर देखने पर शुरुआत और अंत के बीच का फासला साफ दिखाई देता है प्रीति अघलायम का अकादमिक सफर भी कुछ ऐसा ही है.साल 1995 में उन्होंने IIT मद्रास में एक छात्रा के तौर पर कदम रखा था.यहां से उन्होंने केमिकल इंजीनियरिंग में BTech की पढ़ाई पूरी की.करीब तीन दशक बाद 2023 में उनकी वापसी इसी संस्थान में एक बिल्कुल अलग भूमिका में हुई.उन्हें IIT मद्रास के तंजानिया स्थित पहले इंटरनेशनल कैंपस, IIT मद्रास जांजीबार का डायरेक्‍टर इन चार्ज नियुक्त किया गया.इस नियुक्ति के साथ वह किसी IIT का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनीं यानी जिस संस्थान में उनका सफर एक छात्रा के रूप में शुरू हुआ था.उसी IIT से जुड़कर वह आगे चलकर उसके अंतरराष्ट्रीय विस्तार के एक अहम पड़ाव की जिम्मेदारी संभालने लगीं.

IIT मद्रास से शुरू हुई थी पढ़ाई की कहानी

प्रीति अघलायम ने 1995 में IIT मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में BTech की डिग्री हासिल की.IIT मद्रास से ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख किया.उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट (University of Massachusetts Amherst)से PhD की.इसके बाद उनका अकादमिक और रिसर्च करियर अमेरिका के प्रतिष्ठित मैसाचुसेट्स इंस्‍टीटयूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (Massachusetts Institute of Technology)यानी MIT तक पहुंचा.यहां उन्होंने रिसर्च और अकादमिक क्षेत्र में अनुभव हासिल किया.अंतरराष्ट्रीय अकादमिक अनुभव लेने के बाद प्रीति अघलायम भारत लौटीं और IIT बॉम्‍बेमें फैकल्टी के तौर पर काम शुरू किया.इसके बाद साल 2010 में वह IIT मद्रास से जुड़ गईं.इस तरह एक छात्रा के रूप में IIT मद्रास से शुरू हुआ उनका रिश्ता आगे चलकर फैकल्टी और फिर संस्थान से जुड़ी बड़ी जिम्मेदारी तक पहुंचा.

IIT मद्रास में प्रोफेसर के तौर पर भी निभाई जिम्मेदारी

IIT मद्रास से दोबारा जुड़ने के बाद प्रीति अघलायम ने यहां प्रोफेसर के तौर पर अपनी अकादमिक जिम्मेदारियां निभाईं.वह केमिकल इंजीनियरिंग की प्रोफेसर हैं और उनका काम टीचिंग और रिसर्च से जुड़ा रहा है यानी IIT मद्रास के साथ उनका रिश्ता सिर्फ एक पूर्व छात्रा के तौर पर नहीं रहा.उन्होंने इसी संस्थान में फैकल्टी के रूप में भी काम किया और अकादमिक क्षेत्र में अपनी भूमिका निभाई.इसी वजह से 2023 में जब उन्हें IIT मद्रास जांजीबार की जिम्मेदारी मिली तो यह उनके लिए सिर्फ एक नई प्रशासनिक भूमिका नहीं थी.यह उस संस्थान में एक तरह की वापसी भी थी जहां से उनका अपना अकादमिक सफर शुरू हुआ था.

तंजानिया में IIT मद्रास का पहला इंटरनेशनल कैंपस

प्रीति अघलायम को 2023 में IIT मद्रास जांजीबार का डायरेक्‍टर इन चार्ज बनाया गया.यह कैंपस तंजानिया में स्थित है और IIT मद्रास का पहला इंटरनेशनल कैंपस है.IIT मद्रास के भारत से बाहर अकादमिक विस्तार की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम था.इस कैंपस में डेटा साइंस और अर्टिफ‍िशियल इंटेल‍िजेंस (Artificial Intelligence)जैसे क्षेत्रों में प्रोग्राम शुरू किए गए.जांजीबार कैंपस सिर्फ एक विदेशी परिसर नहीं था बल्कि इसके जरिए भारत और तंजानिया के बीच अकादमिक सहयोग को भी आगे बढ़ाया गया.IIT मद्रास ने वहां अपनी टीचिंग और संस्थागत विशेषज्ञता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया.ऐसे समय में प्रीति अघलायम को कैंपस की जिम्मेदारी मिलना उनके करियर का एक अहम पड़ाव था.

2023 में बनीं IIT का नेतृत्व करने वाली पहली महिला

प्रीति अघलायम की नियुक्ति की सबसे खास बात यह रही कि 2023 में IIT मद्रास जांजीबार की कमान संभालने के साथ वह IIT का नेतृत्व करने वाली पहली महिला बनीं.यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि उनका अपना सफर IIT मद्रास से ही शुरू हुआ था.उन्होंने 1995 में यहां BTech की छात्रा के तौर पर प्रवेश लिया था.इसके बाद अमेरिका में PhD और रिसर्च का अनुभव हासिल किया, भारत में IIT बॉम्‍बे की फैकल्टी बनीं और फिर 2010 में IIT मद्रास से जुड़ीं.करीब तीन दशक के इस सफर में उनकी भूमिका लगातार बदलती गई.छात्रा से प्रोफेसर और फिर एक इंटरनेशनल IIT कैंपस की लीडर तक पहुंचने का यह सफर उनके अकादमिक करियर की अलग तस्वीर पेश करता है.

IIT मद्रास में वापसी बनी फुल-सर्कल मोमेंट

प्रीति अघलायम की कहानी को खास बनाने वाली एक और बात है उनका IIT मद्रास से लगातार जुड़ाव.1995 में वह यहां पढ़ने आई थीं.कई सालों तक उच्च शिक्षा और अकादमिक अनुभव हासिल करने के बाद वह 2010 में इसी संस्थान में फैकल्टी के तौर पर लौटीं.इसके बाद 2023 में उन्हें उसी संस्थान के अंतरराष्ट्रीय कैंपस की जिम्मेदारी मिली.इस तरह उनके सफर में IIT मद्रास तीन अलग-अलग भूमिकाओं में दिखाई देता है.पहली बार वह यहां छात्रा बनकर आईं, दूसरी बार प्रोफेसर बनकर लौटीं और तीसरी बार संस्थान के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की जिम्मेदारी संभालने वाली लीडर के रूप में सामने आईं.

सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहा काम

प्रीति अघलायम की पहचान केवल टीचिंग और रिसर्च तक सीमित नहीं रही.उन्हें ऑफ‍िस ऑफ द प्रिंसिपल साइंटिफ‍िक एडवाइजर की ओर से 75 वूमेन इन स्‍टेम (STEM)में भी पहचान मिली.वह साइंस और टेक्नोलॉजी में महिलाओं की भागीदारी और जेंडर रिप्रेजेंटेशन को बढ़ाने से जुड़ी पहलों से भी जुड़ी रही हैं.उनके अकादमिक काम को कई पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया है.उन्हें अमर डाई केम अवॉर्ड मिला है। इसके अलावा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ केमिकल इंजीनियर्स की ओर से यंग अचीवर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है.इस तरह उनके करियर में टीचिंग, रिसर्च, संस्थागत जिम्मेदारियों के साथ-साथ साइंस और टेक्नोलॉजी में महिलाओं की भागीदारी से जुड़े काम भी शामिल रहे हैं.

अमेरिका से भारत और फिर भारत से दुनिया तक

प्रीति अघलायम का करियर एक ही जगह तक सीमित नहीं रहा.IIT Madras से BTech करने के बाद उन्होंने अमेरिका में PhD की और MIT जैसे संस्थान में रिसर्च और अकादमिक अनुभव हासिल किया.इसके बाद उन्होंने भारत लौटकर IIT बॉम्‍बे में फैकल्टी के तौर पर काम किया और 2010 में IIT मद्रास से जुड़ गईं.फिर IIT मद्रास के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के साथ उनका करियर तंजानिया के जांजीबार तक पहुंचा.इस तरह उनका सफर IIT मद्रास से अमेरिका, फिर अमेरिका से भारत और भारत से एक इंटरनेशनल IIT कैंपस तक रहा.

खुद भी IIT मद्रास की छात्रा रहीं

प्रीति अघलायम ने अपनी इस जिम्मेदारी को लेकर कहा था-‘I am an alumnus of IIT Madras and doing something of this magnitude for the institute and for the country is such a big honour.’उनके लिए यह जिम्मेदारी इसलिए भी खास थी क्योंकि वह खुद IIT मद्रास की एलुमनस हैं.जिस संस्थान में उन्होंने 1995 में एक छात्रा के रूप में पढ़ाई शुरू की थी.करीब 28 साल बाद उसी संस्थान के अंतरराष्ट्रीय विस्तार के केंद्र में वह नेतृत्व की भूमिका में थीं.



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