IAS, UPSC Success Story: UPSC में 83 वीं रैंक: BTech किया, शादी का था दबाव, नौकरी छोड़ 2018 में बन गई IAS

IAS, UPSC Success Story: UPSC में 83 वीं रैंक: BTech किया, शादी का था दबाव, नौकरी छोड़ 2018 में बन गई IAS


UPSC, UPSC Success Story: UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है लेकिन इस सपने को पूरा करने की राह में कई बार असफलताएं भी आती हैं.हर असफलता के बाद दोबारा शुरुआत करना आसान नहीं होता.खासकर तब जब करियर के साथ-साथ परिवार की तरफ से शादी का दबाव भी बढ़ रहा हो.हरियाणा की निधि सिवाच के सामने भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी.वह UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा के दो प्रयास कर चुकी थीं, लेकिन दोनों बार सफलता नहीं मिली.दूसरी तरफ परिवार में शादी को लेकर दबाव बढ़ रहा था.ऐसे समय में उनके सामने एक रास्ता था कि वह अपनी तैयारी छोड़कर आगे बढ़ें लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

उन्होंने खुद को एक और मौका देने का फैसला किया.इसके लिए उन्होंने अपनी नौकरी तक छोड़ दी और पूरी तरह UPSC की तैयारी में जुट गईं.साल 2018 में उनका यह फैसला रंग लाया.तीसरे प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 83 हासिल की.इसके बाद वह भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी IAS में शामिल हुईं.

इंजीनियरिंग की पढ़ाई, फिर प्राइवेट नौकरी

निधि सिवाच हरियाणा से हैं.उन्होंने दीनबंधु छोटूराम यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, मुरथल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया.इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता की उम्मीद के मुताबिक प्राइवेट सेक्टर में करियर शुरू किया.उन्हें हैदराबाद में टेक महिंद्रा में डिजाइन इंजीनियर की नौकरी मिली लेकिन नौकरी शुरू करने के बाद भी उनके मन में सिविल सर्विसेज में जाने की इच्छा बनी रही.प्राइवेट नौकरी उनका पहला करियर विकल्प नहीं थी.वह सिविल सर्विसेज की तरफ जाना चाहती थीं, लेकिन नौकरी के साथ UPSC की गंभीर तैयारी कर पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा था.इसी वजह से आखिरकार उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला लिया.

बचपन से सेना में जाने का भी था सपना

सिविल सर्विसेज को अपना लक्ष्य बनाने से पहले निधि सिवाच ने सेना में जाने के विकल्प पर भी विचार किया था.बचपन से ही उनकी रुचि सशस्त्र बलों में जाने की थी.उन्होंने एयर फोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट यानी AFCAT की लिखित परीक्षा पास की और सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड यानी SSB इंटरव्यू में भी शामिल हुईं.हालांकि आगे चलकर उन्होंने इस रास्ते को छोड़कर UPSC सिविल सर्विसेज की तैयारी को अपना लक्ष्य बना लिया यानी इंजीनियरिंग से लेकर प्राइवेट नौकरी, फिर डिफेंस सर्विसेज और अंत में सिविल सर्विसेज तक, निधि के करियर का रास्ता एक सीधी लाइन में नहीं चला.उन्होंने अलग-अलग विकल्पों पर विचार करने के बाद आखिरकार प्रशासनिक सेवा को अपना लक्ष्य बनाया.

दो बार UPSC में नहीं मिली सफलता

निधि ने UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा का पहला प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो पाईं.इसके बाद उन्होंने दूसरी बार भी परीक्षा दी लेकिन इस प्रयास में भी उनका सेलेक्‍शन नहीं हुआ.दो असफलताओं के बाद आमतौर पर किसी भी उम्मीदवार के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है.निधि के सामने भी अब सिर्फ परीक्षा की चुनौती नहीं थी.परिवार की ओर से शादी को लेकर दबाव भी बढ़ने लगा था.उन्हें तय करना था कि वह अपनी तैयारी को यहीं रोक दें या एक बार फिर पूरी ताकत के साथ परीक्षा में उतरें.निधि ने दूसरा रास्ता चुना.

शादी से पहले अपनी पहचान बनाना चाहती थीं

निधि सिवाच ने एक इंटरव्‍यू में बताया था कि वह शादी के खिलाफ नहीं थीं, लेकिन वह शादी से पहले अपनी एक पहचान बनाना चाहती थीं.उन्होंने कहा था कि मैं शादी से पहले अपनी पहचान बनाना चाहती थी.उन्होंने यह भी बताया था कि वह जाट परिवार से आती हैं जहां कम उम्र में शादी की परंपरा रही है.ऐसे में दो बार UPSC में असफल होने के बाद उनके सामने शादी करने या एक और बार परीक्षा देने का विकल्प था.निधि को लगा कि शादी के बाद आने वाली अतिरिक्त जिम्मेदारियों के बीच UPSC जैसी परीक्षा के लिए उतना समय देना मुश्किल हो सकता है जितना वह अपनी तैयारी के लिए चाहती थीं.इसलिए उन्होंने शादी से पहले एक आखिरी कोशिश करने का फैसला किया.यही फैसला उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ.

2017 में नौकरी छोड़ी, कोचिंग नहीं ली

साल 2017 में निधि सिवाच ने टेक महिंद्रा की नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह UPSC की तैयारी में जुट गईं.उनकी तैयारी की एक खास बात यह थी कि उन्होंने किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया.उन्होंने मुख्य रूप से सेल्फ स्टडी के जरिए तैयारी की.वह लंबे समय तक खुद पढ़ाई करती रहीं और तीसरे प्रयास को अपनी आखिरी और सबसे गंभीर कोशिश के तौर पर लिया.निधि ने बताया था कि उन्होंने प्राइवेट सेक्टर की नौकरी इसलिए ज्वाइन की थी क्योंकि उनके पिता चाहते थे कि वह वह रास्ता अपनाएं लेकिन उनका मन सिविल सर्विसेज में था और नौकरी के साथ वह ठीक से तैयारी नहीं कर पा रही थीं.इसलिए उन्होंने एक दिन नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू कर दी.

तीसरे प्रयास में बदल गई पूरी कहानी

नौकरी छोड़ने के बाद निधि ने अपनी पूरी ऊर्जा UPSC की तैयारी में लगा दी.दो बार असफल होने के बाद अब उनके पास परीक्षा का अनुभव भी था और अपनी पिछली गलतियों को समझने का मौका भी.
आखिरकार साल 2018 में उनका तीसरा प्रयास सफल रहा.उन्होंने UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की और ऑल इंडिया रैंक 83 हासिल की और इस तरह तीसरी बार में उनकी पूरी कहानी बदल गई.उनकी इस सफलता ने उनकी पूरी करियर दिशा बदल दी.मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई और प्राइवेट सेक्टर की नौकरी से शुरू हुआ सफर अब भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंच चुका था.इसके बाद वह डायरेक्ट रिक्रूट के तौर पर IAS में शामिल हुईं.

2019 बैच की गुजरात कैडर की IAS अधिकारी

निधि सिवाच 2019 बैच की गुजरात कैडर की IAS अधिकारी हैं.उनकी शुरुआती पोस्टिंग और बाद की जिम्मेदारियां गुजरात में अलग-अलग जगहों पर रही हैं.उपलब्ध IAS सिविल लिस्ट और रिकॉर्ड के अनुसार वह 1 सितंबर 2019 को IAS में नियुक्त हुईं.उनका होम स्टेट हरियाणा दर्ज है और उनकी शैक्षणिक योग्यता BTech मैकेनिकल इंजीनियरिंग है.उनके करियर में गुजरात के कच्छ-भुज में सुपरन्यूमेरी असिस्टेंट कलेक्टर, साबरकांठा के हिम्मतनगर में असिस्टेंट कलेक्टर, मेहसाणा में स्पेशल लैंड एक्विजिशन ऑफिसर और सूरत क्षेत्र में प्रोजेक्ट एडमिनिस्ट्रेटर जैसी जिम्मेदारियां शामिल रही हैं.उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक वह अप्रैल 2023 से फरवरी 2025 तक मांडवी-सूरत में ट्राइबल एरिया सब प्लान की प्रोजेक्ट एडमिनिस्ट्रेटर भी रहीं.

नगर निगम में डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर 

निधि सिवाच वर्तमान में सूरत म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन में डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर के पद पर तैनात हैं.सूरत नगर निगम में उनका पद डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर (डेपुटेशन)दर्ज है.सूरत नगर निगम में वह ईस्ट जोन-बी की डिप्टी म्यूनिसिपल कमिश्नर और जोनल चीफ के तौर पर भी दर्ज हैं.यानी जिस सफर की शुरुआत एक मैकेनिकल इंजीनियरिंग ग्रेजुएट के तौर पर हुई थी वह अब गुजरात प्रशासन में कई जिम्मेदारियां निभाने तक पहुंच चुका है.



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