Government Borrowing FY27: सरकार 7.86 लाख करोड़ उधार लेगी, लेकिन क्‍यों अभी भी कम?

Government Borrowing FY27: सरकार 7.86 लाख करोड़ उधार लेगी, लेकिन क्‍यों अभी भी कम?


केंद्र सरकार वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में बाजार से ₹7.86 लाख करोड़ उधार लेने जा रही है. वित्त मंत्रालय ने 25 सितंबर को इसका पूरा प्लान जारी किया है. इस रकम में ₹15,000 करोड़ सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड के जरिए जुटाए जाएंगे. खास बात यह है कि पूरे वित्त वर्ष में सरकार का बाजार से कुल उधार करीब ₹16 लाख करोड़ रहने वाला है, जो बजट में लगाए गए ₹17.20 लाख करोड़ के अनुमान से करीब ₹1.20 लाख करोड़ कम है.

सरकार अक्टूबर से मार्च के बीच 23 साप्ताहिक नीलामियों के जरिए ₹7.86 लाख करोड़ जुटाएगी. इसके लिए 3 साल से लेकर 50 साल तक की अवधि वाली अलग-अलग सरकारी प्रतिभूतियां जारी की जाएंगी. इनमें 3, 5, 7, 10, 15, 30, 40 और 50 साल की मैच्योरिटी वाली सिक्योरिटीज शामिल हैं. यानी सरकार अपनी जरूरत के हिसाब से छोटी और लंबी अवधि दोनों तरह के कर्ज लेगी.

सबसे ज्यादा उधार 10 साल वाले बॉन्ड से

दूसरी छमाही के उधार में सबसे बड़ा हिस्सा 10 साल की मैच्योरिटी वाली सरकारी सिक्योरिटीज का होगा. कुल उधार का 26.3% इसी से जुटाया जाएगा. इसके बाद 15 साल वाले बॉन्ड की हिस्सेदारी 17.6% होगी. 5 साल की सिक्योरिटीज से 12.1% और 3 साल वाली सिक्योरिटीज से 6.9% रकम जुटाई जाएगी. वहीं 30, 40 और 50 साल की अवधि वाले बॉन्ड से क्रमशः 9.2%, 8.9% और 9.9% उधार लिया जाएगा.

पूरे साल का उधार बजट से ₹1.20 लाख करोड़ कम

यहां सबसे अहम बात पूरे वित्त वर्ष के आंकड़े की है. FY27 के बजट में केंद्र सरकार ने बाजार से ₹17.20 लाख करोड़ उधार लेने का अनुमान लगाया था. अब जारी प्लान के मुताबिक यह रकम करीब ₹16 लाख करोड़ रहने वाली है. यानी सरकार के बाजार से उधार लेने का कार्यक्रम बजट अनुमान से करीब ₹1.20 लाख करोड़ कम है. यह कमी सरकार की व्यापक वित्तीय समेकन यानी फिस्कल कंसॉलिडेशन की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत है.

सरकार कम कर्ज क्यों ले रही है?

FY27 में सरकार ने राजकोषीय घाटे यानी फ‍िस्‍कल डेफ‍िसिट को GDP के 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा है. सरकार की कर्ज रणनीति भी केंद्रीय सरकार के कर्ज को धीरे-धीरे नीचे लाने की दिशा में बनाई गई है. बाजार से कम उधार लेने का मतलब यह है कि सरकार अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए कर्ज पर पहले के अनुमान की तुलना में कुछ कम निर्भर रहेगी. इससे सरकार की कुल देनदारी को लंबे समय में नियंत्रित रखने की रणनीति को भी समर्थन मिलता है.

पुराने कर्ज का बोझ भी संभालेगी सरकार

सरकार सिर्फ नया कर्ज लेने तक सीमित नहीं रहेगी. पुराने सरकारी बॉन्ड की मैच्योरिटी को व्यवस्थित करने के लिए स्विचिंग और बायबैक ऑपरेशन भी जारी रहेंगे. इसका मकसद एक साथ बहुत ज्यादा रकम की अदायगी का दबाव कम करना है. इसके अलावा सरकार ने ग्रीनशू ऑप्शन भी बरकरार रखा है. इसके तहत नीलामी में बताई गई प्रत्येक सिक्योरिटी के मुकाबले जरूरत पड़ने पर ₹2,000 करोड़ तक की अतिरिक्त सब्सक्रिप्शन स्वीकार की जा सकती है.

Treasury Bills से भी ₹23,000 करोड़ हर हफ्ते

सरकार की छोटी अवधि की जरूरतों के लिए Treasury Bills यानी T-Bills का भी इस्तेमाल होगा. वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही में सरकार 13 नीलामी हफ्तों के दौरान हर सप्ताह ₹23,000 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है. इसमें 91 दिन और 182 दिन वाले T-Bills से ₹8,000-₹8,000 करोड़, जबकि 364 दिन वाले T-Bills से ₹7,000 करोड़ जुटाए जाएंगे.

खाते में अचानक पैसे की कमी हुई तो क्या होगा?

सरकार के खाते में कभी-कभी ऐसी स्थिति आ सकती है जब किसी समय भुगतान ज्यादा हो और उपलब्ध नकदी कम. ऐसी अस्थायी कमी को संभालने के लिए RBI की Ways and Means Advances यानी WMA सुविधा होती है. FY27 की दूसरी छमाही के लिए RBI ने WMA की सीमा ₹50,000 करोड़ तय की है. इसके जरिए सरकार अस्थायी नकदी जरूरत पूरी कर सकती है और बाद में रकम वापस कर सकती है.

RBI से सलाह के बाद तय हुआ पूरा प्लान

सरकार का यह पूरा उधारी कार्यक्रम RBI के साथ सलाह-मशविरा करके तैयार किया गया है. इसमें बाजार से कितनी रकम कब उठानी है, किस अवधि के बॉन्ड जारी करने हैं और छोटी अवधि की जरूरतों के लिए T-Bills का कितना इस्तेमाल करना है, इसका पूरा खाका शामिल है. सबसे बड़ी बात यह है कि दूसरी छमाही में ₹7.86 लाख करोड़ की उधारी के बावजूद पूरे साल का बाजार उधार बजट में अनुमानित ₹17.20 लाख करोड़ से कम रहने वाला है.



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