ECI-SIR Row: ईएसआई यानी चुनाव आयोग में मतभेद विवाद पर सियासी घमासान है. इस बीच सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. इस याचिका में सीईसी यानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की गई है. यह मांग वोटर लिस्ट के एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिविजन से जुड़े कानूनी कर्तव्यों के कथित उल्लंघन को लेकर की गई है. गौरतलब है कि इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट आने के बाद से ही ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठ रहे हैं.
लाइव लॉ के मुताबिक, एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह याचिका दाखिल की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि एसआईआर से जुड़े मामलों में ज्ञानेश कुमार ने अपने वैधानिक कर्तव्यों का कथित तौर पर उल्लंघन किया. याचिका में यह भी मांग की गई है कि ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों, जारी दिशा-निर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को असंवैधानिक और शून्य घोषित किया जाए.
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद दाखिल हुई है, जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 मौकों पर आपत्ति दर्ज की थी. इनमें फॉर्म 6 में बदलाव और मतदाता सूची के डेटा के प्रबंधन से जुड़े फैसले भी शामिल थे. रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ आपत्तियां ऐसे फैसलों को लेकर थीं, जो कथित तौर पर दोनों चुनाव आयुक्तों की जानकारी के बिना या उनकी सिफारिशों के खिलाफ लिए गए थे.
याचिका में RP एक्ट के तहत ज्ञानेश कुमार पर केस चलाने की मांग
याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से सक्षम अधिकारी को निर्देश देने की मांग की है कि वे शिकायतें दर्ज करें और ‘रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट 1950’ (जन प्रतिनिधित्व अधिनियम) की धारा 32 के तहत ज्ञानेश कुमार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना और आधिकारिक कर्तव्य के कथित उल्लंघन के लिए ज़िम्मेदार पाए गए अन्य अधिकारियों के ख़िलाफ़ मुक़दमा शुरू करें. यह याचिका धारा 32 पर आधारित है, जो वोटर लिस्ट तैयार करने, उसमें संशोधन या सुधार करने से जुड़े आधिकारिक कर्तव्यों के उल्लंघन के लिए सजा का प्रावधान करती है.
याचिकाकर्ता का आरोप है कि जिन कार्यों की शिकायत की गई है, उनमें फॉर्म 6 में कथित अनधिकृत बदलाव, वोटर लिस्ट डेटाबेस का केंद्रीकरण, ECINet सिस्टम के जरिए योग्य वोटरों को बहाल करने में विफलता और पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के नाम पर कथित तौर पर वोटरों को शामिल करने को चुनौती देने वाली 16.10 लाख अपीलें दायर करना शामिल है.
बहुमत की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को रद्द करने की मांग
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में चुनाव आयोग की पूरी सहमति के बिना शुरू किए गए, मंजूर किए गए या लागू किए गए सभी फैसलों, दिशा-निर्देशों, आदेशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को असंवैधानिक, अधिकार क्षेत्र से बाहर और शुरुआत से ही अमान्य घोषित किया जाए. याचिका में यह भी कहा गया है कि जिन फैसलों पर चुनाव आयुक्तों के बहुमत की राय अलग थी, उन्हें भी रद्द किया जाना चाहिए.
याचिकाकर्ता ने इसके लिए ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023’ की धारा 18 का हवाला दिया है. इस प्रावधान के मुताबिक, अगर मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर मतभेद होता है, तो फैसला बहुमत की राय के आधार पर किया जाना चाहिए. याचिका के मुताबिक, मई 2026 में चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने फॉर्म 6 में बदलाव पर आपत्ति जताई थी.