भोपाल. मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों के लिए 6वां वेतनमान मिलने का रास्ता साफ हो गया है. जबलपुर हाईकोर्ट ने शिक्षकों को 2006 से छठवां वेतनमान देने के मामले में सरकार को आदेश लागू करने के लिए 4 सप्ताह की आखिरी मोहलत दी है. इससे पहले हाईकोर्ट शिक्षकों के पक्ष में फैसला दे चुका था, लेकिन सरकार की ओर से आदेश का पालन नहीं किया गया था. यह आदेश जस्टिस दीपक खोट की अध्यक्षता वाली बेंच ने अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया. कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 21 अक्टूबर की तारीख तय की. याचिकाकर्ता राजेश कुमार पांडे और अन्य शिक्षकों ने बताया कि उनकी नियुक्ति शुरू में पंचायत विभाग में हुई थी.
याचिकाकर्ता राजेश कुमार पांडे और अन्य शिक्षकों ने बताया कि उनकी नियुक्ति शुरू में पंचायत विभाग में हुई थी. उनकी सेवाओं को 2006 में ‘अध्यापक’ कैडर में और बाद में 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग में मिला दिया गया था. राज्य सरकार ने 2016 में एक सर्कुलर जारी करके उन्हें छठे वेतन आयोग का लाभ दिया था. शिक्षकों ने इन लाभों से वंचित किए जाने को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर और इंदौर बेंच के सामने चुनौती दी थी. कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वे नियुक्ति की तारीख से वेतन, वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और पेंशन से जुड़े लाभ दें. इसके बाद राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) के ज़रिए चुनौती दी थी.
SLP को 24 अगस्त को खारिज कर दिया गया. हाई कोर्ट के पिछले आदेश को लागू करने की मांग वाली अवमानना याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान, राज्य सरकार के वकील ने आदेश का पालन करने के लिए और समय मांगा. हाई कोर्ट ने सरकार को आदेश लागू करने के लिए चार हफ़्ते का समय दिया. याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील जितेंद्र आर्य ने बताया कि 450 से ज़्यादा शिक्षकों ने अवमानना याचिका दायर की थी. उन्होंने कहा कि इस ताज़ा आदेश से लगभग 70000 स्कूल शिक्षकों के लिए ज़्यादा वेतन और उससे जुड़े लाभ पाने का रास्ता साफ़ हो गया है.
10 साल का एरियर भी मिलेगा
मामले में शिक्षकों को छठवां वेतनमान मिलने के साथ करीब 10 साल के एरियर का लाभ भी मिल सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2006 से 2016 के बीच के वेतन अंतर का एरियर दिए जाने की बात सामने आई है. इसके अलावा 2018 में लागू हुए वेतनमान का वार्षिक लाभ भी शिक्षकों को मिलने की संभावना है.
497 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
यह मामला 2006 से चले आ रहे वेतनमान से जुड़ा है. उस समय शिक्षकर्मी योजना के तहत मूल वेतनमान 800 से 2000 रुपये था. बाद में 2007 में अध्यापक संवर्ग बनाया गया और पांचवां वेतनमान लागू हुआ, जो 2016 तक चला. फिर साल 2018 में अध्यापक कैटेगरी के शिक्षकों का स्कूल शिक्षा विभाग में मिला दिया था. उस समय भी पहले की सैलरी और शिक्षकों की सीनियरिटी को लेकर विवाद हुआ था. इसी मामले में करीब 497 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. हाईककोर्ट ने शिक्षकों की नियमित नियुक्ति से सेवा मान्य किए जाने का आदेश दिया. इसके बाद 2006 से 2016 तक मिलने वाले छठवें वेतनमान के 10 साल के अंतर का एरियर देने का रास्ता बना.
किसे कितना मिल सकता है फायदा?
6वें वेतनमान के हिसाब से शिक्षकों को पद के अनुसार करीब 6 से 8 लाख रुपये तक का एरियर मिलने का अनुमान है. वहीं, हर महीने वेतन में भी करीब 10 से 25 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है.
अनुमानित वेतन इस तरह बताया गया है:
प्राथमिक शिक्षक: करीब 6 से 7 लाख रुपये एरियर
माध्यमिक शिक्षक: करीब 7 से 8 लाख रुपये एरियर
उच्च माध्यमिक शिक्षक: करीब 8 लाख रुपये से अधिक एरियर
2018 का वार्षिक वेतन लाभ भी जुड़ेगा
1 जुलाई 2018 को नया वेतनमान लागू करते समय शिक्षकों का वेतन वर्ष 2016 के आधार पर तय किया गया था. अब 2006 से गणना होने पर करीब 10 वर्षों का अंतर सामने आएगा. इसके साथ 2018 के वार्षिक वेतन लाभ को भी नए वेतन निर्धारण में शामिल किए जाने की बात है.
रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा वेतन की तुलना में नया अनुमानित वेतन 15-35 हजार रुपए तक बढ़कर मिल सकता हैः
- प्राथमिक शिक्षकों के लिए करीब 95 हजार से 1 लाख रुपये
- माध्यमिक शिक्षकों के लिए करीब 1.10 लाख रुपये
- उच्च माध्यमिक शिक्षकों के लिए करीब 1.20 से 1.25 लाख रुपये तक हो सकता है
अब हाईकोर्ट की ओर से सरकार को दी गई चार सप्ताह की अंतिम मोहलत के बाद शिक्षकों को आदेश के अमल और बकाया भुगतान का इंतजार है.