वकील ने खूब गिनाए संविधान के नियम, पर CJI सूर्यकांत ने एक न सुनी, जानें मामला
Agency:एजेंसियां
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सुप्रीम कोर्ट ने अदालत की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी के इस्तेमाल के लिए आयोग गठित करने की जनहित याचिका खारिज कर दी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने साफ किया कि भाषा संबंधी सुधार न्यायिक आदेशों से नहीं थोपे जा सकते. अदालत पहले से ही फैसलों के संक्षिप्त विवरण हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध करा रही है. यह प्रक्रिया प्रशासनिक स्तर पर चरणबद्ध तरीके से लागू हो रही है.
सुप्रीम कोर्ट की ऑफिशियल लैंग्वेज हिंदी? आयोग गठन की याचिका खारिज. (File Photo : PTI)
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही और कामकाज को पूरी तरह हिंदी में संचालित करने की मांग को लेकर याचिका दायर की गई थी. SC ने केंद्र सरकार को आयोग गठित करने का निर्देश देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया. यह याचिका ब्रह्मेश्वर नाथ मिश्रा ने दायर की थी, जिसमें हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने के लिए सिफारिशें जुटाने हेतु विशेष कमेटी की मांग की गई थी. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन जजों की बेंच ने मामले को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसे नीतिगत और भाषाई सुधार किसी न्यायिक आदेश के डंडे से लागू नहीं कराए जा सकते. यह पूरा मसला प्रशासनिक समझ और व्यवस्था का है.
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग बनाने से क्यों किया इनकार?
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि केंद्र सरकार को संविधान के प्रावधानों के तहत आयोग गठित करने का निर्देश दिया जा सकता है. इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए साफ कर दिया कि यह मामला अदालत के आदेश से तय होने वाला नहीं है. पीठ ने दो टूक शब्दों में कहा, ‘ये चीजें अदालत के आदेश से नहीं होतीं. ये सुधारों के हिस्से के रूप में धीरे-धीरे और चरणबद्ध तरीके से होती हैं. हम ऐसे सुधार कर रहे हैं.’ अदालत का मानना था कि किसी न्यायिक फरमान के जरिए पूरे सिस्टम की कामकाजी जुबान को एकदम से नहीं बदला जा सकता.
‘फैसलों में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं को मिल रही है जगह’
भाषा सुधारों को लेकर क्या है सुप्रीम कोर्ट का रोडमैप?
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