बाजार के डिजाइनर कपड़ों से अलग है ये हैंड एंब्रॉयडरी, सुई-धागे से बनाती हैं 52 तरह के पैटर्न

बाजार के डिजाइनर कपड़ों से अलग है ये हैंड एंब्रॉयडरी, सुई-धागे से बनाती हैं 52 तरह के पैटर्न


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Madhubani Hand Embroidery: बिहार के मधुबनी की आराधना देवी सुई-धागे से हाथ की कढ़ाई की ऐसी खूबसूरत कला तैयार करती हैं, जिसमें करीब 52 तरह के डिजाइन और पैटर्न शामिल हैं. उन्होंने यह हुनर अपनी मां से सीखा और अब घर के कामकाज के बाद रुमाल, पर्स, तकिया कवर, साड़ी और बेडशीट समेत कई चीजों पर हाथ से कढ़ाई करती हैं. एक छोटे से रुमाल को तैयार करने में भी करीब 4 से 5 घंटे लग जाते हैं, क्योंकि हर डिजाइन को बारीकी से हाथ से बनाया जाता है. खास बात यह है कि आराधना अपनी बनाई हुई हस्तकला की चीजें लोगों को गिफ्ट करती हैं और खुद घर-घर जाकर महिलाओं को यह कला सिखाने की कोशिश भी कर रही हैं, ताकि वे अपने खाली समय का इस्तेमाल हुनर सीखने और कमाई का जरिया बनाने में कर सकें.

बिहार के मधुबनी की आराधना देवी सुई-धागे से गजब की हस्तकला करती हैं. वह हाथ से सुंदर-सुंदर डिजाइन तैयार करती हैं. खास बात यह है कि उनके यहां जो भी आता है, उसे वह अपनी बनाई हुई चीज गिफ्ट करती हैं. वह सुई-धागे से एप्लिक, सिंधी, मंदिर, फुलर, सीकरी स्टिच और भरवा स्टिच समेत कई तरह के डिजाइन बनाती हैं. उनके पास करीब 52 तरह के डिजाइन हैं. इन डिजाइन से वह रुमाल, पर्स, तकिया कवर और दूसरी चीजें तैयार करती हैं.

एंब्रॉयडरी यानी कढ़ाई को सुई और धागे से कपड़े पर डिजाइन बनाने की कला कहा जाता है. इसमें ऊन और अलग-अलग तरह के धागों का भी इस्तेमाल किया जाता है. कपड़े या दूसरी सामग्री पर सुंदर डिजाइन, पैटर्न और चित्र बनाए जाते हैं. यह एक पुरानी और रचनात्मक कला है. ग्रामीण इलाकों में आज भी कई महिलाएं इस कला को आगे बढ़ा रही हैं. हालांकि, एंब्रॉयडरी का डिजाइन बनाना आसान नहीं होता. इसमें काफी समय और मेहनत लगती है. एक-एक डिजाइन को बहुत बारीकी से तैयार किया जाता है. सुई और धागे की मदद से डिजाइन को फ्रेम पर सेट किया जाता है. इसके बाद धीरे-धीरे कढ़ाई का काम पूरा होता है.

आज बाजार में अलग-अलग तरह के स्टोन और डिजाइन वाले कपड़े आसानी से मिल जाते हैं. लेकिन अगर आप इनसे अलग कुछ पहनना या सीखना चाहते हैं, तो हैंड एंब्रॉयडरी एक अच्छा विकल्प हो सकता है. बिहार में कई तरह की लोककलाएं प्रसिद्ध हैं. इनमें सुई, धागे, ऊन और कैंची से की जाने वाली हैंड एंब्रॉयडरी भी पुरानी पारंपरिक कला है. आराधना के मुताबिक, हैंड एंब्रॉयडरी में करीब 52 तरह के डिजाइन बनाए जाते हैं. वह घरेलू महिलाओं को इस कला से जोड़ने की कोशिश कर रही हैं.

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आराधना का मानना है कि महिलाएं अपने खाली समय का इस्तेमाल इस कला को सीखने में कर सकती हैं. इससे उन्हें अपनी कला दिखाने और कमाई का जरिया बनाने का अवसर भी मिल सकता है. कला को बढ़ावा देने के लिए आराधना लोगों को अपनी बनाई हुई चीजें गिफ्ट करती हैं. वह हैंड एंब्रॉयडरी से बने रुमाल, तकिया कवर और पर्स समेत कई सामान मुफ्त में देती हैं. साथ ही, लोगों को इस कला को सीखने के लिए भी प्रेरित करती हैं

आराधना ने कढ़ाई और बुनाई का काम अपनी मां से सीखा है. अब वह घर के कामकाज के बाद इस कला को समय देती हैं. वह तकिया कवर, रुमाल, कपड़े, साड़ियां और बेडशीट समेत अलग-अलग चीजों पर कढ़ाई करती हैं. उनके घर में बाजार से खरीदे हुए सामान की जगह खुद से तैयार की गई हस्तकला की चीजें ज्यादा नजर आती हैं. इन चीजों की खूबसूरती देखते ही बनती है. हालांकि, इन्हें तैयार करने में काफी समय लगता है. आराधना बताती हैं कि एक छोटा सा रुमाल तैयार करने में भी करीब 4 से 5 घंटे लग जाते हैं. यही वजह है कि हाथ से बनी हस्तकला की चीजों की कीमत बाजार की सामान्य चीजों से अधिक होती है.

आराधना खुद भी लोगों को यह कला सिखाने जाती हैं. वह इसे घर-घर तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं. उनका कहना है कि सुई-धागे और ऊन की मदद से कपड़े के छोटे से टुकड़े का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. उनके डिजाइन में थीम एप्लिक, सिंधी, मंदिर, फुलर, सीकरी स्टिच, भरवा स्टिच, फेदर स्टिच, डबल मंदिर एंब्रॉयडरी, साटन और पैचवर्क जैसे कई पैटर्न शामिल हैं. जरूरत के अनुसार इन डिजाइन को कस्टमाइज भी किया जाता है

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