न सरकारी मदद, न कोई योजना… श्रद्धालुओं के सहयोग से 5 करोड़ का बन रहा मंदिर
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Baba Ramdevji Temple Baswani Dham Nagaur: नागौर के बसवाणी गांव में बाबा रामदेवजी महाराज का करीब 700 साल पुरानी मान्यताओं से जुड़ा धाम अब भव्य रूप ले रहा है. जोधपुर के छीतर पत्थरों से मंदिर का निर्माण करीब आठ साल से जारी है. अनुमानित 5 करोड़ रुपए की लागत वाले इस निर्माण का करीब 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. खास बात यह है कि मंदिर के निर्माण में किसी सरकारी योजना की मदद नहीं ली जा रही, बल्कि ग्रामीणों, श्रद्धालुओं और देश के अलग-अलग शहरों में रहने वाले प्रवासियों के सहयोग से काम आगे बढ़ रहा है. सूरत और हैदराबाद में रहने वाले श्रद्धालुओं ने भी निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग किया है.
नागौर जिले के बसवाणी गांव में स्थित बाबा रामदेवजी महाराज का धाम लोक आस्था और परंपराओं को अपने भीतर समेटे हुए है. करीब 700 साल पुरानी मान्यताओं से जुड़े इस धार्मिक स्थल का अब भव्य स्वरूप तैयार किया जा रहा है. श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के सहयोग से मंदिर का निर्माण लगातार जारी है.
बसवाणी धाम के मंदिर के वर्तमान स्वरूप को जोधपुर के प्रसिद्ध छीतर पत्थरों से तैयार किया जा रहा है. करीब आठ साल पहले शुरू हुए इस निर्माण कार्य पर अनुमानित 5 करोड़ रुपए खर्च होने हैं. अब तक करीब 60 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है. मंदिर की बनावट और पत्थर की कारीगरी इसे अलग पहचान दे रही है.
खास बात यह है कि मंदिर निर्माण के लिए किसी सरकारी योजना का सहारा नहीं लिया गया है. पूरा निर्माण श्रद्धालुओं और ग्रामीणों के सहयोग से कराया जा रहा है. आसपास के गांवों के लोगों के साथ दूर शहरों में रहने वाले प्रवासी भी धाम के निर्माण में सहयोग कर रहे हैं. यही सामूहिक सहभागिता इस निर्माण को खास बनाती है. जानकारी के अनुसार बसवाणी धाम के निर्माण में सूरत और हैदराबाद सहित अन्य स्थानों पर रहने वाले प्रवासी श्रद्धालुओं ने भी आर्थिक सहयोग दिया है.
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ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर का भव्य स्वरूप तैयार होने के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं को और बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी. बसवाणी धाम की पहचान केवल एक मंदिर के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय लोक परंपराओं से जुड़े आस्था केंद्र के रूप में भी है. स्थानीय मान्यताओं और रामदेवरा के भई-भाटों से मिली जानकारी के अनुसार बाबा रामदेवजी महाराज के बसवाणी परिसर में आने की पुरानी परंपरा का उल्लेख मिलता है. इसी वजह से इस स्थान का धार्मिक महत्व श्रद्धालुओं के बीच विशेष माना जाता है.
लोक मान्यताओं के अनुसार बसवाणी परिसर के राजा संग्राम सिंह की पुत्री तारादे के साथ बाबा रामदेवजी महाराज के शुभ विवाह की परंपरा भी इसी परिसर से जुड़ी मानी जाती है. इसी कथा और परंपरा के कारण बसवाणी धाम को बाबा रामदेवजी की जीवन गाथा से जुड़े अहम स्थानों में माना जाता है.
बसवाणी धाम में चल रहा मंदिर निर्माण सिर्फ पत्थरों से इमारत तैयार करने का काम नहीं है, बल्कि ग्रामीणों और प्रवासी श्रद्धालुओं की सामूहिक आस्था से जुड़ा प्रयास है. करीब 5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे मंदिर का 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. निर्माण पूरा होने के बाद धाम का स्वरूप और भव्य होने की उम्मीद है.