मोंगा-पोंगली ने बढ़ाई किसानों की चिंता! धान की फसल बचानी है तो करें ये उपाय
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Gall Midge: बस्तर में धान की खेती प्रमुखता से की जाती है, जहां इन दिनों धान की बालियां निकल रही हैं. हालांकि, किसानों को गॉल मिज नामक बीमारी से बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जो फसल और बालियों को पूरी तरह नष्ट कर देती है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आती है. कीट विशेषज्ञ धरमपाल केरकेट्टा ने इसकी रोकथाम के उपाय बताए हैं.
Gall Midge: बस्तर में धान की खेती प्रमुखता से की जाती है और इन दिनों धान की बालियां निकल रही हैं. हालांकि, किसानों को गॉल मिज नामक बीमारी से बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जो फसल और बालियों को पूरी तरह नष्ट कर देती है, जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आती है.
गॉल मिज का प्रकोप
लोकल 18 की टीम ने कीट विशेषज्ञ धरमपाल केरकेट्टा से गॉल मिज बीमारी की रोकथाम के संबंध में बात की. केरकेट्टा ने बताया कि खरीफ की मुख्य फसल धान है और बस्तर में इसका रकबा सबसे अधिक है. इन दिनों धान में गॉल मिज का प्रकोप देखा जा रहा है, जिसे स्थानीय लोग मोंगा या पोंगली के साथ गंगई भी कहते हैं. यह एक मच्छर जैसा कीट होता है.
पहचान और प्रभाव
केरकेट्टा के अनुसार, यदि खेत में इस कीट की पहचान करनी हो, तो जिस भी धान के पौधे पर इसका आक्रमण होता है, वह प्याज के पौधे की तरह दिखने लगता है. इन लक्षणों से इसे आसानी से पहचाना जा सकता है. इस कीट के कारण उपज 100 प्रतिशत तक घट जाती है, जिससे धान में बालियां नहीं आती हैं.
नियंत्रण के उपाय
किसानों के लिए इस कीट को नियंत्रित करना बेहद आवश्यक है. केरकेट्टा ने बताया कि इस बार वर्षा कम हुई है, लेकिन खेत में अतिरिक्त जलभराव को निकाल देना चाहिए, क्योंकि यह धान के जीवन चक्र को प्रभावित करता है. इसके अलावा, खेत की मेड़ की साफ-सफाई करनी चाहिए और ज्यादा यूरिया का प्रयोग नहीं करना चाहिए. निर्धारित खाद की मात्रा का ही उपयोग करना चाहिए.
रासायनिक उपचार
कीट विशेषज्ञ ने रासायनिक उपचार के तौर पर फिप्रोनिल के उपयोग की सलाह दी. किसान भाई 10 किलो प्रति एकड़ की मात्रा में फिप्रोनिल का उपयोग कर सकते हैं. इसका छिड़काव भी 500 मिलीलीटर प्रति एकड़ की मात्रा से किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त, थायामेथोक्साम का भी उपयोग किया जा सकता है, जो दानेदार रूप में आता है. किसान भाई 40 ग्राम प्रति एकड़ का घोल बनाकर इसका उपयोग कर सकते हैं. यदि संक्रमण अधिक है, तो खेत में 8 से 10 टंकी का स्प्रे करने की सलाह दी गई है.