झीरम घाटी नक्सली हमला: दोषियों को फांसी की सजा होगी या नहीं, अब हाईकोर्ट में होगा तय

झीरम घाटी नक्सली हमला: दोषियों को फांसी की सजा होगी या नहीं, अब हाईकोर्ट में होगा तय


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Jhiram Ghati Attack: झीरम घाटी के हमले में सभी 10 दोषियों को एनआईए कोर्ट की तरफ से फांसी की सजा मिली थी. अब झीरम कांड की पुष्टि के लिए मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है. इसके लिए डेथ रेफरेंस को हाईकोर्ट भेजा गया है. अब हाईकोर्ट में डिवीजन बेंच मामले की न्यायिक समीक्षा करेगी. फिलहाल हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख तय नहीं हुई है.

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हाईकोर्ट पहुंचा झीरम घाटी का मामला

Jhiram Ghati Attack: छत्तीसगढ़ में साल 2013 में झीरम घाटी में नक्सली हमला हुआ था. इस पर जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी. अब इस सजा पर सस्पेंस गहरा गया है, क्योंकि NIA स्पेशल कोर्ट ने मौत की सजा की पुष्टि के लिए मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया है. अब हाईकोर्ट में NIA कोर्ट के फैसले, पेश किए गए सबूतों और दोषसिद्धि के आधार पर मामले की सुनवाई करेगी. बताया जा रहा है कि एनआईए कोर्ट ने डेथ रेफरेंस के रूप में दर्ज किया है. बताया जा रहा है कि हाईकोर्ट में मौत की सजा की पुष्टि या उसमें बदलाव को लेकर फैसला होगा.

कानून के मुताबिक ट्रायल कोर्ट से मौत की सजा सुनाए जाने के बाद मामला हाईकोर्ट भेजा जाता है. ट्रायल कोर्ट से मौत की सजा सजा तक नहीं मिल सकती है, जब तक हाईकोर्ट उसकी पुष्टि नहीं कर देता.

साल 2013 में नक्सलियों ने घात लगाकर किया था हमला
छत्तीसगढ़ में साल 2013 में एक ऐसा नक्सली हमला हुआ था, जिसके जख्त आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं. तब नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया था और इसमें सभी 29 लोगों की मौत हो गई थी. कांग्रेस तब प्रदेश में परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी और उनके काफिले पर ही हमला हुआ था. मारे गए लोगों में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश, विपक्ष के पूर्व नेता महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल और वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे.

घटना के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने मामला दर्ज किया था, लेकिन रमन सिंह के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार ने हमले के दो दिन के भीतर ही जांच एनआईए को सौंप दी थी. राज्य सरकार ने इस घटना की जांच के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में एक न्यायिक आयोग भी बनाया था.

सभी 10 दोषियों को मिली थी सजा
जगदलपुर में एनआईए की विशेष अदालत ने पांच सितंबर को दो महिलाओं समेत सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया था और सजा पर अपना फैसला 16 सितंबर के लिए सुरक्षित रख लिया था. बाद में सभी दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी.



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