खरीफ फसलों पर गुलाबी इल्ली का खतरा! कपास को ज्यादा नुकसान, ऐसे करें पहचान और बचाव

खरीफ फसलों पर गुलाबी इल्ली का खतरा! कपास को ज्यादा नुकसान, ऐसे करें पहचान और बचाव


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खरीफ फसलों पर गुलाबी इल्ली का खतरा! कपास को ज्यादा नुकसान, पहचान और बचाव

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Cotton Crop Pest Control Tips: कृषि वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह ने लोकल 18 से कहा कि गुलाबी इल्ली अन्य कीटों की तरह पौधे की पत्तियों पर खुले तौर पर नुकसान नहीं करती बल्कि यह कपास के फूल और डेंडू के भीतर प्रवेश कर नुकसान पहुंचाती है. यही कारण है कि कई बार किसानों को पौधा ऊपर से सामान्य दिखाई देता है लेकिन अंदर से डेंडू प्रभावित हो चुका होता है.

खरगोन. खरीफ सीजन की फसलें अब अपने अंतिम दौर से गुजर रही हैं लेकिन इसी बीच कीटों का खतरा भी बढ़ने लगा है. खेतों में कपास, सोयाबीन, मक्का सहित अन्य खरीफ फसलें अलग-अलग अवस्था में हैं. वहीं कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय किसानों को खासतौर पर गुलाबी इल्ली की निगरानी बढ़ा देनी चाहिए. इसका सबसे ज्यादा असर कपास की फसल में दिखाई देता है. चूंकि खरगोन जिले में खरीफ सीजन में बड़े रकबे में कपास की बोवनी हुई है. अब कई खेतों में पौधों पर फूल आने लगे हैं और डेंडू बनने के साथ उनमें रुई तैयार होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. फसल की यही अवस्था गुलाबी इल्ली के लिए अनुकूल मानी जाती है. ऐसे में खेत में शुरुआत में ही कीट की पहचान करना जरूरी है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ राजीव सिंह लोकल 18 को बताते हैं कि गुलाबी इल्ली दूसरे कई कीटों की तरह पौधे की पत्तियों पर खुले तौर पर नुकसान नहीं करती, यह कपास के फूल और डेंडू के अंदर प्रवेश कर नुकसान पहुंचाती है. यही वजह है कि कई बार किसान भाइयों को पौधा ऊपर से सामान्य दिखाई देता है लेकिन अंदर से डेंडू प्रभावित हो चुका होता है. क्योंकि इल्ली डेंडू के अंदर कपास के बीज और रेशों को नुकसान पहुंचाती है. इससे डेंडू का विकास ठीक तरह से नहीं हो पाता और रुई की मात्रा प्रभावित होती है. प्रकोप अधिक होने पर कपास का उत्पादन घट सकता है और किसान की लागत पर भी असर पड़ सकता है, इसलिए किसान फसल को केवल बाहर से देखकर संतुष्ट न हों बल्कि फूल और डेंडू की भी जांच करते रहें.

तीन फेरोमोन ट्रैप बताएंगे खतरे का संकेत
विशेषज्ञ के मुताबिक, गुलाबी इल्ली की निगरानी के लिए प्रति एकड़ तीन फेरोमोन ट्रैप लगाएं. यदि किसी एक ट्रैप में लगातार तीन दिनों तक 8 या उससे ज्यादा तितलियां आती हैं, तो इसका मतलब है कि अब फसल में रासायनिक दवाई डालने की जरूरत है. दूसरा तरीका यह है कि किसान एक लाइन में 20 पौधों की बारीकी से जांच करें. यदि 2-3 पौधों के फूल मुरझाए हुए दिखाई दें या पत्तियां सिकुड़ी हुई नजर आएं, तो समझिए गुलाबी इल्ली का अटैक हो चुका है. अगर कोई लक्षण दिखाई नहीं दें, तो दवाई न डालें.

लक्षण मिलने पर ऐसे करें नियंत्रण
डॉ सिंह के अनुसार, गुलाबी इल्ली के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर प्रोफेनोफॉस 400 मिली प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें. इसके 8 से 10 दिन बाद डेल्टामेथ्रिन या प्रोफेनोसायपर का उपयोग करना चाहिए. यदि इसके बावजूद फूल या डेंडू में गुलाबी इल्ली दिखाई दे, तो एमामेक्टिन बेंजोएट 80 ग्राम प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करना चाहिए. दवाई छिड़कने के बाद भी लगातार पौधों की निगरानी कुछ दिनों तक करते रहनी चाहिए.



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