मुरादाबाद: मुरादाबाद के किसान मशरूम की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. मशरूम की खेती कम जगह और कम लागत में बेहतर मुनाफा देने वाला व्यवसाय है. इसके लिए खेत की आवश्यकता नहीं होती, इसे एक बंद और अंधेरे कमरे में भी आसानी से उगाया जा सकता है. मुख्य रूप से तीन प्रकार के मशरूम उगाए जाते हैं. बटन मशरूम सर्दियों में, ऑयस्टर यानी ढिंगरी मशरूम सामान्य तापमान में और मिल्की मशरूम गर्मियों में उगाया जाता है. शुरुआती स्तर पर ऑयस्टर मशरूम से शुरुआत करना सबसे आसान माना जाता है.
इस विधि से कर सकते हैं मशरूम की खेती
कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदी रत्ता ने बताया कि अगर आप मशरूम की खेती करना चाहते हैं तो बटन मशरूम की खेती कर सकते हैं. बटन मशरूम की खेती सामान्य वातावरण में करने के लिए सबसे पहले इसकी कंपोस्ट तैयार करनी पड़ती है. कंपोस्ट बनाने के लिए भूसा, यूरिया, कैल्शियम, अमोनियम नाइट्रेट, शीरा और चौकर जैसी चीजों की जरूरत होती है.
सबसे पहले इन सभी चीजों को मिलाकर कंपोस्ट तैयार की जाती है. कंपोस्ट को हर चार दिन के बाद पलटाई करनी पड़ती है. इस तरह सात बार पलटाई करने के बाद करीब एक महीने में कंपोस्ट तैयार हो जाती है. कंपोस्ट तैयार होने के बाद इसे पॉलीथीन बैग या ट्रे में लगाया जा सकता है. कंपोस्ट बनाते समय तापमान 25 से 32 डिग्री तक होना चाहिए.
अंधेरे में उगाई जाती है मशरूम
मशरूम अंधेरे में उगाई जाती है. इसलिए ट्रे या पॉलीथीन बैग को एक अंधेरे कमरे में रख दिया जाता है. करीब 15 दिन के अंदर इसमें सफेद धब्बे यानी स्पॉन निकलने लगते हैं. इसके बाद इसके ऊपर केसिंग सॉइल डाली जाती है.
केसिंग सॉइल एक आवरण मिट्टी होती है, जिसमें कोई पोषक तत्व नहीं होना चाहिए. इसके लिए तीन साल पुरानी गोबर की खाद, कोकोपीट या रेत मिली पुरानी खाद का इस्तेमाल किया जा सकता है. आवरण मिट्टी डालने के 10 से 15 दिन बाद इसके ऊपर से मशरूम निकलनी शुरू हो जाती है.
जब मशरूम बढ़ रही होती है तब तापमान 22 से 25 डिग्री होना चाहिए. वहीं, कटाई के समय तापमान 12 से 18 डिग्री सेंटीग्रेड होना चाहिए. जब मशरूम तैयार हो जाती है तो उसके ऊपर बटन जैसी टोपी बन जाती है.
एक क्विंटल कंपोस्ट से मिल सकती है 30 किलो तक मशरूम
मशरूम को तोड़ने के लिए इसे हल्के हाथ से ट्विस्ट करके तोड़ा जाता है. ट्रे में ऊपर वाले मशरूम पहले आते हैं और उसके बाद नीचे वाले मशरूम निकलते रहते हैं. अगर एक क्विंटल कंपोस्ट तैयार की जाती है तो उससे करीब 20 से 30 किलो तक मशरूम प्राप्त हो सकती है.
मशरूम पर थोड़ी कंपोस्ट लगी रह जाती है. इसलिए इसे पानी से धोकर साफ कर लिया जाता है और फिर 200 ग्राम के पैकेट बनाकर बाजार में बेचा जा सकता है. इस मशरूम का अचार भी बनाया जा सकता है. यह मशरूम प्रोटीन से भरपूर होती है और बाजार में इसकी काफी मांग रहती है.
खेत के बिना भी कर सकते हैं मशरूम की खेती
कृषि वैज्ञानिक के मुताबिक, किसान अगस्त, सितंबर और अक्टूबर के महीने में कंपोस्ट तैयार कर सकते हैं. कई जगह विश्वविद्यालयों और प्राइवेट कंपनियों से भी बनी-बनाई कंपोस्ट मिल जाती है. इसकी खेती के लिए खेत की जरूरत नहीं होती. इसके लिए छप्परनुमा घर या कोई खाली कमरा भी इस्तेमाल किया जा सकता है. बस कमरे में हवा का आवागमन होना चाहिए और सीधी रोशनी नहीं आनी चाहिए.