कभी इंसान बनता था आत्मघाती मिसाइल, अब नन्हे हथियार से तबाही… CDS ने क्यों की यूक्रेन से सीखने की बात?

कभी इंसान बनता था आत्मघाती मिसाइल, अब नन्हे हथियार से तबाही… CDS ने क्यों की यूक्रेन से सीखने की बात?


दूसरे विश्वयुद्ध का वो दौर था, जब जापान अपनी पूरी आक्रामकता के साथ अलाइड पॉवर पर भारी पड़ता था. युद्ध के अंतिम दिनों में जापान ने अमेरिका और मित्र देशों के जंगी बेड़े के खिलाफ सुसाइड मिशन लॉन्च कर दिया था. हवा में कामिकाजे विमान से लेकर समुद्र में टॉरपीडो अटैक तक शुरू कर दिया. ये मैन्ड यानी कि मानव संचालित था. इसका मतलब यह कि ये अटैक करने के बाद वापस लौटने के लिए बनाए ही नहीं गए थे, बल्कि इसमें खुद जापानी सैनिक बैठकर दुश्मन के टार्गेट जहाज को निशाना बनाया करता था. जापानियों के इस आत्मघाती मिशन ने अमेरिकी खेमे को परेशान कर डाला. लेकिन अब युद्ध की तकनीक बदल गई है. बिना इंसान के ही ड्रोन और सबमरीन दुश्मन को टार्गेट करके तबाह कर देते हैं. यूक्रेन और रूस की जंग में भी यह तकनीक देखने को मिली है. आज चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने इस सिस्टम से सीखने की जरूरत पर फोकस रखने की सलाह दी है.

भारत के सीडीएस जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने न्यूज 18 के DEFCON 2026 प्रोग्राम में मौजूदा दौर की चुनौतियों और जंग के मैदान में तैयारी को लेकर यूक्रेन का उदाहरण दिया. उन्होंने यूक्रेन से सीखने की बात कही है. उन्होंने अनमैन्ड सर्फेस वेसल (USV) और अनमैन्ड अंडरवाटर वेसल (UUV) का जिक्र किया. सुब्रामणि ने कहा कि हमें देखने को मिला है कि यूक्रेन ने कैसे USV और UUV का इस्तेमाल करते हुए रूस की पूरी ब्लैक सी फ्लीट यानी कि नौसेना को तबाह कर डाला. एक तरफ रूस और यूक्रेन, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका और ईरान की जंग में भी इसका साक्षात उदाहरण देखने को मिला.

क्या है USV?
USV यानी Unmanned Surface Vessel ऐसी नाव होती है जिसे उसमें किसी चालक या क्रू के बैठने की जरूरत नहीं होती. इसे दूर से कंट्रोल किया जा सकता है या इसके कुछ मॉडल ऑटोनॉमस तरीके से भी रास्ता तय कर सकते हैं. इस तरह के एकतरफा हमले वाले समुद्री ड्रोन को अक्सर कामिकाजे या सुसाइड ड्रोन बोट कहा जाता है. वजह यह है कि हथियार से लदी नाव को लक्ष्य की तरफ भेजा जाता है और लक्ष्य से टकराने या उसके पास पहुंचने पर विस्फोट किया जाता है. इसमें किसी सैनिक को नाव के अंदर बैठने की जरूरत नहीं होती है.

ड्रोन का महत्व सिर्फ उनके हथियार होने में नहीं है. लंबी दूरी के कम लागत वाले ड्रोन, क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ मिलकर एक साथ बड़ी संख्या में भेजे जा सकते हैं. इससे विरोधी को एक साथ कई दिशाओं से आने वाले खतरों की पहचान और उन्हें रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल करना पड़ता है.यही वजह है कि यूक्रेन-रूस युद्ध और ईरान-इजरायल संघर्ष में ड्रोन युद्ध की बदलती तस्वीर का उदाहरण बने हैं. एक तरफ यूक्रेन ने समुद्र की सतह पर चलने वाले USV और पानी के नीचे जाने वाले UUV का इस्तेमाल किया, वहीं ईरान ने लंबी दूरी के एकतरफा हमला करने वाले UAV और मिसाइलों को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है.

आत्मघाती से लेकर मॉडर्न वार टेक्निक (AI से इमेज)

ईरान का 2024 वाला हमला
2024 के अप्रैल में ईरान ने इजरायल की ओर 300 से ज्यादा ड्रोन और मिसाइलें लॉन्च कीं. इनमें करीब 170 ड्रोन, 30 से ज्यादा क्रूज मिसाइल और 120 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइल शामिल थीं. ईरान के ड्रोन मुख्य रूप से एकतरफा हमला करने वाले UAV थे. इन्हें लंबी दूरी तक उड़ाकर लक्ष्य की दिशा में भेजा जाता है और लक्ष्य के पास पहुंचने पर विस्फोट करने के लिए डिजाइन किया जाता है. इजरायली सेना के अनुसार करीब 170 UAV लॉन्च किए गए थे और इनमें से कोई भी इजरायली क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पाया.

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ किया यूज
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ जुलाई में इसका यूज किया था. 12 जुलाई 2026 को अमेरिकी बलों ने बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे की ओर तीन Corsair USV भेजे. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, वनवे अटैक सर्फेस ड्रोन थे यानी इन्हें हमले के बाद वापस लौटने के लिए नहीं बनाया गया था. अमेरिकी सेना ने जारी वीडियो में इन समुद्री ड्रोन को ईरानी नौसैनिक सुविधा की ओर बढ़ते और फिर विस्फोट करते दिखाया. हमले में एक ईरानी Ghadir-class midget submarine को निशाना बनाया गया था.

UUV क्या है?
Unmanned Underwater Vehicles यानी UUV को आमतौर पर अंडरवाटर ड्रोन या रोबोटिक पनडुब्बी भी कहा जाता है. समुद्र के अंदर बिना किसी इंसानी चालक के काम करने वाली आधुनिक मशीनें हैं. इनकी कहानी शुरुआती वैज्ञानिक प्रयोगों से शुरू होकर आज आधुनिक सैन्य रणनीतियों और समुद्री खोजों का मुख्य हिस्सा बन चुकी है. 1970 और 80 के दशक में दुनिया भर की नौसेनाओं खासकर अमेरिका और सोवियत संघ ने इसका महत्व समझा. समुद्र के नीचे छिपी दुश्मन की बारूदी सुरंगों का पता लगाने, जासूसी करने और दुश्मन की पनडुब्बियों पर नजर रखने के लिए इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा.

यूक्रेन ने बनाया रूस को निशाना
यूक्रेन ने दिसंबर 2025 में रूस के नोवोरोस्सिय्स्क नौसैनिक अड्डे पर एक बेहद असामान्य हमला किया. यूक्रेन की सुरक्षा सेवा (SBU) के मुताबिक, ‘Sub Sea Baby’ नाम के मानवरहित अंडरवॉटर ड्रोन (UUV) ने बंदरगाह में खड़ी रूसी Kilo-क्लास पनडुब्बी को निशाना बनाया. यूक्रेन ने दावा किया कि विस्फोट से पनडुब्बी को गंभीर नुकसान हुआ और वह अभियान के लिए इस्तेमाल किए जाने की स्थिति में नहीं रही. रूस ने हालांकि इस दावे को खारिज किया और कहा कि पनडुब्बी को नुकसान नहीं हुआ. 14-15 दिसंबर 2025 की रात हुए इस हमले में यूक्रेनी बलों ने पहली बार पानी के नीचे चलने वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रूसी नौसैनिक ठिकाने में खड़ी पनडुब्बी को निशाना बनाने का दावा किया.

CDS ने और क्या कहा?
हमें केवल कुछ प्रोटोटाइप या सीमित संख्या में प्रोडक्ट बनाने वाली इंडस्ट्री नहीं चाहिए. हमें ऐसे इंडस्ट्रियल स्ट्रक्चर की जरूरत है जो प्रोडक्शन लाइन, जरूरी टूलिंग, सप्लाई चेन, इन्वेंट्री और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन की क्षमता को डेवलप कर सके. मिलिट्री इनोवेशन भी अब बदल रहा है. टेस्टिंग की प्रक्रिया तेज करते हुए लगातार प्रयोग और सुधार भी सैन्य टेक्निक के विकास का हिस्सा होना चाहिए.

हमें ऐसी कंपनियों की जरूरत है जो जरूरत पड़ने पर 10 सिस्टम से 100 और 100 से 1000 सिस्टम तक प्रोडक्शन को बढ़ा सकें. रणनीतिक परिस्थितियों की मांग के अनुसार यही क्षमता आगे और भी बड़े पैमाने तक ले जानी होगी. आधुनिक युद्ध में तेजी से बदलती तकनीक के बीच बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण हो गई है.

डिफेंस सेक्टर में फोर्स प्रोटेक्शन यानी सैनिकों और सैन्य संसाधनों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है. इसके लिए प्रभावी काउंटर सिस्टम विकसित करने होंगे. इस सेक्टर में हमें ऐसी क्षमताएं विकसित करनी होंगी जो कम लागत पर तैयार हों और जिन्हें तेजी से बड़े पैमाने पर तैनात किया जा सके. इनमें सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक लंबी दूरी के प्रभावों या खतरों की पूर्वानुमान क्षमता है.



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