पलामू के किसान ध्यान दें! इस समय खेत में लगा दें स्ट्रॉबेरी, 4 लाख तक मुनाफा
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Palamu Strawberry Farming Tips: झारखंड के पलामू में स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है. यह 5 महीने की फसल सर्दियों में अच्छी बढ़ती है. स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए सितंबर से अक्टूबर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है. किसान सामान्य तौर पर 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच पौधों की रोपाई की तैयारी कर सकते हैं. किसान एक एकड़ से तीन से चार लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं.
पलामू: झारखण्ड का पलामू जिला जिसके जैसे क्षेत्र में जहां किसानों को अक्सर सूखे और अनियमित बारिश की चुनौती का सामना करना पड़ता है. वहां स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए आय का बेहतर विकल्प बन सकती है. खासकर जिन किसानों के पास बलुई दोमट से लेकर दोमट मिट्टी वाली जमीन है. वे इसकी खेती कर सकते हैं. बाजार में अच्छी मांग और सामान्य फसलों की तुलना में बेहतर मूल्य मिलने के कारण स्ट्रॉबेरी किसानों को अतिरिक्त आमदनी का अवसर देती है.
पोषक तत्वों से भरपूर फल
पलामू जिले के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र चियांकी के कृषि वैज्ञानिक प्रमोद कुमार ने बताया कि स्ट्रॉबेरी स्वाद में खट्टी-मीठी होने के साथ पोषक तत्वों से भरपूर फल है. इसमें विटामिन सी के साथ अन्य विटामिन और खनिज तत्व पाए जाते हैं. इसमें एंटीऑक्सीडेंट यौगिक भी होते हैं. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है. ताजा फल के अलावा इसका इस्तेमाल जूस, शेक, जैम और कई अन्य खाद्य पदार्थों में भी किया जाता है.
टिशू कल्चर से तैयार पौधे
आगे कहा कि स्ट्रॉबेरी की सफल खेती के लिए गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री का चयन बेहद जरूरी है. किसान टिशू कल्चर लैबोरेटरी या विश्वसनीय स्रोत से तैयार पौधे लेकर खेती कर सकते हैं. पौधों को तैयार किए गए रिज बेड पर लगाया जाता है. खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था जरूरी होती है, क्योंकि खेत में पानी जमा होने से पौधों को नुकसान हो सकता है.
सितंबर-अक्टूबर में करें रोपाई
उन्होंने बताया कि पलामू के मौसम को देखते हुए स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए सितंबर से अक्टूबर का समय महत्वपूर्ण माना जाता है. किसान सामान्य तौर पर 15 सितंबर से 15 अक्टूबर के बीच पौधों की रोपाई की तैयारी कर सकते हैं. सर्दियों के मौसम में इसका विकास बेहतर तरीके से होता है. यह करीब पांच महीने की फसल मानी जाती है, इसलिए किसान समय पर खेत की तैयारी और पौधों की देखभाल शुरू कर सकते हैं.
एक एकड़ में बेहतर कमाई का अवसर
बता दें कि स्ट्रॉबेरी की खेती में पौध, बेड तैयार करने, मल्चिंग, सिंचाई, खाद और देखभाल पर खर्च आता है. खेती की लागत बाजार भाव, उत्पादन और प्रबंधन के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. उचित प्रबंधन और अच्छे बाजार भाव मिलने पर किसान एक एकड़ से तीन से चार लाख रुपये तक शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं. जिसके लिए मार्केटिंग का अच्छा प्लेटफॉर्म भी मिल जाता है.
खेती से पहले बाजार की जानकारी जरूरी
बता दें कि स्ट्रॉबेरी जल्दी खराब होने वाला फल है, इसलिए खेती शुरू करने से पहले किसानों को बाजार और बिक्री की व्यवस्था की जानकारी कर लेनी चाहिए. स्थानीय बाजार के साथ बड़े शहरों के फल बाजार, होटल, रेस्टोरेंट और प्रोसेसिंग इकाइयों में भी इसकी बिक्री की संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं.