Share Market Down Reason: एक दिन में सेंसेक्स 1248 अंक टूटा, निफ्टी 5 महीने के निचले स्तर पर… सुबह से शाम तक की पूरी कहानी

Share Market Down Reason: एक दिन में सेंसेक्स 1248 अंक टूटा, निफ्टी 5 महीने के निचले स्तर पर… सुबह से शाम तक की पूरी कहानी


गुरुवार, 24 सितंबर की सुबह 9:15 बजे शेयर बाजार खुला, तो निवेशकों के सामने पहले से ही कई चिंताएं खड़ी थीं. अमेरिका में सरकारी बॉन्ड की यील्ड ऊपर चढ़ रही थी, क्रूड ऑयल फिर महंगा हो रहा था और ऊपर से बीमा कंपनियों व पॉलिसी बेचने वाले कारोबार के लिए आईआरडीएआई का नया प्रस्ताव आ चुका था. दिन की शुरुआत में सवाल यही था कि बाजार इन खबरों को कितना गंभीर मानेगा. फ‍िर तबाही शुरू हुई और शाम 3:30 बजे तक निफ्टी के 50 में से 48 शेयर गिरकर बंद हुए.

बंद होते-होते सेंसेक्स 1,248 पॉइंट टूटकर 73,581 पर और निफ्टी 384 पॉइंट गिरकर 23,063 पर आ गया. निफ्टी 23,100 के नीचे बंद हुआ. यह पिछले पांच महीनों का उसका सबसे निचला क्लोजिंग स्तर था. यानी गिरावट किसी एक बड़े शेयर की वजह से स्क्रीन पर दिख रही लाल संख्या भर नहीं थी. बिकवाली पूरे बाजार में फैल चुकी थी.

सुबह बाहर की खबरों ने बाजार का मूड बिगाड़ा

बाजार खुलने से पहले विदेश से आ रहे संकेत कमजोर थे. अमेरिका के 10 साल वाले सरकारी बॉन्ड की यील्ड 2007 के बाद के ऊंचे स्तरों तक पहुंच गई थी और अमेरिकी शेयरों में भी बिकवाली हुई थी. बॉन्ड यील्ड को आसान भाषा में सरकार को उधार देने पर बाजार में मिलने वाला रिटर्न समझिए. जब अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर ही ज्यादा रिटर्न मिलने लगे, तो भारत जैसे बाजारों में शेयर रखने वाले विदेशी निवेशक अपने फैसले फिर से तौलते हैं.

तेल भी चिंता बढ़ा रहा था. इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने पर बाजार को कुछ राहत मिली थी. अब भाव फिर 106 डॉलर के आसपास पहुंचने लगा. भारत तेल का बड़ा हिस्सा बाहर से खरीदता है. इसलिए तेल महंगा होने का मतलब कंपनियों के खर्च और देश के इंपोर्ट बिल पर दबाव की आशंका है. अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में ठोस प्रगति न दिखने से तेल की सप्लाई को लेकर डर बना हुआ था.
इन खबरों के बीच शेयर बाजार ने कमजोर शुरुआत की. सुबह 10:26 बजे तक सेंसेक्स 700 पॉइंट से ज्यादा गिर चुका था और निफ्टी 23,200 के आसपास पहुंच गया था. दिन की शुरुआत में ही निवेशकों को संकेत मिल गया कि खरीदारी के भरोसे से ज्यादा बेचने की जल्दी दिखाई दे रही है.

दोपहर में बीमा के प्रस्ताव ने फाइनेंशियल शेयरों को हिलाया

फिर नजर घरेलू खबर पर टिक गई. बीमा रेगुलेटर आईआरडीएआई ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन, यानी लोगों तक पॉलिसी बेचने के तरीके और उससे जुड़ी कमाई पर बदलाव का प्रस्ताव रखा है. इसे कंसल्टेशन पेपर कहते हैं. मतलब, नियमों का प्रस्ताव सामने आया है; वे अभी अंतिम रूप में लागू नहीं हुए हैं.

लेकिन शेयर बाजार अंतिम फैसला आने का इंतजार हमेशा नहीं करता. निवेशकों को लगा कि प्रस्तावित बदलाव से पॉलिसी बेचने वाली कंपनियों और इस कारोबार से कमाई करने वालों पर असर पड़ सकता है. इसी आशंका में बीमा और फाइनेंशियल शेयरों की बिकवाली तेज हुई. दोपहर से पहले की एक रिपोर्ट में ही कई फाइनेंशियल शेयरों की मार्केट वैल्यू में ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा की गिरावट दर्ज की जा चुकी थी.

सबसे ज्यादा चर्चा पीबी फिनटेक की रही, जो पॉलिसीबाजार की पैरेंट कंपनी है. शेयर दिन के अंत में 35% नीचे रहा और कंपनी की मार्केट वैल्यू से ₹25,000 करोड़ से ज्यादा साफ हो गए. मार्केट वैल्यू घटने का मतलब यह नहीं कि कंपनी के बैंक खाते से उतनी नकदी निकल गई. इसका मतलब है कि शेयर के गिरे हुए भाव पर उसके सभी शेयरों की कुल बाजार कीमत इतनी कम हो गई.

दूसरे शेयरों पर भी बुरा असर

पीबी फिनटेक की गिरावट का असर उससे जुड़े दूसरे शेयर पर भी दिखा. इन्फो एज की कंपनी में 6.5% से ज्यादा हिस्सेदारी है. इसलिए पीबी फिनटेक के शेयर का भाव गिरा, तो निवेशकों ने इन्फो एज में रखे उस निवेश की कीमत पर भी दोबारा हिसाब लगाया. इन्फो एज का शेयर 6% से ज्यादा टूटा.
दोपहर 1:38 बजे के आसपास पीबी फिनटेक का शेयर ₹1,320.10 पर, करीब 30% नीचे रिपोर्ट किया गया था. इससे अंदाजा मिलता है कि बिकवाली सुबह की शुरुआती घबराहट तक सीमित नहीं रही; दोपहर तक दबाव बना हुआ था.

बैंकिंग शेयर भी क्यों टूटे?

बीमा की पॉलिसियां सिर्फ एजेंट या वेबसाइट ही नहीं बेचते. बैंक भी अपने ग्राहकों को पॉलिसी बेचते हैं और इस कारोबार से कमाई करते हैं. इसे बाजार की भाषा में बैंकएश्योरेंस कहते हैं. अगर पॉलिसी बेचने के नियम या कमीशन का तरीका बदलता है, तो जिन बैंकों की इस कारोबार पर ज्यादा निर्भरता है, उनकी भविष्य की कमाई को लेकर सवाल उठते हैं.

इसी डर में इंडसइंड बैंक, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक जैसे शेयरों पर दबाव रहा. एक्सिस बैंक भी बड़े गिरने वाले शेयरों में शामिल था. शाम तक निफ्टी बैंक 1,110 पॉइंट टूटकर 55,439 पर बंद हुआ. फाइनेंशियल और इंश्योरेंस शेयरों की कुल मार्केट वैल्यू में करीब ₹1.25 लाख करोड़ की कमी आई.

इसका असर बड़े इंडेक्स पर भी पड़ा. बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी लाइफ, बजाज फिनसर्व और एक्सिस बैंक निफ्टी के प्रमुख गिरने वाले शेयरों में रहे. इनमें लगभग 4% से 6% तक गिरावट दर्ज हुई. निफ्टी मिडकैप इंडेक्स भी 1,406 पॉइंट गिरकर 60,990 पर बंद हुआ. यानी बिकवाली बड़े शेयरों से आगे मझोली कंपनियों तक पहुंच गई.

शाम 3:30 बजे आई तबाही की तस्‍वीर

क्लोजिंग बेल बजने तक निफ्टी अपने हाल के निचले स्तरों के नीचे था. 50 में से 48 निफ्टी शेयर लाल निशान में बंद हुए. यह संख्या दिन की कहानी एक वाक्य में बता देती है: बाजार को संभालने के लिए कुछ शेयरों की खरीदारी हुई भी हो, तो वह चौतरफा बिकवाली के सामने काफी नहीं थी.

फिर भी गुरुवार को हर शेयर नहीं गिरा. आईसीआईसीआई लोम्बार्ड 5% चढ़ा. विश्लेषकों का आकलन था कि प्रस्तावित बदलावों के बीच उसकी स्थिति दूसरी कंपनियों के मुकाबले बेहतर हो सकती है. यह विश्लेषकों की राय है, नियम के अंतिम असर की गारंटी नहीं. सेबी बोर्ड की बैठक से पहले एमसीएक्स का शेयर करीब 2% बढ़ा.

नए लिस्ट हुए शेयरों में भी अलग तस्वीर दिखी. हीरो मोटर्स, एसएस रिटेल और जिंदल सुप्रीम ने अपनी लिस्टिंग के बाद की बढ़त आगे बढ़ाई और कुछ शेयर 20% तक चढ़े. एनएसई का शेयर ₹1,785 के इश्यू प्राइस के मुकाबले ₹1,812 पर बंद हुआ. पूरे बाजार में डर होने पर भी कुछ निवेशक खास कंपनियों में खरीदारी कर रहे थे.



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