Mausam Update : 4000KM लंबा बादल, हिमालय से इन इलाकों की तरफ बढ़ रहा भयंकर तूफान, सेटेलाइट तस्वीर देख वैज्ञानिक सन्न

Mausam Update : 4000KM लंबा बादल, हिमालय से इन इलाकों की तरफ बढ़ रहा भयंकर तूफान, सेटेलाइट तस्वीर देख वैज्ञानिक सन्न


अंतरिक्ष से आई एक खौफनाक सेटेलाइट तस्वीर ने दुनिया भर के मौसम वैज्ञानिकों के होश उड़ा दिए हैं. आसमान में करीब 4,000 किलोमीटर लंबा बादलों का एक विशाल और बेहद घना बवंडर फैला हुआ दिखाई दे रहा है. उत्तर और मध्य भारत से शुरू होकर ये भयंकर बादलों का घेरा हिमालय के पहाड़ों को पार करता हुआ दिख रहा है. एक तरफ जहां देश में मानसून की विदाई का समय चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ हिमालय के आसपास के क्षेत्रों और तटीय इलाकों में भयंकर तूफान और मूसलाधार बारिश का बड़ा खतरा मंडराने लगा है. सेटेलाइट तस्वीरों में दिखा ये दुर्लभ नजारा साफ इशारा कर रहा है कि आने वाले दिन कई राज्यों के लिए भारी आफत की बारिश और तूफानी हलचल लेकर आ सकते हैं.

सेटेलाइट तस्वीर में दिखा विशालकाय बादल

अंतरिक्ष से ली गई बिल्कुल नई सेटेलाइट तस्वीरों को देखकर ऐसा लग रहा है मानो आसमान में सफेद बादलों का एक विशाल गलियारा बन गया हो. ये विशाल बेल्ट भारत के उत्तरी और मध्य हिस्सों से उठकर सीधे पूर्व दिशा की ओर फैल रही है. इसमें ऊंचे आसमान में छाए सफेद और बेहद घने बादलों की मोटी परत साफ-साफ देखी जा सकती है.

करीब 4,000 किलोमीटर में फैली इस बादलों की पट्टी में कई जगह बहुत खतरनाक और घने बादलों के जमावड़े मौजूद हैं. ये भयंकर टुकड़े खासतौर पर भारत के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों, बांग्लादेश, म्यांमार और उससे लगे समुद्री तटीय इलाकों के ऊपर जमे हुए हैं. इस तस्वीर से ये साफ जाहिर होता है कि ये किसी एक छोटे शहर या राज्य का मौसम नहीं है, बल्कि पूरा महाद्वीप एक बहुत बड़े और ताकतवर वातावरणीय सिस्टम की चपेट में आ चुका है.

पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत में भयंकर बारिश और आंधी का खतरा

सेटेलाइट से मिली इस तस्वीर में सबसे डराने वाली बात वो बेहद चमकीले और गहरे धब्बे हैं जो बादलों के बीच-बीच में उभरे हुए हैं. मौसम की वैज्ञानिक भाषा में इन्हें ‘कन्वेक्टिव सेल्स’ कहा जाता है. आसान शब्दों में समझें तो ये वो जगहें होती हैं जहां समुद्र और जमीन से उठने वाली बेहद गर्म और नमी वाली हवा बहुत तेजी से ऊपर आसमान की तरफ उठती है और बेहद घने बारिश वाले बादल बना देती है.

ऐसे बादलों के बनने का मतलब होता है कि उन इलाकों में अचानक मूसलाधार बारिश, आसमान से बिजली गिरने और भयंकर आंधी-तूफान आने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है. फिलहाल भारत के पूर्वी राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और असम समेत पूरे उत्तर-पूर्वी हिस्सों में इन बादलों का सबसे ज्यादा प्रभाव देखा जा रहा है. इसके साथ ही हिमालय की तलहटी वाले इलाकों और बांग्लादेश में भी घने बादलों के कारण भारी बारिश का नया दौर शुरू होने के पूरे आसार हैं.

आखिर कैसे बनती है 4,000 किलोमीटर लंबी बादलों की ये पट्टी?

बहुत से लोगों के मन में ये सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी लंबी और लगातार फैली बादलों की पट्टी कैसे बन जाती है. मौसम के जानकारों का कहना है कि ऐसा तब होता है जब बहुत बड़े भूभाग में नमी से भरी हवाएं एक जगह आकर टकराती हैं और आपस में मिल जाती हैं.

जब मानसून की नमी वाली हवाएं लो-प्रेशर सिस्टम और हवा के उपरी हिस्से में होने वाली हलचलें एक साथ टकराती हैं, तो नमी बहुत तेजी से ऊपर उठती है. यही नमी एक बहुत बड़े इलाके में फैलकर बादलों की एक अटूट और लंबी चादर का रूप ले लेती है. हालांकि, इसका मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि पूरे 4,000 किलोमीटर के इलाके में एक साथ एक जैसी बारिश होगी. सबसे ज्यादा तबाही और पानी उन इलाकों में गिरता है जहां बादलों का घनत्व सबसे ज्यादा होता है, लेकिन ये सिस्टम इतना विशाल होता है कि एक साथ कई देशों के मौसम को प्रभावित करता है.

मानसून की विदाई के बीच बंगाल की खाड़ी का खौफनाक असर

भारत के नजरिए से ये सेटेलाइट तस्वीर इसलिए भी ज्यादा चिंता बढ़ाने वाली है क्योंकि इस समय देश से दक्षिण-पश्चिम मानसून के वापस लौटने का समय चल रहा है. आमतौर पर जब मानसून विदा होता है तो बारिश कम होने लगती है और हवा का रुख बदलने लगता है. लेकिन इस बार बंगाल की खाड़ी में लगातार मौसम के नए और छोटे-बड़े सिस्टम बन रहे हैं.

बंगाल की खाड़ी में बन रहे इन सिस्टम की वजह से समुद्र से उठने वाली नमी लगातार देश के मध्य, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों तक पहुंच रही है. यही वजह है कि मानसून की विदाई के तय समय के बावजूद पूर्वी भारत, मध्य भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों में बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही है. 4,000 किलोमीटर लंबी ये पट्टी दिखाती है कि मानसून भले ही कागजों पर विदा हो रहा हो, लेकिन वायुमंडल में नमी और हलचल अभी भी पूरी तरह से हावी है.

भारत से चीन तक बदला मौसम, पड़ोसी देशों में भी मची हलचल

इस सेटेलाइट तस्वीर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कुदरत और मौसम किसी देश की सरहदों को नहीं मानते. बादलों का ये विशाल चक्र भारत की सीमाओं को पार करते हुए बांग्लादेश, म्यांमार, दक्षिण-पूर्व एशिया और सीधे चीन के बड़े हिस्से तक फैल गया है.

इसका सीधा सा मतलब ये है कि जिस तूफानी हवा और बादलों का असर भारत में दिख रहा है, वही सिस्टम पड़ोसी देशों में भी भारी तबाही मचा सकता है. म्यांमार और बांग्लादेश के तटीय इलाकों में इस समय इन घने बादलों की वजह से समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं और कई इलाकों में मूसलाधार बारिश से हालात खराब होने लगे हैं. चीन के कई हिस्सों में भी इस वजह से मौसम अचानक बदल गया है.





Source link