IIT Bombay student Sahil Wakode case। IIT Bombay student Sahil Wakode Hunger Strike। इधर अनशन पर माता-पिता, वहां IIT बॉम्बे पहुंची NCSC

IIT Bombay student Sahil Wakode case। IIT Bombay student Sahil Wakode Hunger Strike। इधर अनशन पर माता-पिता, वहां IIT बॉम्बे पहुंची NCSC


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इधर अनशन पर माता-पिता, वहां IIT बॉम्बे पहुंची NCSC, उलझा छात्र की मौत विवाद

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IIT Bombay Student Sahil Wakode Case: आईआईटी बॉम्बे में छात्र साहिल वाकोडे की संदिग्ध मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर माता-पिता आजाद मैदान में आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. परिजनों ने संस्थान पर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है. इस बीच, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष ने कैंपस का दौरा कर जांच की है, और बढ़ते दबाव के बीच संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला को डीन पद से हटा दिया है.

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मामले की जांच जारी है.

आईआईटी बॉम्बे में साहिल वाकोडे की संदिग्ध मौत का मामला अब बेहद तूल पकड़ चुका है. न्याय की मांग को लेकर पीड़ित माता-पिता ने मुंबई के आज़ाद मैदान में आमरण अनशन शुरू कर दिया है. परिजनों ने संस्थान के भीतर जातिगत भेदभाव और मानसिक प्रताड़ना का गंभीर आरोप लगाया है. इस बीच, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कैंपस का दौरा कर विस्तृत स्थल जांच की है और पुलिस अधिकारियों से अपडेट लिया है. बढ़ते छात्र विरोध के बीच संस्थान ने प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला को डीन पद से हटा दिया है और परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है. माता पिता का सीधा आरोप है कि उनके बेटे को मानसिक प्रताड़ना दी गई और संस्थान के भीतर जातिगत भेदभाव का शिकार बनाया गया. इस हाई-प्रोफाइल मामले ने अब प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक में भूचाल ला दिया है.

क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है बवाल?
बीती 18 सितंबर 2026 को आईआईटी बॉम्बे के पवई कैंपस स्थित हॉस्टल के कमरे में 22 वर्षीय साहिल वाकोडे का शव पंखे से लटका हुआ मिला था. साहिल एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट का सेकंड ईयर का छात्र था और मूल रूप से महाराष्ट्र के यवतमाल का रहने वाला था. परिवार का आरोप है कि साहिल ने अपनी जान नहीं दर बल्कि उसे ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर किया गया. परिजनों के मुताबिक, साहिल को लगातार जातिगत गालियां दी जाती थीं और उसका उत्पीड़न किया जाता था. इस सनसनीखेज खुलासे के बाद छात्रों और राजनीतिक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा, जिसके दबाव में आकर इस मामले की जांच तुरंत मुंबई क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर कर दी गई.

आजाद मैदान में माता-पिता का संघर्ष और न्याय की गुहार
अपने होनहार बेटे को खोने के बाद माता-पिता रवींद्र और सोनाली वाकोडे इंसाफ पाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं. वकील सिद्धार्थ इंगले के मुताबिक, माता-पिता ने आजाद मैदान में भूख हड़ताल शुरू कर दी है. मां सोनाली वाकोडे का कहना है कि उनका बेटा बहुत होनहार था, जिसे रोबोटिक्स और एआई इवेंट्स में 50 लोगों की टीम को लीड करना था, जिसका इसरो (ISRO) में चयन हुआ था, वह ऐसा कभी नहीं कर सकता. माता-पिता ने आईआईटी बॉम्बे के डायरेक्टर शिरीष केदारे और प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला की तुरंत गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है. बढ़ते दबाव को देखते हुए संस्थान ने प्रोफेसर डूल्ला को एडमिनिस्ट्रेटिव अफेयर्स के डीन पद से हटा दिया है और 26-27 सितंबर को होने वाली मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को भी 10-11 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया है.

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सख्त एंट्री
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के माननीय अध्यक्ष किशोर मकवाना ने खुद आईआईटी बॉम्बे कैंपस का दौरा किया और विस्तृत जांच की. आयोग के अध्यक्ष ने पीड़ित माता-पिता से मुलाकात कर उनका दर्द जाना और उन्हें न्याय का भरोसा दिया. इसके साथ ही, आयोग ने मुंबई पुलिस कमिश्नर और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के साथ हाई-लेवल मीटिंग कर पूरे मामले की अब तक की जांच का अपडेट लिया है. आरोपी प्रोफेसर सूर्यनारायण डूल्ला के खिलाफ एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट और आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है. परिवार और छात्र संगठनों की मांग है कि इस पूरे मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में हो ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके और किसी अन्य छात्र को इस दर्द से न गुजरना पड़े.



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