Ganesh Visarjan Shubh Muhurat 2026 panchak and bhadra kaal on Anant Chaturdashi | गणेश विसर्जन पर पंचक और भद्रा का संकट! जानें बप्पा को खुशी-खुशी विदा

Ganesh Visarjan Shubh Muhurat 2026 panchak and bhadra kaal on Anant Chaturdashi | गणेश विसर्जन पर पंचक और भद्रा का संकट! जानें बप्पा को खुशी-खुशी विदा


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गणेश विसर्जन के दिन पूरे दिन पंचक और भद्रा का साया, जानें विदाई का शुभ मुहूर्त

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Ganesh Visarjan Shubh Muhurat 2026: गणेश विसर्जन का दिन इस बार पंचक काल और भद्रा के साये में रहेगा, जिससे भक्तों में शुभ मुहूर्त को लेकर असमंजस की स्थिति है. बप्पा की विदाई के लिए कौन सा समय सबसे उत्तम रहेगा, यह जानना महत्वपूर्ण है ताकि बिना किसी बाधा के विसर्जन संपन्न हो सके. ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, कुछ विशेष मुहूर्त ऐसे हैं जिनमें गणेश जी को विदा करना अत्यंत शुभ फलदायी होगा, भले ही पंचक और भद्रा का प्रभाव हो.

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Ganesh Visarjan Shubh Muhurat 2026: अनंत चतुर्दशी के दिन गणेशोत्सव का समापन हो जाता है और घरों व सार्वजनिक पंडालों में स्थापित गणेशजी की विदाई कर विसर्जन किया जाता है. मान्यता है कि विसर्जन भगवान गणेश को विदाई देने और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना का प्रतीक है. विसर्जन प्रकृति के उसी चक्र का प्रतीक माना जाता है, जिसमें आगमन के बाद पुनः अपने मूल तत्व में विलीन होने का भाव निहित है. लेकिन इस बार बप्पा की विदाई के दिन पूरे दिन पंचक काल और भद्रा का साया रहने वाला है. साथ ही दोपहर 2 बजकर 5. मिनट तक शूल योग भी रहने वाला है. आइए जानते हैं बप्पा की विदाई और विसर्जन किस मुहूर्त में करें…

पंचक काल में गणेश विसर्जन
पंचक को लेकर कई लोगों के मन में यह सवाल है कि क्या इस दौरान गणेशजी का विसर्जन किया जा सकता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पंचक के कुछ नियम मुख्य रूप से मृत्यु और अंतिम संस्कार जैसे कार्यों से जुड़े माने जाते हैं. गणेश प्रतिमा का विसर्जन देव प्रतिमा का जल-विसर्जन है, इसलिए कुछ ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इसे अंतिम संस्कार की श्रेणी में नहीं रखा जाता और पंचक के दौरान भी गणेश विसर्जन किया जा सकता है.

पंचक और भद्रा एक साथ
पंचांग के अनुसार, पंचक 23 सितंबर की रात से शुरू होकर 28 सितंबर की सुबह तक रहेगा. ऐसे में 25 सितंबर को गणेश विसर्जन पंचक काल के दौरान ही होगा. साथ ही इस शुभ दिन पर भद्रा सुबह 11 बजकर 6 मिनट से अगले दिन 6 बजकर 12 मिनट तक रहने वाला है.

पंचक और भद्रा के साथ शूल योग
पंचक और भद्रा के साथ इस शुभ दिन पर शूल योग भी है, जो एक अशुभ और कष्टकारी योग माना जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ ‘कांटा’ या ‘चुभने वाला शस्त्र’ होता है. पंचक काल, भद्रा और शूल योग के बीच गणपति की विदाई और विसर्जन दोनों किया जाएगा और अगले साल फिर आने की कामना की जाएगी.

अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त 2026
25 सितंबर को अलग-अलग शहरों में चौघड़िया के समय में कुछ मिनट का अंतर हो सकता है
पंचांग के अनुसार, लाभ चौघड़िया – 7:41 से 9:12 बजे
अमृत चौघड़िया – 9:12 से 10:42 बजे
शुभ चौघड़िया – दोपहर 12:13 से 1:43 बजे तक
चर एवं लाभ मुहूर्त – दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 03:18 बजे तक

गणेश विसर्जन के लिए उत्तम मुहूर्त – सुबह 06:.2 बजे से लेकर दोपहर .2:36 बजे के बीच
प्रातः काल शुभ मुहूर्त – सुबह 06:12 बजे से सुबह 10:42 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
विजय मुहूर्त – 02:14 पी एम से 03:02 पी एम
गोधूलि मुहूर्त – 06:15 पी एम से 06:39 पी एम
रवि योग – 06:12 ए एम से 11:22 ए एम

विसर्जन से पहले करें बप्पा की विदाई पूजा
गणेश विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा और आरती करें. उन्हें फूल, दूर्वा, फल और मोदक या अपनी परंपरा के अनुसार नैवेद्य अर्पित करें. इसके बाद परिवार के सभी सदस्य बप्पा से सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करें. पूजा के दौरान जाने-अनजाने में हुई भूल के लिए भगवान गणेश से क्षमा याचना भी की जा सकती है.

गणेश विसर्जन में इन बातों का रखें ध्यान

  • विसर्जन से पहले उत्तर पूजा और आरती करें.
  • गणेश प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन स्थल तक ले जाएं.
  • स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन स्थल का ही उपयोग करें.
  • पर्यावरण की दृष्टि से मिट्टी की प्रतिमा को प्राथमिकता दें.
  • फूल, माला और अन्य निर्माल्य को जल में न डालें; इन्हें निर्धारित स्थान पर रखें.
  • नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जन करते समय बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें.
  • विसर्जन के दौरान धार्मिक भावनाओं के साथ स्वच्छता और स्थानीय नियमों का पालन करें.



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