Ganesh Visarjan 2026 Uttara Puja: बप्पा को विदा करने से पहले जरूर करें उत्तर पूजा! नियम के साथ जानें विसर्जन की पोटली में क्या रखना जरूरी

Ganesh Visarjan 2026 Uttara Puja: बप्पा को विदा करने से पहले जरूर करें उत्तर पूजा! नियम के साथ जानें विसर्जन की पोटली में क्या रखना जरूरी


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बप्पा को विदा करने से पहले करें उत्तर पूजा! नियम के साथ जानें विसर्जन मुहूर्त

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Ganesh Visarjan 2026 Muhurat And Choghadiya: अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का समापन होता है. इस दिन श्रद्धालु भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद उनकी प्रतिमा का विसर्जन करते हैं. मान्यता है कि विसर्जन भगवान गणेश को विदाई देने और अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना का प्रतीक है. इस दौरान श्रद्धालुओं को कुछ धार्मिक और पर्यावरण संबंधी बातों का ध्यान रखना चाहिए. जानें बप्पा की पोटली में क्या रखें और विसर्जन का उत्तम मुहूर्त कौन सा है…

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Ganesh Visarjan 2026 Muhurat And Choghadiya: गणेशोत्सव के बाद श्रद्धालु अनंत चतुर्दशी के दिन बप्पा को विदाई देने की तैयारी कर रहे हैं. इस बार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानी अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर दिन शुक्रवार को पड़ रही है. हालांकि, गणेश विसर्जन से पहले भगवान गणेश की विधिवत पूजा, भोग और आरती करने की परंपरा है. माना जाता है कि श्रद्धापूर्वक और सही विधि से भगवान गणेश की मूर्ति का विसर्जन करने से घर-परिवार में सकारात्मक माहौल के साथ-साथ सुख-समृद्धि बनी रहती है. अनंत चतुर्दशी के दिन 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन गणेश विसर्जन के साथ होता है. इस दिन बप्पा को विदाई देते समय शुभ मुहूर्त और शास्त्रों में बताए गए नियमों का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, ताकि घर में सुख-समृद्धि बनी रहे.

उत्तर पूजा की निभाएं रस्म
मूर्ति को विसर्जन के लिए ले जाने से पहले विदाई पूजा में परिवार के सदस्य भगवान गणेश की मूर्ति के पास इकट्ठा होते हैं. विदाई पूजा में फूल, दूर्वा, फल और नैवेद्य चढ़ाते हैं. साथ ही भगवान गणेश की आरती की जाती है और आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है. इसके बाद, परिवार की परंपरा के अनुसार विदाई पूजा की जा सकती है. मूर्ति को पूजा की जगह से हटाने से पहले ‘उत्तर पूजा’ या विदाई की अपनी पारंपरिक रस्म भी निभा सकते हैं. जरूरी बात यह है कि विसर्जन वाली जगह के लिए निकलने से पहले घर की पारंपरिक विदाई रस्में पूरी कर ली जाएं.

अलग थाली करें तैयार
बप्पा की आखिरी भेंट के लिए एक अलग थाली तैयार की जा सकती है. पूजा का जरूरी सामान अलग-अलग ले जाने के बजाय एक साथ रखा जा सकता है. मूर्ति को आखिरी विदाई के लिए फूलों और साधारण सजावट के साथ तैयार किया जाता है. लोग बप्पा को तय विसर्जन स्थल तक ले जाते हैं. इस दौरान वे भक्ति गीत गाते हैं और जयकारा लगाते हैं. साथ ही बप्पा की विदा करते समय एक छोटी सी लाल या पीले रंग के कपड़े में पोटली बांधकर दी जाती है.

पोटली में क्या-क्या रखें?
मोदक या लड्डू: भगवान को प्रिय भोग के रूप में
दूर्वा: श्रीगणेश को अर्पित हरी घास
हल्दी की गांठ: शुभता और समृद्धि के लिए
सुपारी: अखंडता और पूजन की पूर्णता के लिए
अक्षत (चावल): पूर्णता और अक्षुण्णता का प्रतीक
थोड़े सिक्के या दक्षिणा: श्रद्धा स्वरूप

भक्ति के साथ करें गणेशजी की विदा
अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन के दौरान श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों, भक्ति भजनों और ‘गणपति बप्पा मोरया’ जयघोष के साथ भगवान गणेश को विदा करते हैं, इस विश्वास के साथ कि वे अगले साल फिर आएंगे. घर पर होने वाले उत्सव के लिए किसी उपयुक्त बर्तन, कृत्रिम तालाब या तय टैंक में विसर्जन किया जा सकता है. लोगों को मूर्तियों को स्थानीय व्यवस्था के अनुसार तय विसर्जन स्थलों पर ले जाना चाहिए.

गणेश विसर्जन शुभ मुहूर्त 2026
प्रातः काल शुभ मुहूर्त – सुबह 06:12 बजे से सुबह 10:42 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11:48 बजे से दोपहर 12:36 बजे तक
चर एवं लाभ मुहूर्त – दोपहर 12:15 बजे से दोपहर 03:18 बजे तक
गणेश विसर्जन के लिए उत्तम मुहूर्त – सुबह 06:12 बजे से लेकर दोपहर 12:36 बजे के बीच

गणेश विसर्जन के दौरान इन बातों का रखें ध्यान:
विधिवत पूजा करें: विसर्जन से पहले भगवान गणेश की पूजा, आरती और नैवेद्य अर्पित करें.
उत्तर पूजा करें: परंपरा के अनुसार विसर्जन से पहले गणेशजी की उत्तर पूजा की जाती है.
शुभ भाव से विदाई दें: गणपति बप्पा से परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें.
प्रतिमा को सम्मान से ले जाएं: विसर्जन यात्रा के दौरान गणेश प्रतिमा को झटका या अनादर ना पहुंचाएं.
निर्धारित स्थान पर विसर्जन करें: प्रशासन द्वारा बनाए गए कृत्रिम तालाब या निर्धारित विसर्जन स्थल का उपयोग करें.
पर्यावरण का ध्यान रखें: प्लास्टर ऑफ पेरिस और हानिकारक रंगों वाली प्रतिमाओं से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाएं.
निर्माल्य अलग रखें: फूल, पत्ते और पूजा सामग्री को जल में ना फेंकें, निर्धारित स्थान पर रखें.
सुरक्षा का ध्यान रखें: नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जन करते समय बच्चों को अकेले पानी के पास ना जाने दें.
श्रद्धा और अनुशासन बनाए रखें: विसर्जन के दौरान धार्मिक भावनाओं के साथ सार्वजनिक व्यवस्था और स्थानीय नियमों का पालन करें.



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