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Deoghar 5 KM Bypass: भारतीय रेल ने कुमड़ाबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन के बीच 5 किलोमीटर लंबी रेल बाईपास लाइन का निर्माण पूरा कर लिया है, जिसकी लागत 293 करोड़ रुपये है. इसके शुरू होने से रोहिणी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव की संभावना बढ़ गई है, जिससे यात्रियों को एम्स देवघर पहुंचने में आसानी होगी और जसीडीह में लगने वाला अतिरिक्त समय बचेगा.
देवघर. लाखों रेल यात्रियों के सफर को आसान और तेज बनाने की दिशा में भारतीय रेल ने एक अहम काम पूरा कर लिया है. कुमड़ाबाद रोहिणी से देवघर लिंक केबिन के बीच करीब 5 किलोमीटर लंबी रेल बाईपास लाइन का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है. करीब 293 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस रेल बाईपास के शुरू होने के बाद देवघर और आसपास के रेल यात्रियों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.
सबसे बड़ा बदलाव रोहिणी स्टेशन पर देखने को मिल सकता है, जहां अब तक मुख्य रूप से मेमू ट्रेनों का ठहराव होता रहा है. बाईपास लाइन चालू होने के बाद कई एक्सप्रेस ट्रेनों के रोहिणी स्टेशन पर ठहराव की संभावना जताई जा रही है. अगर ऐसा होता है तो स्थानीय यात्रियों को जसीडीह जाने की जरूरत कम होगी और उन्हें अपने क्षेत्र के नजदीक से ही एक्सप्रेस ट्रेन की सुविधा मिल सकेगी.
बायपास बनने के बाद ट्रेनों का संचालन आसान
दरअसल, अभी कई ट्रेनों को देवघर से आगे जाने के लिए जसीडीह की ओर जाना पड़ता है. इनमें रांची-दुमका इंटरसिटी एक्सप्रेस और मायूराक्षी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें भी शामिल हैं. बाईपास लाइन बनने के बाद ट्रेनों के संचालन का रास्ता पहले की तुलना में आसान हो जाएगा. ट्रेनें कुमड़ाबाद रोहिणी होते हुए सीधे अपने निर्धारित रूट पर आगे बढ़ सकेंगी. इससे जसीडीह स्टेशन पर ट्रेन के संचालन में लगने वाला अतिरिक्त समय कम होगा. इसी बदलाव का सीधा असर रोहिणी स्टेशन पर भी पड़ सकता है, क्योंकि इस रूट से गुजरने वाली ट्रेनों के ठहराव को लेकर यात्रियों में उम्मीद बढ़ी है.
क्या कहते हैं यात्री
रोहिणी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों के ठहराव होने की खबर से स्थानीय यात्रियों में भी उत्साह है. यात्री श्यान गुप्ता बताते हैं कि जिस स्टेशन पर पहले सिर्फ लोकल ट्रेन रुकती थी, वहां अगर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव शुरू होता है तो यह यात्रियों के लिए बड़ी सुविधा होगी. उनका कहना है कि इससे लोगों को जसीडीह जाकर ट्रेन पकड़ने की जरूरत कम होगी और सफर में समय की बचत होगी.
वहीं यात्री राकेश कुमार बताते हैं कि रोहिणी स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव होने से खासकर मरीजों और उनके परिजनों को काफी राहत मिल सकती है. उनका कहना है कि जसीडीह से एम्स देवघर पहुंचने में अभी करीब 7 से 8 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है, जबकि रोहिणी स्टेशन से एम्स की दूरी काफी कम है. ऐसे में अगर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव यहां शुरू होता है तो मरीजों को अस्पताल पहुंचने में आसानी होगी.
झाझा, जमुई, सिमुलतला समेत इन रेल यात्रियों का बचेगा समय
इस बाईपास का एक बड़ा फायदा ट्रेनों के संचालन में भी देखने को मिलेगा. अभी देवघर होकर आगे जाने वाली कई ट्रेनों को जसीडीह में इंजन की दिशा बदलने यानी इंजन रिवर्सल की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. इस पूरी प्रक्रिया में करीब 40 से 45 मिनट तक का अतिरिक्त समय लग जाता है. बाईपास लाइन शुरू होने के बाद ट्रेनों को जसीडीह स्टेशन पर इंजन की दिशा बदलने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ट्रेनें सीधे अपने गंतव्य की ओर आगे बढ़ सकेंगी. इससे यात्रियों के सफर में करीब 45 मिनट से लेकर एक घंटे तक का समय बचने की उम्मीद है.
293 करोड़ की लागत से बना यह बायपास
कुल मिलाकर करीब 293 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह 5 किलोमीटर लंबी रेल बाईपास लाइन सिर्फ ट्रेनों के सफर को तेज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे रोहिणी स्टेशन की तस्वीर भी बदल सकती है. एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव मिलने पर रोहिणी आसपास के यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन के रूप में उभर सकता है. खासकर देवघर, रोहिणी और आसपास के इलाकों से रोजाना सफर करने वाले यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है.