इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) को संबोधित करने जा रहे हैं. न्यूयॉर्क में यूएन के मंच पर ये उनका 15वां भाषण होगा. इस बार का ये दौरा पहले के दौरों से काफी अलग माना जा रहा है. गाजा और वोस्ट बैंक में जंग को लेकर दुनिया भर में इजरायल की आलोचना हो रही है और यूएन में भी उन पर कई गंभीर आरोप लगे हैं. हालांकि, इस बार नेतनयाहू की नजर सिर्फ दुनिया के जजमेंट पर नहीं, बल्कि अपने देश इजरायल में होने वाले चुनावों पर है. वो यूएन के बड़े मंच का इस्तेमाल कुछ इस तरह करने वाले हैं, जिसके वजह से विरोधियों को मिर्ची लग सकती है.
UN का मंच और इजरायल का चुनावी गणित
नेतनयाहू जब यूएन महासभा के मंच पर खड़े होंगे तो उनके दिमाग में इजरायल की घरेलू राजनीति सबसे ऊपर होगी. इस साल के अंत में इजरायल में बेहद अहम चुनाव होने वाले हैं. हाल के ताजा सर्वे और ओपिनियन पोल दिखाते हैं कि इजरायल की जनता का भरोसा नेतनयाहू और उनकी सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी से धीरे-धीरे कम हो रहा है. ऐसे मुश्किल दौर में नेतनयाहू खुद को इजरायल के इकलौते ऐसे नेता के तौर पर प्रोजेक्ट करना चाहते हैं, जो पूरी दुनिया के दबाव के सामने अकेला खड़ा हो सकता है.
न्यूयॉर्क में इजरायल के पूर्व कूटनीतिज्ञ अलोन पिंकस का मानना है कि यूएन का भाषण नेतनयाहू के लिए एक पुराना और आजमाया हुआ हथियार है. उन्होंने इस भाषण को इजरायल में किसी बड़े त्योहार या राष्ट्रीय घटना जैसा बना दिया है. इजरायल के लोग अपने टीवी स्क्रीन के सामने बैठकर उनका भाषण लाइव देखते हैं. नेतनयाहू अपने देश के लोगों को ये भरोसा दिलाना चाहते हैं कि भले ही पूरी दुनिया उनके खिलाफ हो जाए, वो कभी सरेंडर नहीं करेंगे. वो यूएन के मंच से अंतरराष्ट्रीय नीति कम और अपने देश के वोटरों के लिए संदेश ज्यादा देते हैं.
संयुक्त राष्ट्र और इजरायल के बीच पुरानी कड़वाहट
संयुक्त राष्ट्र और इजरायल के बीच रिश्ते हमेशा से तनावपूर्ण रहे हैं. यूएन में अक्सर इजरायल द्वारा फिलिस्तीनी जमीनों पर कब्जे और सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना होती रही है. अक्टूबर 2023 के बाद से तो ये कड़वाहट अपने चरम पर पहुंच चुकी है. यूएन की बैठकों में इजरायल पर गाजा में नरसंहार और मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगे हैं.
दूसरी तरफ, इजरायल ने हमेशा इन सभी आरोपों को खारिज किया है और यूएन पर इजरायल-विरोधी होने का ठप्पा लगाया है. इजरायल की सरकार ने तो यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को अपने देश में ‘अवांछित व्यक्ति’ घोषित कर दिया था, यानी उनके इजरायल आने पर बैन लगा दिया गया. इसके अलावा, इजरायल ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों की मदद करने वाली यूएन की संस्था UNRWA के कामकाज पर भी कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. इजरायल के आम लोग भी आमतौर पर यूएन को एक ऐसी संस्था के रूप में देखते हैं जो हमेशा उनके खिलाफ रुख अपनाती है.
न्यूयॉर्क में बढ़ा तनाव और सुरक्षा की चिंता
नेतनयाहू का ये न्यूयॉर्क दौरा किसी बड़े राजनीतिक तनाव से कम नहीं है. न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी इजरायल की नीतियों के कड़े आलोचक रहे हैं. इजरायली मीडिया में ममदानी के बयानों को इजरायल-विरोधी बताकर पेश किया जा रहा है. इस तनाव को देखते हुए यूएन में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने यूएन पर ‘कूटनीतिक आतंकवाद’ चलाने का आरोप लगाया और न्यूयॉर्क के मेयर पर ये आरोप भी लगा दिया कि वो यहूदी समुदाय के खिलाफ माहौल बना रहे हैं.
इतना ही नहीं, सुरक्षा कारणों से नेतनयाहू के इस दौरे को बेहद छोटा कर दिया गया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुरक्षा के गंभीर खतरों को देखते हुए नेतनयाहू जिस दिन न्यूयॉर्क पहुंचेंगे, उसी दिन अपना भाषण देकर तुरंत वापस इजरायल के लिए उड़ान भर लेंगे. वो वहां ज्यादा समय नहीं बिताएंगे.
अमेरिका की ढाल और यूएन की बेबसी
इस पूरे विवाद में अमेरिका का रुख इजरायल के लिए सबसे बड़ी ढाल बना हुआ है. हालांकि, इस दौरे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ नेतनयाहू की मुलाकात होगी या नहीं इस पर अभी सस्पेंस बना हुआ है. कयास ये भी लगाए जा रहे हैं कि शायद अमेरिका का समर्थन थोड़ा ढीला पड़ा है. लेकिन हकीकत ये है कि यूएन सुरक्षा परिषद (UNSC) में अमेरिका ने हमेशा इजरायल का बचाव किया है.
अक्टूबर 2023 के बाद से अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में कम से कम छह बार अपने वीटो पावर का इस्तेमाल करके इजरायल के खिलाफ आने वाले प्रस्तावों को रोका है, जिनमें से ज्यादातर प्रस्ताव तुरंत सीजफायर की मांग कर रहे थे. इसके अलावा, ट्रंप द्वारा गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के जरिए भी गाजा के भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारियों को यूएन के हाथ से निकालकर दूसरी संस्थाओं की तरफ मोड़ा जा रहा है.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि वीटो पावर के 80 साल पुराने सिस्टम और बड़ी शक्तियों की खींचतान की वजह से यूएन आज पहले से कहीं ज्यादा कमजोर दिख रहा है. गाजा, वोस्ट बैंक, यमन या सूडान जैसे संकटों में यूएन की राजनीतिक भूमिका न के बराबर रह गई है. हालांकि, यूएन अभी भी गाजा और वोस्ट बैंक में राहत सामग्री और मेडिकल मदद पहुंचाने का काम कर रहा है, जहां हर रास्ते पर इजरायल का कड़ा नियंत्रण है.
भाषण से इजरायल की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
नेतनयाहू का ये यूएन भाषण इजरायल की घरेलू राजनीति में एक ट्विस्ट ला सकता है. इजरायल के सभी बड़े न्यूज चैनलों पर इस भाषण का सीधा प्रसारण होगा और आने वाले कई दिनों तक वहां की मीडिया में इसी पर बहस चलेगी. नेतनयाहू इस मौके का पूरा फायदा उठाकर खुद को अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी और ईरान के खतरे से देश को बचाने वाला एकमात्र मजबूत नेता साबित करने की कोशिश करेंगे.