‘हमारे पास तर्क भी है और ताकत भी’, राजनाथ सिंह बोले- जिसे जो भाषा समझ आए, उसी में देंगे जवाब

‘हमारे पास तर्क भी है और ताकत भी’, राजनाथ सिंह बोले- जिसे जो भाषा समझ आए, उसी में देंगे जवाब


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जिसे जो भाषा समझ आए उसी में देंगे जवाब, बदल चुका है भारत का मिजाज: राजनाथ सिंह

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न्यूज18 डेफकॉन कॉन्क्लेव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अब पुरानी हिचक छोड़कर आगे बढ़ चुका है. देश के पास बातचीत का तर्क भी है और ताकत का दम भी. जिसे जो जुबान समझ आएगी, उसे उसी में समझाया जाएगा. भारत कूटनीति के साथ-साथ अपनी सैन्य ताकत को भी लगातार धार दे रहा है.

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‘शांति चाहिए तो ताकत जरूरी’: न्यूज18 डेफकॉन में दुश्मनों को रक्षा मंत्री की चेतावनी.

नई दिल्ली: सुरक्षा को लेकर अब भारत की रणनीति और तेवर पूरी तरह बदल चुके हैं. न्यूज18 डेफकॉन के मंच से रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह साफ कर दिया कि भारत किसी भी तरह के भ्रम में नहीं रहने वाला है. आज के दौर में खतरे किसी एक सीमा तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उनका दायरा लगातार फैल रहा है. ऐसे में अगर देश को सुरक्षित रखना है, तो पुरानी सोच को पूरी तरह छोड़ना होगा. राजनाथ सिंह ने साफ शब्दों में रेखांकित किया कि भारत शांति का समर्थक जरूर है, लेकिन कमजोरी की कीमत पर शांति कतई स्वीकार नहीं की जाएगी. पिछले कुछ वर्षों में देश ने यह साबित कर दिया है कि बातचीत के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर कठोर फैसले लेने की पूरी क्षमता और इच्छाशक्ति हमारे पास मौजूद है.

क्या सिर्फ बातचीत के दम पर सीमाएं सुरक्षित रह सकती हैं?

जमीनी हकीकत हमेशा इससे बिल्कुल अलग रही है. सॉफ्ट पावर किसी भी देश के प्रभाव को बढ़ा सकती है, लेकिन वह कभी हथियारों और सैन्य ताकत की जगह नहीं ले सकती. कूटनीति की मेज पर आपकी बात का वजन तभी होता है, जब आपके पीछे ठोस ताकत खड़ी हो. बिना ताकत के की जाने वाली कूटनीति को दुनिया मजबूरी या कमजोरी समझ बैठती है.





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