नई दिल्लीः कोलकाता की रहने वाली पापिया नट्टा की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है, जो अपने हुनर को पहचान दिलाना चाहते हैं. कभी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाली पापिया ने अपने हाथ के हुनर और रचनात्मकता को अपना काम बनाया. आज वह पिछले करीब 13 साल से हाथ से आभूषण तैयार कर रही हैं. उनके कारोबार का नाम पापिया आर्ट एंड क्राफ्ट है.
पापिया बताती हैं कि उन्हें शुरू से ही हाथ से अलग-अलग चीजें बनाने का शौक था. इसी शौक को उन्होंने धीरे-धीरे सीखा और फिर आभूषण बनाने का काम शुरू किया. शुरुआत में यह सफर आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने हुनर पर भरोसा रखा और लगातार काम करती रहीं.
मिट्टी, कपड़े और पीतल से तैयार होती है ज्वेलरी
पापिया के बनाए आभूषणों की सबसे खास बात यह है कि इनमें कई तरह की चीजों का इस्तेमाल किया जाता है. वह कपड़े, मिट्टी, पीतल और अलग-अलग धातुओं से आभूषण तैयार करती हैं. मिट्टी से बने आभूषणों के लिए वह उस तरह की मिट्टी का इस्तेमाल करती हैं, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर मूर्तियां बनाने में किया जाता है.
उनके यहां सिर्फ हार या झुमके ही नहीं, बल्कि सिर से लेकर पैर तक के लिए अलग-अलग तरह के आभूषण बनाए जाते हैं. बालों में लगाने वाली चीजों से लेकर हार, हाथों के आभूषण, अंगूठियां और पैरों के आभूषण तक उनके संग्रह में शामिल हैं. खास बात यह है कि इन चीजों को मशीन से नहीं, बल्कि हाथ से तैयार किया जाता है.
स्कूल की नौकरी से अपना कारोबार शुरू करने तक
पापिया के लिए शिक्षक से कारोबारी बनने का सफर बिल्कुल आसान नहीं था. जब उन्होंने यह काम शुरू किया, तब शुरुआत में उन्हें सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली. यहां तक कि उनके शिक्षक ने भी उनसे पूछा कि वह आखिर यह सब क्यों कर रही हैं.
लेकिन पापिया ने अपने काम को छोड़ने के बजाय लोगों को धीरे-धीरे इसके बारे में समझाया. उन्होंने अपने हुनर को निखारना जारी रखा. उनके काम को जब पहचान मिलने लगी और सरकार की तरफ से उन्हें सम्मान मिला, तो लोगों का नजरिया भी बदलने लगा. पापिया बताती हैं कि करीब 2020 तक उनके काम को एक अलग पहचान मिलने लगी थी. सरकारी सम्मान ने उन्हें यह भरोसा दिया कि वह जिस रास्ते पर चल रही हैं, उसमें आगे बढ़ने की काफी गुंजाइश है.
अपने छात्रों को भी सिखा रही हैं हुनर
आज पापिया के साथ करीब 2-3 लोग काम करते हैं. खास बात यह है कि ये उनके अपने छात्र हैं, जिन्हें उन्होंने खुद यह काम सिखाया है. यानी कभी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाली पापिया अब अपने छात्रों को एक हुनर सिखाकर उन्हें अपने काम से जोड़ रही हैं.पापिया के लिए इस काम की खुशी सिर्फ कमाई तक सीमित नहीं है. वह कहती हैं कि हाथ से तैयार की गई ज्वेलरी की कीमत हर ग्राहक के बजट में नहीं होती. कई लोग उनकी बनाई चीजें पसंद तो करते हैं, लेकिन खरीद नहीं पाते. फिर भी जब कोई ग्राहक उनके काम को देखकर कहता है कि उनकी बनाई चीज बहुत सुंदर है, तो उन्हें बेहद खुशी होती है.
50 रुपये से शुरू होती है कीमत
पापिया के यहां हाथ से तैयार की गई ज्वेलरी की कीमत भी अलग-अलग डिजाइन और इस्तेमाल किए गए सामान के हिसाब से तय होती है. उनके बनाए सामान की शुरुआती कीमत करीब 50 रुपये से होती है. यानी कम बजट में भी लोग उनके हाथ से तैयार किए गए आभूषण खरीद सकते हैं. वहीं खास और ज्यादा मेहनत वाले डिजाइन की कीमत उसके काम और सामग्री के हिसाब से बढ़ती है.